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राज्य कृषि समाचार (State News)

नूंह के किसान तरबूज की खेती से कमा रहे प्रति एकड़ 2 लाख रुपये का मुनाफा

17 सितंबर 2026, नूंह (हरियाणा): नूंह के किसान तरबूज की खेती से कमा रहे प्रति एकड़ 2 लाख रुपये का मुनाफा – मेवात क्षेत्र के नूंह जिले में किसान अब पारंपरिक गेहूं-सरसों की खेती छोड़कर बागवानी की नई तकनीकों की ओर बढ़ रहे हैं। रहपुवा गांव के किसान जलालुद्दीन अहमद तरबूज की नैनहेम्स किस्म की खेती से प्रति एकड़ करीब 2 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।

जलालुद्दीन अहमद के खेत में तरबूज की पैदावार 70 से 75 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच रही है। बाजार में तरबूज 3,000 से 3,500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिक रहा है, जबकि खेती पर लागत महज 50 से 60 हजार रुपये प्रति एकड़ आ रही है। तरबूज के अलावा वे खरबूजा, खीरा, करेला और टमाटर की भी खेती करते हैं, जिससे साल भर उनके खेत से किसी न किसी सब्जी की आमदनी बनी रहती है।

पहले इस इलाके के ज्यादातर किसान परंपरागत रूप से गेहूं और सरसों की खेती पर ही निर्भर थे, जिसमें मौसम की मार और सीमित सिंचाई साधनों के चलते मुनाफा बहुत सीमित रहता था। तरबूज और खरबूजे जैसी नकदी फसलों की तरफ रुख करने के बाद जलालुद्दीन अहमद जैसे किसानों की आमदनी में कई गुना बढ़ोतरी देखी गई है, क्योंकि गर्मियों में इन फलों की मांग और कीमत दोनों अच्छी रहती है।

ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग बनी सफलता की कुंजी

क्षेत्र के किसान ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और टनल खेती जैसी आधुनिक तकनीकों को अपना रहे हैं, जिससे पानी की बचत के साथ-साथ पैदावार में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है। इन तकनीकों से खेत में नमी लंबे समय तक बनी रहती है और खरपतवार भी कम उगते हैं, जिससे निराई-गुड़ाई पर होने वाला खर्च घट जाता है।

जिले के एक अन्य किसान मोहम्मद इरशाद 30 से 40 एकड़ में तरह-तरह की सब्जियों की खेती करते हैं। बागवानी विभाग की ओर से ड्रिप सिस्टम, मल्चिंग और टनल खेती पर किसानों को सब्सिडी दी जा रही है, जिसका फायदा उठाकर क्षेत्र के कई किसान अब सब्जी और फल की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। मेवात की रेतीली और कम उपजाऊ मानी जाने वाली जमीन पर भी तरबूज और खरबूजे जैसी फसलें अच्छी पैदावार दे रही हैं, क्योंकि इन फसलों को कम पानी और हल्की रेतीली मिट्टी ज्यादा रास आती है।

मेवात क्षेत्र के लिए बदलाव की शुरुआत

नूंह जिला परंपरागत रूप से कृषि के मामले में हरियाणा के पिछड़े इलाकों में गिना जाता रहा है, लेकिन बागवानी तकनीकों के आने से यहां की तस्वीर बदल रही है। कम पानी में ज्यादा मुनाफा देने वाली सब्जियों और फलों की खेती किसानों को गेहूं-सरसों के मुकाबले कहीं बेहतर आमदनी दे रही है। स्थानीय व्यापारी अब सीधे खेतों से तरबूज-खरबूजा खरीदकर दिल्ली-एनसीआर की मंडियों तक पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों को अच्छा भाव मिल रहा है।

गर्मी के महीनों में दिल्ली-एनसीआर के करीब होने का सीधा फायदा नूंह के किसानों को मिलता है, क्योंकि तरबूज-खरबूजा जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों को कम समय में बड़े बाजार तक पहुंचाया जा सकता है। इलाके के युवा किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर बागवानी विभाग की कार्यशालाओं में हिस्सा लेकर नई तकनीकें सीख रहे हैं, ताकि वे भी जलालुद्दीन अहमद जैसे किसानों की तरह बेहतर मुनाफा कमा सकें।

नूंह जैसे पानी की कमी वाले क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों से मुनाफा बढ़ने की यह कहानी बताती है कि सरकारी सब्सिडी और सही तकनीक के मेल से कम संसाधन वाले इलाकों के किसान भी ऊंची आय हासिल कर सकते हैं। इससे इलाके में ड्रिप उपकरण, मल्च शीट और गुणवत्तापूर्ण बीज बेचने वाले कृषि-इनपुट कारोबारियों के लिए भी नए अवसर बन रहे हैं, क्योंकि जैसे-जैसे किसान इस मॉडल को अपनाएंगे, वैसे-वैसे इन उपकरणों की मांग और बढ़ेगी।

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