किसानों को सलाह सिंचाई से पहले मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें
06 मार्च 2026, भोपाल: किसानों को सलाह सिंचाई से पहले मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें – गेहूं उत्पादन करने वाले किसानों को भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल ने सलाह जारी की है. हालांकि यह सलाह 15 मार्च तक के लिए है लेकिन सलाह देते हुए यह कहा गया है कि पानी की बचत, लागत कम करने और फसल को रोगों व कीटों से सुरक्षित रखने के लिए समय पर और विवेकपूर्ण सिंचाई प्रबंधन किया जाए।
संस्थान ने किसानों से कहा है कि सिंचाई से पहले मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें। बारिश की संभावना होने पर सिंचाई से बचें ताकि खेत में जलभराव की स्थिति न बने। संस्थान के अनुसार, गेहूं की फसल इस समय संवेदनशील अवस्था में है। सिंचाई के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
जब हवा की गति कम हो, अधिमानतः शाम के समय ही सिंचाई करें ताकि फसल को गिरने से बचाया जा सके। सिंचाई से पहले बारिश का पूर्वानुमान जरूर देख लें। जलभराव की स्थिति फसल को नुकसान पहुँचा सकती है। दानों को सिकुड़ने और गर्मी से होने वाले तनाव के लिए दानों के भरने की अवस्था में अंतिम सिंचाई करें और फसल को गिरने से बचाने हेतु सिंचाई हवा शांत होने पर ही करें। यदि तापमान लगातार 3 दिन से अधिक बढ़ा हुआ रहे तो फूल आने के बाद 0.2% म्यूरेट ऑफ पोटाश (200 लीटर पानी में 400 ग्राम) का छिड़काव करें। 200 लीटर पानी में 4 किलोग्राम पोटेशियम नाइट्रेट घोलकर छिड़काव करें, जिससे गर्मी के तनाव को कम किया जा सके। दक्षिणी हरियाणा और उत्तरी राजस्थान में अत्यधिक तापमान के दौरान दोपहर 2 से 2:30 बजे के आसपास एक घंटे के लिए स्प्रिंकलर सिंचाई की जा सकती है। दाना भराव अवस्था में अंतिम सिंचाई अवश्य करें ताकि दाने सिकुड़ने से बचें।
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