डीएपी के वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए किसानों को प्रोत्साहित करें
27 मार्च 2026, नर्मदापुरम: डीएपी के वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए किसानों को प्रोत्साहित करें – कलेक्टर सुश्री सोनिया मीना ने विभिन्न विभागों के अंतर्गत संचालित जनहितकारी योजनाओं, विभागीय कार्यों एवं निर्धारित लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री हिमांशु जैन, अपर कलेक्टर श्री अनिल जैन, उपसंचालक कृषि श्री रविकांत सिंह, जिला आपूर्ति अधिकारी श्रीमती रश्मि साहू सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान कलेक्टर ने कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों की योजनाओं की समीक्षा करते हुए निर्देशित किया कि किसानों को डीएपी के वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के प्रति लगातार जागरूक किया जाए तथा उन्हें इसके उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने मार्कफेड एवं सहकारिता विभाग को कृषि विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर इस कार्य को प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए। साथ ही ई-विकास पोर्टल पर खाद हेतु जारी टोकन में दर्ज फसल का अनिवार्य सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि आवश्यकता से अधिक खाद का भंडारण न हो, इसके लिए संबंधित विभाग सतत निगरानी रखें। दूरस्थ क्षेत्रों में खाद की सुगम उपलब्धता हेतु कैश सेल पॉइंट के माध्यम से वितरण के लिए कार्य योजना बनाने के भी निर्देश दिए।
कलेक्टर ने फसल कटाई उपरांत नरवाई प्रबंधन की समीक्षा करते हुए हार्वेस्टर के साथ एसएमएस अटैचमेंट के उपयोग को बढ़ावा देने तथा कृषि यंत्रों के माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कृषि, पशुपालन एवं कृषि अभियांत्रिकी विभाग को समन्वित प्रयासों से गौशालाओं एवं डेयरी के लिए भूसे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में भावांतर योजना अंतर्गत सरसों सहित अन्य फसलों के पंजीयन एवं रकबे की भी समीक्षा की गई।
इसके अतिरिक्त कलेक्टर ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, “पर ड्रॉप मोर क्रॉप”, उद्यानिकी फसलों के क्लस्टर विस्तार, पीएमएफएमई योजना, भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना तथा मत्स्य पालन में आधुनिक तकनीकों के उपयोग की प्रगति की भी समीक्षा की। आगामी गेहूं उपार्जन को लेकर कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी उपार्जन केंद्रों पर निर्धारित तिथि से पूर्व आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। नोडल अधिकारियों से व्यवस्था की पुष्टि रिपोर्ट प्राप्त की जाए तथा उपार्जन समिति यह सुनिश्चित करे कि शासन की नीति अनुसार गेहूं खरीदी सुचारू रूप से प्रारंभ एवं संचालित हो।
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