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राज्य कृषि समाचार (State News)

कृषि मंत्री से बात करने वाले किसान से कृषक जगत की चर्चा

छोटे किसानों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता

09 सितम्बर 2024, इंदौर: कृषि मंत्री से बात करने वाले किसान से कृषक जगत की चर्चा – सोयाबीन के दामों को लेकर किसानों द्वारा पंचायतों एवं प्रशासनिक अधिकारियों को दिए जा रहे ज्ञापन आदि की जानकारी के संबंध में मप्र के कृषि मंत्री श्री कंषाना से गत दिनों बात करने वाले श्री सुनील पाटीदार ग्राम दसाई तहसील सरदारपुर जिला धार के निवासी हैं। वे 3 एकड़ ज़मीन पर परम्परागत खेती करने वाले लघु कृषक हैं। श्री पाटीदार का कहना है कि सोयाबीन के कम दाम पर बिकने का सबसे ज़्यादा असर छोटे किसानों पर पड़ रहा है। साथ ही छोटे किसानों को योजनाओं का उतना लाभ नहीं मिल पाता है , जितना अपेक्षित है।

श्री सुनील पाटीदार

उल्लेखनीय है कि  किसान श्री सुनील पाटीदार ने गत दिनों राज्य के कृषि मंत्री श्री ऐदल सिंह कंषाना को सीधे फोन लगाकर पूछ लिया था कि सोयाबीन के भावों को लेकर किसानों द्वारा गांव-गांव ,तहसील में जो ज्ञापन दिए जा रहे हैं।आपके पास कुछ जानकारी है या नहीं। इस पर कृषि मंत्री ने स्पष्ट कह दिया कि मेरे पास कोई जानकारी नहीं आई है। उनका यह ऑडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस संबंध में कृषक जगत ने श्री पाटीदार से चर्चा की।

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12 वीं तक शिक्षित श्री पाटीदार ने कृषक जगत को बताया कि उनके पास तीन एकड़ ज़मीन है , जिस पर खरीफ और रबी में सोयाबीन, मक्का, गेहूं ,चना आदि फसलें लेते हैं। इसके अलावा 60 -70 एकड़ ज़मीन बटाई पर लेकर भी खेती करते हैं। सोयाबीन का दाम न्यूनतम 6 हज़ार रु करने की मांग सबसे पहले उन्होंने ही 15 अगस्त को फेसबुक पर की थी , जिसे अन्य किसानों का भी समर्थन मिला और यह प्रदेश स्तरीय मुद्दा बन गया। इसी तरह गत वर्ष लहसुन के गिरते दामों को लेकर भी उन्होंने ही सबसे पहले पहल की थी। श्री पाटीदार ने कहा कि सोयाबीन के कम दाम वाला मुद्दा उठाए करीब एक माह होने को है ,लेकिन कितने आश्चर्य की बात है कि इसकी जानकारी कृषि मंत्री तक अभी तक  नहीं पहुंची है। यह प्रशासन की नाकामी है। जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी आखिर क्या कर रहे हैं ? मेरी कृषि मंत्री से बात हुए 4 दिन हो गए हैं। मेरा ऑडियो भी वायरल हो रहा है, लेकिन इस संबंध में स्थानीय प्रशासन की ओर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

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श्री सुनील ने कहा कि 20 – 25 एकड़ वाले बड़े किसानों को यदि फसल का दाम  कम भी मिल जाए तो उन्हें उतना नुकसान नहीं होता, क्योंकि वह अपने नुकसान की भरपाई बड़ी ज़मीन होने से मिलने वाले अधिक उत्पादन से कर लेते हैं।  लेकिन छोटे और सीमान्त  किसानों को तो सीधा नुकसान हो जाता है , क्योंकि उनका रकबा कम रहता है। वह अपनी फसल पर ही निर्भर रहते हैं। उन्होंने कहा कि  लघु / सीमान्त किसानों को योजनाओं का उतना लाभ नहीं मिल पाता है , जितना  मिलना चाहिए। योजनाओं का अधिक लाभ बड़े किसान ही उठाते हैं। अपने और किसानों के हक़ के प्रति जागरूक हूँ। इसीलिए भारतीय किसान संघ ,तहसील सरदारपुर के अध्यक्ष के नाते  किसानों की आवाज़ उठाता रहता हूँ।

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