राजस्थान के जालोर में मरुभूमि को बनाया खजूर का बाग, किसान केहराराम चौधरी कमा रहे सालाना 30 लाख रुपये
24 सितंबर 2026, जालोर: राजस्थान के जालोर में मरुभूमि को बनाया खजूर का बाग, किसान केहराराम चौधरी कमा रहे सालाना 30 लाख रुपये – राजस्थान के जालोर जिले के दाता गांव में एक किसान ने रेतीली और सूखी जमीन को खजूर के बाग में बदलकर मिसाल कायम की है। किसान केहराराम चौधरी आज खजूर की खेती से सालाना करीब 30 लाख रुपये कमा रहे हैं।
यह सफलता एक टेलीविजन कार्यक्रम से मिली प्रेरणा से शुरू हुई। साल 2012 में केहराराम ने खजूर की खेती के बारे में एक कार्यक्रम देखा और इसे अपनाने का मन बनाया। करीब ढाई साल तक जानकारी जुटाने और तैयारी के बाद, 2014-15 में उन्होंने अपने खेत में विधिवत खजूर के पौधे रोप दिए।
312 पौधों से शुरुआत, अब सैकड़ों पेड़ों का बाग
शुरुआत में उद्यान विभाग की मदद से बरही (बरी) किस्म के 312 पौधे लगाए गए। बाद में मेडजूल किस्म भी जोड़ी गई और पौधों की संख्या बढ़ाकर करीब 600 तक पहुंचा दी गई। आज उनकी कुल जोत 7 हेक्टेयर है, जिसमें खजूर के साथ-साथ अनार की खेती भी होती है।
खेती में उन्होंने आधुनिक तरीके अपनाए हैं। ड्रिप सिंचाई पद्धति से पानी की बचत होती है, वहीं जैविक खाद के इस्तेमाल से लागत कम और गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है। कई रिपोर्टों में इसे इज़रायली तकनीक से प्रेरित बागवानी मॉडल बताया गया है।
जालोर जिला अपनी शुष्क जलवायु और सीमित बारिश के लिए जाना जाता है, जहां परंपरागत रूप से बाजरा और अन्य कम पानी वाली फसलें ही उगाई जाती रही हैं। खजूर जैसी फसल के लिए यहां का तापमान और मिट्टी अनुकूल मानी जाती है, बशर्ते शुरुआती वर्षों में पौधों को नियमित देखभाल और सही सिंचाई मिले।
एक पेड़ से 100 किलो उत्पादन, हजार रुपये किलो भाव
केहराराम के बाग में अब हर साल भारी उत्पादन हो रहा है। एक पेड़ से औसतन करीब 100 किलोग्राम खजूर मिलता है, और कुल वार्षिक उत्पादन 21,200 किलोग्राम तक पहुंच गया है। बाजार में इन खजूरों की कीमत करीब 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिल जाती है।
इसी उत्पादन और भाव के आधार पर केहराराम की सालाना आय अकेले खजूर से करीब 30 लाख रुपये आंकी गई है। यह आंकड़ा दो स्वतंत्र रिपोर्टों में एक जैसा दर्ज है, जिससे इसकी पुष्टि होती है। इसके अलावा वे अनार की खेती से भी अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं, जिससे उनकी कुल वार्षिक आय और बढ़ जाती है।
राजस्थान जैसे मरुस्थलीय इलाके में, जहां पानी की कमी और पारंपरिक फसलों में अनिश्चित मुनाफा आम बात है, खजूर जैसी फसल किसानों के लिए एक टिकाऊ विकल्प बनकर उभरी है। खजूर का पौधा एक बार लगने के बाद कई दशकों तक उत्पादन देता है और कम पानी में भी टिका रहता है।
पेड़ लगने के शुरुआती चार-पांच साल में उत्पादन बहुत कम रहता है, और इस दौरान किसान को सिर्फ निवेश करना पड़ता है, कमाई नहीं होती। केहराराम बताते हैं कि यही धैर्य वाला दौर सबसे मुश्किल था, लेकिन एक बार पेड़ पूरी तरह विकसित हो जाने के बाद हर साल का उत्पादन लगातार बढ़ता चला गया।
केहराराम चौधरी की कहानी बताती है कि सही जानकारी, धैर्य और आधुनिक सिंचाई तकनीक के सहारे बंजर और सूखी जमीन को भी लाभ का जरिया बनाया जा सकता है। शुरुआती कुछ साल इंतजार और निवेश के होते हैं, लेकिन एक बार बाग तैयार हो जाए तो आमदनी लंबे समय तक बनी रहती है।
उनके इलाके के कई अन्य किसान अब उनके बाग को देखने आते हैं और खजूर की खेती को अपनाने पर विचार कर रहे हैं। केहराराम खुद भी नए किसानों को पौध चुनने, सिंचाई की मात्रा और शुरुआती देखभाल को लेकर सलाह देते हैं।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture


