डीएपी केवल आंकड़ों में है,हकीकत में शून्य

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उर्वरकों का भौतिक सत्यापन

(विशेष प्रतिनिधि)

19 अक्टूबर 2021, इंदौर ।  डीएपी केवल आंकड़ों में है,हकीकत में शून्य – आगामी रबी फसल के लिए मप्र में उर्वरकों की मांग बढ़ती जा रही है, एक ओर सरकार उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर मुरैना में उर्वरक के लिए कतार में लगे किसानों पर लाठी चार्ज का वायरल वीडियो सरकारी दावों की पोल खोल रहा है। ऐसे में प्रदेश के मंत्री श्री ओपीएस भदौरिया द्वारा किसान से गुस्से में अभद्रता से बात करने के वीडियो ने आग में घी डालकर उर्वरकों की उपलब्धता पर सवालिया निशान लगा दिया है। उर्वरकों का भौतिक सत्यापन नहीं करने देने का एक मामला भी सामने आया है, जिसमें कृषि संचालक ने भौतिक सत्यापन के कार्य को गंभीरता से करने की बात कही।

प्राय: हर रबी सीजन में सरकार द्वारा उर्वरकों की उपलब्धता के दावे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविकता में किसानों को उनकी जरूरत के हिसाब से उर्वरक नहीं मिल पाता है। सरकार द्वारा सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को निर्धारित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है। इस वर्ष यह अनुपात निजी क्षेत्र के लिए 25 प्रतिशत और सहकारी समतियों के लिए 75 प्रतिशत तय किया गया है। उर्वरक की उपलब्धता और और वितरण की पारदर्शी व्यवस्था के लिए सरकार ने अनुदानित उर्वरकों की बिक्री के लिए डीबीटी योजना लागू की है,जिसमें विक्रय पीओएस (पॉइंट ऑफ़ सेल्स) के द्वारा करना अनिवार्य किया है। इस व्यवस्था के तहत किसानों को आधार कार्ड /अंगूठे के निशान के आधार पर उर्वरक दिया जाता है। इससे वितरण की वास्तविक स्थिति आईएफएमएस पोर्टल पर प्रदर्शित होती है।

पीओएस द्वारा विक्रित उर्वरक मात्रा के आधार पर संबंधित उर्वरक निर्माता /आयातक कम्पनी को भारत सरकार द्वारा अनुदान जारी किया जाता है। भौतिक सत्यापन के आदेश संचालक, कृषि भोपाल ने गत 28 सितंबर को जारी किए थे, ताकि वास्तविक समय पर उर्वरकों की वास्तविक उपलब्ध मात्रा ज्ञात हो सके। लेकिन प्राय: देखा गया है कि ग्रामीण क्षेत्र की सहकारी समितियों में बिजली और नेट वर्क की समस्या के चलते पीओएस की प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी आती है और अंतत: किसानों को बिना इस प्रक्रिया के उर्वरक देना पड़ता है। इस कारण पोर्टल पर स्टॉक दिखाई देता है ,जबकि वास्तविक रूप से वितरित हो चुका होता है।

सहकारी समितियों द्वारा उर्वरकों का भौतिक सत्यापन नहीं करने देने का ताजा मामला सामने आया है। गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर कम्पनी (जीएसएफसी) के प्रतिनिधियों ने गत दिनों प्राथमिक साख सहकारी समिति ताज़पुरा (रायसेन) और मार्कफेड के डबल लॉक केंद्र झाबरा में कम्पनी द्वारा प्रदाय उर्वरकों का भौतिक सत्यापन करना चाहा तो संबंधित सहकारी संस्थाओं ने नहीं करने दिया। इससे दाल में कुछ काला होने की आशंका प्रतीत हो रही है। जब इसकी शिकायत संचालक कृषि को की गई तो संचालक ने शीघ्र पूर्ण करने और संबंधित संस्थाओं को सत्यापन के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए। इस संबंध में सहकारी समिति मंडलेश्वर के प्रबंधक श्री सुनील पाटीदार ने कृषक जगत को बताया कि यदि कोई संस्था प्रतिनिधि सक्षम अधिकारी की अनुमति लेकर सहकारी समिति के स्टॉक का भौतिक सत्यापन करना चाहता है,तो उसे नहीं रोका जाना चाहिए।

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