Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

CSAUAT की एडवाइजरी: ठंड में झुलसा रोग से आलू की फसल को ऐसे रखें सुरक्षित  

14 जनवरी 2026, भोपाल: CSAUAT की एडवाइजरी: ठंड में झुलसा रोग से आलू की फसल को ऐसे रखें सुरक्षित – उत्तर प्रदेश में इन दिनों कड़ाके की ठंड के साथ घना कोहरा छाया हुआ है। तापमान में लगातार गिरावट और नमी बढ़ने से आलू की फसल पर बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है। खासकर झुलसा रोग (ब्लाइट) इस मौसम में आलू किसानों के लिए बड़ी चिंता बन सकता है। इसे देखते हुए कानपुर स्थित चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSAUAT) के साकभाजी विज्ञान विभाग ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है।

Agro-weather का असर, फसल पर बढ़ा जोखिम

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, ठंड और कोहरे के कारण वातावरण में नमी अधिक बनी रहती है, जो झुलसा रोग के पनपने के लिए अनुकूल मानी जाती है। विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने बताया कि जिन किसानों ने आलू की पछेती बोआई की है, उनकी फसल पर रोग का खतरा अपेक्षाकृत अधिक है। ऐसे में समय रहते सावधानी और उचित प्रबंधन बेहद जरूरी है।

सर्दी और कोहरे में तेजी से फैलता है झुलसा रोग

आलू विशेषज्ञ डॉ. अजय यादव ने बताया कि झुलसा रोग आलू की सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है, जो ठंड और कोहरे में बहुत तेजी से फैलता है। तापमान गिरने पर और पत्तियों पर नमी बने रहने से यह रोग पत्तियों से शुरू होकर पूरी फसल को प्रभावित कर सकता है। यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए तो इससे उपज और गुणवत्ता दोनों पर भारी असर पड़ता है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

पत्तियों पर दिखते हैं शुरुआती लक्षण

झुलसा रोग के शुरुआती लक्षणों में आलू की पत्तियों पर छोटे-छोटे भूरे या काले धब्बे दिखाई देने लगते हैं। ये धब्बे धीरे-धीरे बढ़कर पत्तियों को सुखा सकते हैं। कई बार यह लक्षण पोषक तत्वों की कमी जैसे भी नजर आते हैं, जिसे वैज्ञानिक ‘मनी लीफ कॉम्प्लेक्स डिजीज’ कहते हैं। ऐसे में सही पहचान और उपचार बेहद जरूरी है।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

रोग से बचाव के लिए क्या करें किसान

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, झुलसा रोग से बचाव के लिए किसान सायमोक्सनिल + मैंकोजेब दवा 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। या एजोक्सीस्ट्रॉबिन + टीनूकोनाजोल दवा 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। 

इसके अलावा, यदि पत्तियों पर पोषक तत्वों की कमी जैसे लक्षण दिखें तो क्लोरोथेलोनील दवा 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। साथ में मल्टी माइक्रोन्यूट्रिएंट मिश्रण (आयरन, कॉपर, जिंक, कैल्शियम, बोरान आदि) का प्रयोग करें। यह मिश्रण लगभग 1 किलो प्रति एकड़ पर्याप्त होता है।

सिंचाई और खेत प्रबंधन पर भी दें ध्यान

डॉ. अजय यादव ने बताया कि झुलसा रोग से बचाव के लिए खेत में पानी जमा न होने दें। जरूरत के अनुसार सिंचाई करें और संक्रमित पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट कर दें, ताकि रोग आगे न फैले। किसी भी दवा का छिड़काव करते समय साफ पानी का प्रयोग करें और सुबह या शाम के समय ही छिड़काव करें।

समय पर सतर्कता ही बचाएगी फसल

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम को देखते हुए अगर किसान समय रहते सलाह के अनुसार दवा छिड़काव और खेत प्रबंधन करें, तो झुलसा रोग से काफी हद तक बचाव संभव है। सही समय पर की गई सावधानी आलू की फसल को सुरक्षित रखने के साथ-साथ किसानों को आर्थिक नुकसान से भी बचा सकती है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture