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फसल बीमा में असमंजस

19 जून 2020, भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून का आगमन हो चुका है। कई जिलों में खरीफ फसलों की बोवनी होनी शुरू हो गई है। सामान्यत: माना जाता है कि खेती मानसून का जुआ है। इसमें विशेष कर खरीफ सीजन पर मानसून का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। वर्षा अधिक हो या कम, जल्दी हो या देर से हो, हर स्थिति में खरीफ की फसल पर प्रभाव पड़ता है। इस तरह की आसामान्य परिस्थितियों से निपटने के लिये ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बनी है। खरीफ सीजन के लिए प्रदेश में इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर अभी तक शासन एवं प्रशासन स्तर पर असमंजस बना हुआ है।

बोवनी प्रारम्भ हो चुकी है लेकिन अभी तक कम्पनियों से बीमे की प्रीमियम की दरें आमंत्रित नहीं हुई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन को लेकर शासन प्रशासन एवं बीमा कम्पनियों के बीच बैठकों का दौर जारी है। इस बीच में राज्य फसल बीमा कंपनी बनाने की सुगबुगाहट उठी थी। लेकिन उसके क्रियान्वयन मेें राजनैतिक एवं व्यवहारिक कठिनाइयों को दृष्टिगत रखते हुए योजना पर ब्रेक लगा है। इधर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए प्रीमियम की दरें 3 साल अथवा 1 साल के आधार पर बुलाई जाये, इसको लेकर भी चिंतन जारी है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक प्रीमियम की दरों के लिए निविदाएं शीघ्र ही आमंत्रित होंगी। इस माह के अंत तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रदेश में क्रियान्वयन की रूपरेखा स्पष्ट हो जायेगी।

फसल बीमा अब है स्वैच्छिक

केन्द्र ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में संशोधन किया है। अब ऋणी किसानों के फसल बीमा स्वैच्छिक होगा। पूर्व में ऋणी किसानों के लिये यह अनिवार्य था। ऋणी किसान को अपने बैंक को योजना की अंतिम तिथि के पूर्व इस संबंध में लिखित सूचना देनी होगी। केन्द्र ने वर्तमान खरीफ सीजन के लिए 15 जुलाई अंतिम तिथि निश्चित की है। म.प्र. में अभी तक इस संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है।

सूत्रों के मुताबिक राज्य स्तरीय फसल बीमा समिति इस माह के अंत तक योजना को अंतिम रूप देकर प्रदेश में योजना का क्रियान्वयन शुरू कर देगी।

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