छत्तीसगढ़ में ‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना‘ एक जून से

Share

किसान  को मिलेंगे प्रति एकड़ 10-10 हजार रूपए

31 मई 2021, रायपुर । छत्तीसगढ़ में ‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना‘ एक जून से – राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ में वृक्षारोपण कार्य को अधिक से अधिक प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक जून 2021 से ‘‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना‘‘ लागू की जा रही है।     मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना में  जिन किसानों ने खरीफ वर्ष 2020 में धान की फसल ली हैे, यदि वे धान फसल के बदले अपने खेतों में वृक्षारोपण करते हैं, तो उन्हें आगामी 3 वर्षों तक प्रतिवर्ष 10 हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि  दी जाएगी। इसी तरह ग्राम पंचायतों के पास उपलब्ध राशि से यदि वाणिज्यिक वृक्षारोपण किया जाएगा, तो एक वर्ष बाद सफल वृक्षारोपण की दशा में संबंधित ग्राम पंचायतों को शासन की ओर से 10 हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इससे भविष्य में पंचायतों की आय में वृद्धि हो सकेगी। इसके अलावा संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के पास उपलब्ध राशि से यदि वाणिज्यिक आधार पर राजस्व भूमि पर वृक्षारोपण किया जाता है, तो पंचायत की तरह ही संबंधित समिति को एक वर्ष बाद 10 हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वृक्षों को काटने व विक्रय का अधिकार संबंधित समिति का होगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में विगत 18 मई को आयोजित मंत्रिमण्डल की बैठक में ‘‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना‘‘ को छत्तीसगढ़ में लागू करने का अहम निर्णय लिया गया। योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में वृक्षारोपण को अधिक से अधिक प्रोत्साहित करना है। साथ ही पर्यावरण में सुधार लाकर जलवायु परिवर्तन के विपरित प्रभावों को कम करना है। इसमें निजी क्षेत्र, कृषकांे, शासकीय विभागों एवं ग्राम पंचायतों को भूमि पर ईमारती, गैर ईमारती प्रजातियों के वाणिज्यिक-औद्योगिक वृक्षारोपण को प्रोत्साहित किया जाएगा। 

मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के तहत गैर वनीय क्षेत्रों में ईमारती, गैर ईमारती, फलदार वृक्ष बांस अन्य लघु वनोपज एवं औषधीय पौधों का वृहद पैमाने पर रोपण किया जाएगा । इस हेतु उच्च गुणवत्ता के पौधे तैयार किए जाएंगे। जिस वन और राजस्व वन भूमि पर वन अधिकार पत्र दिए गए हैं, उस भूमि पर भी हितग्राहियों की सहमति से ईमारती, फलदार, बांस, लघु वनोपज एवं औषधि पौधों का रोपण किया जाएगा। वन क्षेत्रों से जलाऊ, चारा, ईमारती काष्ठ तथा औद्योगिक क्षेत्र उत्पाद का दबाव कम करने तथा भारत सरकार पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के द्वारा जारी निर्देशों के अनुक्रमण में निजी भूमि में वृक्षों के रोपण को बढ़ावा दिया जाएगा। निजी क्षेत्र में पूर्व से खड़े हुए वृक्ष तथा रोपित वृक्षों के लिए कटाई के अनुमति के प्रावधानों को और अधिक सरल तथा सुगम बनाया जाएगा.

राज्य में योजना का क्रियान्वयन प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के द्वारा कृषि उत्पादन आयुक्त की सहभाागिता से किया जाएगा। जिलों में इस योजना का क्रियान्वयन क्षेत्रीय वन मंडल अधिकारियों के द्वारा कलेक्टर की देखरेख में किया जाएगा।

Share
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published.