राज्य कृषि समाचार (State News)

ग्वालियर के कृषि मंथन मेले को मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से किया सम्बोधित

27 फरवरी 2026, ग्वालियर: ग्वालियर के कृषि मंथन मेले को मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से किया सम्बोधित – ग्वालियर में आयोजित “कृषि मंथन–2026” को को मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से देशभर से पधारे कृषि वैज्ञानिकों, कुलगुरुओं, नीति-निर्माताओं, प्रगतिशील किसानों, कृषक संगठनों के प्रतिनिधियों और युवा विद्यार्थियों को  सम्बोधित किया।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कृषि केवल आजीविका नहीं है, यह हमारी संस्कृति रही है। कृषि हमारी अर्थव्यवस्था की धुरी है। मध्य प्रदेश आज देश का कृषि पावर हाउस बनकर उभरा है। गेहूं, चना, सोयाबीन, दलहन-तिलहन, दुग्ध, बागवानी और मत्स्य उत्पादन में हमने उल्लेखनीय प्रगति की है। यह उपलब्धि हमारे परिश्रमी किसानों और वैज्ञानिकों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि तीन दिवसीय मंथन में जिन 6 प्रमुख विषयों पर विचार हो रहा है, जिसमें पादप प्रजनन और बीज क्षेत्र की नई चुनौतियां, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, बाजार नवाचार और नीतिगत सुधार, हाई-टेक हॉर्टिकल्चर, कृषि यंत्रीकरण और डिजिटल कृषि, जलवायु अनुकूल टिकाऊ कृषि शामिल हैं।ये सभी विषय मध्यप्रदेश ही नहीं, पूरे देश की कृषि के भविष्य से जुड़े हुए हैं। कृषि धन्य है, कृषि पवित्र है, कृषि जीवन का मूल है। इसी मंत्र को आत्मसात करते हुए मध्य प्रदेश इस वर्ष को कृषि कल्याण वर्ष ; के रूप में मना रही है।  यह  कृषि  मंथन आयोजन हमारे कृषि कल्याण वर्ष के संकल्पों को ही पूर्ण कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की खेती, डेटा, ड्रोन, डिजिटलीकरण पर आधारित हो रही है। खेती अब केवल जीविका नहीं, आत्मनिर्भरता का अभियान बन चुकी है। किसान अब उद्यमी भी हैं और भारत की अर्थव्यवस्था के ड्राइवर भी हैं।  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने ‘GYAN’ (गरीब, युवा, नारी और किसान) का मंत्र दिया था, हमने उसमें आई फॉर इंडस्ट्रियलाइजेशन और आई फॉर इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़कर ज्ञानी यानी (GYANII) बनाया है। हमारी सरकार प्रदेश में इंडस्ट्रियलाइजेशन के साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी फोकस कर रही है। कृषक कल्याण वर्ष में हमारा विशेष फोकस खेती को आधुनिक तकनीक, नवाचार और मूल्य संवर्धन से जोड़ने पर है। “समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश” की थीम के साथ इस पूरे वर्ष मध्यप्रदेश कृषि उत्सव मनाया जा रहा है।  हम किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। इस बार हमारी सरकार ने कृषि एवं कृषि से संबंधित सेक्टर के लिए लगभग 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखा है। हम किसान कल्याण एवं कृषि विकास के साथ-साथ उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा दे रहे हैं। पशुपालन एवं डेयरी को प्रोत्साहित कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य है कि हम आत्मनिर्भर और समृद्ध किसान, उन्नत कृषि और मूल्य श्रंखला आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था के माध्यम से समृद्ध प्रदेश का निर्माण करेंगे। किसानों की आय बढ़ाने और आय को स्थाई करेंगे, खेती को लाभ का धंधा बनाएंगे। किसानों की आय बढ़ाने, लागत घटाने एवं खेती को स्थायी करने के लिए हमने 10  संकल्पों का मॉडल तैयार किया है।

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि बीज से बाजार तक किसानों के साथ सरकार है।  किसानों की सुविधा के लिए हम सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी, बिजली, शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण, फसलों पर समर्थन मूल्य और फसल बीमा की राशि का समय पर अंतरण किया जा रहा है। प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र में निरंतर वृद्धि हो रही है। प्रदेश की सिंचाई क्षमता लगभग ५५ लाख हेक्टेयर हो गई है। वर्ष 2028-29 तक 100 लाख हेक्टेयर तक सिंचाई क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है।  भावांतर योजना के माध्यम से प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक 7 लाख 17 हज़ार किसानों के खाते में फरवरी तक 1500 करोड़ रुपए की राशि का अंतरण किया।मध्यप्रदेश, देश का इकलौता राज्य है, जहां तीन-तीन नदी जोड़ो परियोजनाएं आकार ले रही हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना, संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक राष्ट्रीय परियोजना और ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज योजना की सौग़ात मिली है। डिंडौरी में  मध्यप्रदेश राज्य श्रीअन्न अनुसंधान केंद्र की स्थापना से मिलेट्स के उत्पादन और पोषण सुरक्षा को नई ऊँचाइयों पर ले जाया जाएगा। ग्वालियर में सरसों अनुसंधान केंद्र और उज्जैन में चना अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।

किसानों को दी गई सुविधा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपये पर किसानों के हित में राज्य सरकार द्वारा 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया गया है। आपदा प्रभावित 24 लाख 14 हज़ार से अधिक किसानों को 2 हज़ार 106 करोड़ 64
लाख रुपये की राशि प्रदान की गई। सहकारी बैंकों के माध्यम से 0% ब्याज दर पर कृषकों को फसल ऋण दिये जाने की योजना को निरंतर रखे जाने को हमने स्वीकृति दी है। राज्य में श्रीअन्न उत्पादक किसानों के साथ सरकार खड़ी है। रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना अंतर्गत खरीफ 2025 में लगभग 15,000 मीट्रिक टन कोदो एवं कुटकी का उपार्जन, कुटकी राशि रुपये 3500 प्रति क्विंटल एवं कोदो राशि रुपये 2500 प्रति क्विंटल के मान से करने का निर्णय लिया है। हम अन्नदाताओं को ऊर्जादाता भी बना रहे हैं। प्रधानमंत्री कृषक सूर्य मित्र योजना के अंतर्गत 3 हजार करोड़ रुपए की लागत से 1 लाख सोलर सिंचाई पंप किसानों को दिए जाने का लक्ष्य हमने रखा है। राज्य में 6 वन विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए 48 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

अंत में , मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने विशेष रूप से इस आयोजन के लिए राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला और उनकी पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को कृषि नवाचार के लिए धन्यवाद देता हूं। आपने शुष्क और अर्ध- शुष्क क्षेत्रों के लिए उच्च उपज एवं जलवायु-अनुकूल किस्में विकसित की हैं। 29 बीज उत्पादक फार्मों पर हजारों क्विंटल गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन हो रहा है। प्रदेश की पहली एयरोपोनिक्स इकाइयां ग्वालियर, इंदौर और सीहोर में स्थापित की गई हैं।  जीनोम एडिटिंग और डीएनए फिंगरप्रिंटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण किस्मों की पहचान की जा रही है। आप इसी तरह अपने दायित्वों का
निर्वहन करते रहें।

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