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राज्य कृषि समाचार (State News)

छत्तीसगढ़ः 35 महिला किसानों ने सब्जी की खेती से कमाए 6 लाख रुपये, बिहान योजना बनी सहारा

12 सितंबर 2026, रायपुर: छत्तीसगढ़ः 35 महिला किसानों ने सब्जी की खेती से कमाए 6 लाख रुपये, बिहान योजना बनी सहारा – छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड की ग्राम पंचायत रिसोरा की 35 महिला किसानों ने सामूहिक खेती से सफलता की नई कहानी लिखी है। “उजाला उत्पादक समूह” नाम से संगठित इन महिलाओं ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की राज्य इकाई “बिहान” से जुड़कर सब्जी की खेती शुरू की और महज एक सीजन में 600 क्विंटल उपज हासिल कर ली।

समूह ने लौकी की 250 क्विंटल, करेले की 250 क्विंटल और खीरे की 100 क्विंटल पैदावार ली। इस उपज को सीधे थोक बाजार में बेचकर महिलाओं ने कुल 6 लाख रुपये की आमदनी हासिल की। समूह का कहना है कि उनका मकसद शुरू से ही सामूहिक प्रयास के जरिए उत्पादन बढ़ाना और बेहतर बाजार तलाशना रहा।

सिर्फ 2 लाख की पूंजी से खड़ा किया कारोबार

खेती शुरू करने के लिए महिलाओं ने कुल 2 लाख रुपये की पूंजी जुटाई थी, जिसमें बिहान के क्लस्टर स्तर से 50,000 रुपये की मदद मिली और बाकी 1.5 लाख रुपये समूह ने कर्ज के रूप में लिया। कम पूंजी में शुरू हुआ यह उपक्रम एक सीजन में ही तीन गुने से ज्यादा रिटर्न दे चुका है। महिलाओं ने खेती के हर चरण में मिलकर काम किया — बुवाई से लेकर तुड़ाई और बाजार तक उपज पहुंचाने तक की जिम्मेदारी समूह ने खुद संभाली।

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बिहान योजना के तहत राज्यभर में लाखों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर खेती, पशुपालन और लघु उद्योगों में हाथ आजमा रही हैं। रिसोरा गांव की यह कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन और सामूहिक भागीदारी मिलने पर छोटी पूंजी से भी बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है।

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अकेले खेती करने से आसान रहा साथ मिलकर काम करना

आमतौर पर छोटी जोत वाली महिला किसानों को अकेले सब्जी की खेती में बीज, खाद, सिंचाई और बाजार तक पहुंच जैसी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। रिसोरा की महिलाओं ने समूह बनाकर इन सभी चुनौतियों को साझा तरीके से हल किया — जमीन, मेहनत और लागत सब कुछ मिलकर लगाया गया, जिससे किसी एक महिला पर पूरा जोखिम नहीं आया। समूह ने फसल की तुड़ाई का समय भी आपस में बांट लिया, ताकि उपज खराब होने से पहले जल्दी बाजार पहुंच सके।

लौकी, करेला और खीरा जैसी सब्जियां कम समय में तैयार होने वाली फसलें हैं, जिनकी मांग शहरी बाजारों में साल भर बनी रहती है। समूह ने बिचौलियों से बचते हुए सीधे थोक बाजार में उपज बेचकर बेहतर दाम हासिल किए, जिससे मुनाफे का बड़ा हिस्सा महिलाओं तक ही पहुंच सका।

समूह की सफलता के पीछे बिहान की स्थानीय टीम का लगातार मार्गदर्शन भी अहम रहा, जिसने महिलाओं को शुरुआती दौर में बीज चयन, खेत की तैयारी और कीट-प्रबंधन जैसी बुनियादी जानकारी दी। अब इस समूह की सफलता को देखकर आसपास के अन्य गांवों की महिलाएं भी इसी तरह के उत्पादक समूह बनाने में दिलचस्पी दिखा रही हैं, जिससे बिहान का यह मॉडल जिले के अन्य हिस्सों में भी फैलने की उम्मीद है।

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