देश में 3.5 करोड़ हेक्टेयर में फैल चुका है गाजर घास

Share

फूल आने से पहले उखाड़कर नष्ट करें

29 अगस्त 2020, रायसेन। देश में 3.5 करोड़ हेक्टेयर में फैल चुका है गाजर घास कृषि विज्ञान केन्द्र रायसेन के वरिष्ठ वैज्ञानिक व प्रमुख, डॉ. स्वप्निल दुबे ने बताया कि गाजरघास पूरे भारत वर्ष में लगभग 35 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में फैल चुका है एवं गाजरघास मुख्यत: शहरों में खुले स्थानों, औद्योगिक क्षेत्रों, सड़क के किनारे, नालियों एवं पड़ती भूमि के साथ-साथ खेत खलिहानों में भी फैलना शुरू हो गया है। गाजरघास से मनुष्यों में त्वचा संबंधी रोग, एक्जिमा, एलर्जी, बुखार, दमा जैसी बीमारियों हो जाती है एवं पशुओं के लिये भी यह खरतपवार विषाक्त होता है। कृषि विज्ञान केन्द्र, द्वारा 16 से 22 अगस्त, तक गाजर घास उन्मूलन सप्ताह मनाया गया।

महत्वपूर्ण खबर : केला किसानों को आर्थिक सहायता मिलेगी

श्री दुबे ने बताया गाजर घास के नियंत्रण के लिए वर्षा ऋतु में गाजरघास के पौधों को फूल आने से पहले उखाड़कर नष्ट करें। प्रतिस्पर्धा वनस्पतियों जैसे चकोड़ा व जंगली चौलाई के बीज को गाजर घास वाले स्थान पर मार्च-अप्रैल के माह में छिड़काव करें। गाजर घास पर खरपतवारनाशक रसायन ग्लायॅफोसेट 1 प्रतिशत या मेट्राब्यूजिन 0.30 प्रतिशत का घोल बनाकर छिड़काव करें व खरपतवारनाशक एलाक्लोर, एट्राजिन, 2,4 डी का भी उपयोग किया जा सकता है। गाजरघास को उखाड़कर व काटकर कम्पोस्ट बनाने के रूप में उपयोग किया जा सकता है। गाजरघास के नियंत्रण हेतु मैक्सिकन बीटल (जाइगोग्रामा बाइकोलोराटा) का उपयोग करके भी खत्म किया जा सकता है। यह मैक्सिकन बीटल खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर से प्राप्त किया जा सकता है।

इस जागरूकता सप्ताह में दिन प्रतिदिन ग्राम-सकतपुर, सोनकच्छ, चन्दौरा व कुरावत में विभिन्न गतिविधियों कृषक गोष्ठी, सामूहिक चर्चा, प्रशिक्षण कार्यक्रम द्वारा कृषकों, बच्चों व नवयुवकों को गाजर घास से फसलों में होने वाले नुकसान, पर्यावरण पर पडऩे वाले दुष्परिणाम, मनुष्यों व पशुओं में होने वाली बीमारियों एवं गाजरघास का एकीकृत प्रबंधन आदि विषयों पर कृषि विज्ञान केन्द्र के अन्य वैज्ञानिक श्री प्रदीप कुमार द्विवेदी, श्री रंजीत सिंह राघव, डॉ. मुकुल कुमार, श्री आलोक सूर्यवंशी, डॉ. अंशुमान गुप्ता, श्री सुनील कैथवास द्वारा जानकारी दी गयी।

Share
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *