राज्य कृषि समाचार (State News)

धान छोड़ गेंदा की खेती से किसान को हुआ बड़ा फायदा, एक एकड़ से कमाया 2.5 लाख का शुद्ध मुनाफा

19 जनवरी 2026, रायपुर : धान छोड़ गेंदा की खेती से किसान को हुआ बड़ा फायदा, एक एकड़ से कमाया 2.5 लाख का शुद्ध मुनाफा – कम लागत, कम समय और अधिक मुनाफे वाली खेती किसानों के लिए नई राह खोल रही है। गेंदा की खेती इसका बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में सालभर मांग रहने के कारण गेंदा किसानों को स्थायी आय का जरिया दे रहा है। यही वजह है कि अब कई किसान पारंपरिक धान की खेती छोड़कर फूलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं।

जीवनदायिनी महानदी के किनारे बसे ग्राम बरगांव के प्रगतिशील किसान देवानंद निषाद ने रबी सीजन में धान की जगह गेंदा की खेती अपनाकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत पुष्प क्षेत्र विस्तार योजना का लाभ लेते हुए उन्होंने एक एकड़ में गेंदा की खेती की और करीब 2.5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया।

धान की तुलना में कई गुना ज्यादा लाभ

किसान देवानंद निषाद बताते हैं कि पहले वे रबी में धान की खेती करते थे। एक एकड़ में लगभग 20 क्विंटल उत्पादन होता था, जिसमें 15 हजार रुपये की लागत के बाद करीब 35 हजार रुपये का ही लाभ मिल पाता था। लेकिन गेंदा की खेती ने उनकी आमदनी की तस्वीर पूरी तरह बदल दी।

60 दिन में तैयार फसल, सालभर आमदनी

उन्होंने बताया कि गेंदा की फसल करीब 60 दिनों में तैयार हो जाती है। एक एकड़ में लगभग 50 हजार रुपये की लागत से 3750 किलो फूल का उत्पादन हुआ, जिसे औसतन 80 रुपये प्रति किलो की दर से बेचकर करीब 3 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई। लागत निकालने के बाद लगभग 2.5 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।

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रोजाना बाजार में बिक रहा फूल

देवानंद निषाद प्रतिदिन 60 से 70 किलो ताजा गेंदा फूल रायगढ़ के फूल बाजार में बेचने ले जाते हैं। बाजार में इसकी निरंतर मांग बनी रहती है, जिससे बिक्री में कोई परेशानी नहीं आती।

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सरकारी योजना और तकनीकी मार्गदर्शन बना सहारा

उद्यानिकी विभाग से राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत उन्हें गेंदा के पौधे निःशुल्क मिले। साथ ही समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन मिलने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ।

गांव में फूलों की खेती बनी नई पहचान

देवानंद निषाद की सफलता से प्रेरित होकर अब ग्राम बरगांव के अन्य किसान भी रबी सीजन में धान के स्थान पर गेंदा की खेती अपनाने लगे हैं। गांव में फूलों की खेती एक नई आर्थिक क्रांति के रूप में उभर रही है, जिससे किसानों की आय बढ़ने के साथ जीवन स्तर में भी सुधार हो रहा है। 

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