राज्य कृषि समाचार (State News)

बिहार: हर पंचायत में खुलेंगे “कस्टम हायरिंग सेंटर”, छोटे किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा

15 जुलाई 2025, भोपाल: बिहार: हर पंचायत में खुलेंगे “कस्टम हायरिंग सेंटर”, छोटे किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा – बिहार के लघु और सीमांत किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब उन्हें खेती के लिए महंगे कृषि यंत्र खरीदने की ज़रूरत नहीं होगी, क्योंकि सरकार हर पंचायत में ऐसे सेंटर खोलने जा रही है, जहां से किसान कम किराये पर आधुनिक कृषि उपकरण ले सकेंगे। यह पहल खासतौर पर उन किसानों के लिए है, जो अब तक संसाधनों की कमी के कारण आधुनिक खेती से वंचित रह जाते थे।

हर पंचायत में खुलेंगे “कस्टम हायरिंग सेंटर”

राज्य के उपमुख्यमंत्री और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ऐलान किया है कि हर पंचायत में कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) स्थापित किए जाएंगे। यहां से किसानों को ट्रैक्टर, थ्रेशर, रीपर, रोटावेटर, लेजर लैंड लेवलर जैसे आधुनिक कृषि उपकरण रियायती दरों पर किराये पर मिल सकेंगे। इससे खेती की लागत कम होगी और उत्पादकता बढ़ेगी।

सरकार दे रही है सब्सिडी

प्रत्येक CHC की स्थापना पर करीब 10 लाख रुपये की लागत आती है, जिसमें सरकार 40% तक की सब्सिडी दे रही है। वहीं, 35 बीएचपी या उससे अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर पर ₹1.60 लाख तक की सहायता मिलेगा। अन्य कृषि उपकरणों पर ₹4 लाख तक की सब्सिडी मिल रही है।

गांव-गांव पहुंचेगी तकनीक

CHC से किसानों को उनके गांव में ही तकनीकी सुविधा मिलेगी। यह सेंटर फसल चक्र के अनुसार जरूरी मशीनों से सुसज्जित होंगे, जिससे खेत तैयार करने से लेकर फसल कटाई तक का सारा काम आसानी से हो सकेगा। इससे समय और श्रम की भी बचत होगी।

इन संगठनों को मिलेगा लाभ

यह योजना सिर्फ व्यक्तिगत किसानों तक सीमित नहीं है। कृषकों के साथ-साथ इस योजना का लाभ इन समूहों को भी मिलेगा। जैसे जीविका समूह, स्व-सहायता समूह, एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन)
ग्राम संगठन, पैक्स, कृषि क्लस्टर फेडरेशन आदि। इनसे सामूहिक खेती को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर भी बनेंगे।

अब तक 950 सेंटर बन चुके हैं

अब तक राज्य में 950 कस्टम हायरिंग सेंटर बनाए जा चुके हैं। 2025-26 में सरकार का लक्ष्य है कि 267 नए CHC और स्थापित किए जाएं, जिससे योजना का लाभ ज़्यादा से ज़्यादा किसानों तक पहुंच सके। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि ये केवल कृषि योजना नहीं, बल्कि गांवों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इसका फायदा फसल की गुणवत्ता से लेकर किसानों की आमदनी और गांव की समृद्धि तक दिखाई देगा।

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