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राज्य कृषि समाचार (State News)

दतिया जिले में फसल अवशेष जलाने पर प्रतिबंध

25 नवंबर 2025, दतिया: दतिया जिले में फसल अवशेष जलाने पर प्रतिबंध – जिले में पराली (फसल अवशेष) जलाने पर तत्काल पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया है। फसल अवशेष जलाना दण्डनीय अपराध है, जिले में पराली जलाने वालों पर जुर्माना लगाया जायेगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशा-निर्देशों के तहत कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री स्वप्निल वानखड़े द्वारा इस आशय का आदेश भी जारी किया गया है।

यह आदेश फसल के अवशेष जलाने से फैलने वाले प्रदूषण पर अंकुश, अग्नि दुर्घटना रोकने एवं जान-माल की रक्षा के उद्देश्य से जारी किया है। आदेश के पालन के लिये संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी की अध्यक्षता में समितियाँ भी गठित कर दी गईं हैं। साथ ही उप संचालक किसान कल्याण व कृषि विभाग को कार्यवाही की जानकारी संकलित कर कलेक्ट्रेट कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।  किसानों को फसल अवशेष न जलाने के लिये जागरूक करने की हिदायत भी मैदानी अमले को दी गई है।

कलेक्टर द्वारा जिले के किसानों से अपील की गई है कि वे अपने खेतों में पराली व नरवाई इत्यादि फसल अवशेष न जलाएं, इससे पर्यावरण को भारी क्षति पहुँचती है। साथ ही खेत की मिट्टी के लाभदायक सूक्ष्म जीवाणु मर जाते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पराली जलाने से भूमि में अम्लता बढ़ती है, जिससे मृदा को अत्यधिक क्षति पहुँचती है । सूक्ष्म जीवाणुओं की सक्रियता घटने लगती है एवं भूमि की जलधारण क्षमता पर भी विपरीत प्रभाव  पड़ता  है । जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पराली जलाने वालों पर दो एकड़ से कम भूमि धारक को 2500 रूपए प्रति घटना जुर्माना लगेगा। इसी तरह दो एकड़ से अधिक व पाँच एकड़ से कम भूमि धारक को 5 हजार रूपए प्रति घटना एवं पाँच एकड़ से अधिक भूमि धारक को 15 हजार रूपए प्रति घटना पर्यावरण मुआवजा देना होगा। जिले में अभी तक पराली जलाने वाली घटनाओं में विकास खंड दतिया, सेवड़ा, भांडेर में एक एक एफआईआर दर्ज कराई गई है तथा लगभग 15 कृषकों पर 2500 रुपए के मान से 37500 रुपए का जुर्माना अधिरोपित किया गया है।

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 उप संचालक कृषि श्री राजीव वशिष्ठ द्वारा कृषकों से पुनः कहा गया है कि किसान भाई किसी भी परिस्थिति में नरवाई न जलाएं गेहूं की बोनी हैप्पी सीडर अथवा सुपर सीडर से करें या फिर डायरेक्ट सोइंगसीधी बोनी कर गेहूं की बोनी करें इससे भी फसल की पैदावार अच्छी होती है तथा बोनी में होने वाले विलंब से बचा जा सकता है, तथा मृदा व पर्यावरण को  शुद्ध रखा जा सकता है।

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