सीहोर में बेलर मशीन से हो रहा पराली प्रबंधन, खेतों की उर्वरा शक्ति भी बच रही
14 नवंबर 2025, सीहोर: सीहोर में बेलर मशीन से हो रहा पराली प्रबंधन, खेतों की उर्वरा शक्ति भी बच रही – मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के कलेक्टर बालागुरु के. के निर्देशानुसार धान पराली के प्रबंधन के लिए कृषि विभाग द्वारा किसानों के खेतों में बेलर कृषि यंत्र का प्रदर्शन एवं उपयोग किया जा रहा है | इसी क्रम में बुधनी जनपद के ग्राम बायाँ, माथनी, जहाजपुरा तथा दीपखेड़ा के किसानों के खेतों में इस बेलर यंत्र के द्वारा धान की पराली का प्रबंधन किया गया।
कृषि विभाग के उप संचालक अशोक कुमार उपाध्याय ने बताया कि धान बेलर कृषि यंत्र पराली को संपीडित करती है तथा प्रबंधनीय गट्ठरो में बदल देती है| यह बड़ी मात्रा में भूसे का भण्डारण तथा परिवहन आसान करती है। इससे किसानों और प्रसंस्करण इकाइयों के लिए खेतो में भूसे का भण्डारण करना आसान हो जाता है| यह यंत्र फसल कटाई के बाद बचे हुए अवशेष से निपटने का व्यावहारिक तरीका प्रदान करता है।
धान फसल की कटाई के बाद पराली को जलाने के बजाए बेलर में इकठ्ठा करने पर सूक्ष्मजीव नष्ट नही होते, जिससे मृदा उर्वरता बनी रहती है। इस बेलर यंत्र के द्वारा पहले पराली को काटा जाता है उसके बाद दूसरी मशीनो द्वारा खेतो से काटी गई पराली को एकत्रित कर दिया जाता है। तीसरी मशीन से काटी हुई पराली का बण्डल बना दिया जाता है| एक बण्डल में लगभग ढ़ाई से तीन क्विंटल तक वजन होता है| इस प्रक्रिया के बाद खेत में पराली नही बचती, किसान खेत की बखरनी करके रबी की बोवनी कर सकते हैं। कृषि अभियांत्रिकी विभाग के माध्यम से ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर आवेदन करने पर इस बेलर की कीमत पर 50 प्रतिशत या 02 लाख 20 हज़ार से 6 लाख 60 हज़ार रूपए तक का अनुदान मिलता है।
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