नोएडा की अंतरा कुमारी ने पॉलीहाउस में शुरू की संरक्षित खेती
05 अक्टूबर 2026, गौतमबुद्धनग: नोएडा की अंतरा कुमारी ने पॉलीहाउस में शुरू की संरक्षित खेती – नोएडा गौतमबुद्धनगर जिले के दनकौर विकास खंड के सरकपुर गांव में अंतरा कुमारी ने परंपरागत खेती से आगे बढ़कर पॉलीहाउस में संरक्षित खेती शुरू की है। उत्तर प्रदेश सरकार की सब्सिडी से बने 2,500 वर्गमीटर के पॉलीहाउस में उन्होंने पहले शिमला मिर्च उगाई, और अब अंग्रेजी खीरे की फसल ले रही हैं।
“यह सरकार के सहयोग से शुरू किया है। अपने आसपास कुछ दोस्तों को मैं जानती हूं, जो यह काम करते हैं,” अंतरा बताती हैं। उनकी शुरुआत आसपास के दूसरे किसानों को पॉलीहाउस में काम करते देखकर ही हुई।
40 लाख की परियोजना, आधा खर्च सरकार का
अंतरा के पॉलीहाउस की कुल परियोजना लागत 40 लाख रुपये है। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार के बागवानी विभाग ने 50 प्रतिशत यानी 20 लाख रुपये की सब्सिडी दी, बाकी 20 लाख रुपये का हिस्सा अंतरा ने खुद लगाया।
पॉलीहाउस में उन्होंने पहले दौर में शिमला मिर्च के 6,000 पौधे लगाए थे। अब उसी ढांचे में अंग्रेजी खीरे के 6,000 पौधे लगाकर खेती की जा रही है। पॉलीहाउस के भीतर तापमान, नमी और रोशनी को नियंत्रित रखा जा सकता है, जिससे खुले खेत की तुलना में फसल पर मौसम की मार कम पड़ती है और उत्पादन ज्यादा स्थिर रहता है।
संरक्षित खेती में कीट-रोग का हमला भी तुलनात्मक रूप से कम होता है, क्योंकि पॉलीहाउस का ढांचा बाहर के कई कीटों को फसल तक पहुंचने से रोकता है। इससे दवा के छिड़काव की जरूरत भी कम पड़ती है।
आगे गौशाला और जैविक खेती की योजना
अंतरा का कहना है कि वे इस मॉडल को आगे और बड़ा करना चाहती हैं। “इसको मल्टीपल करना है। हम खुद का गौशाला भी डाल रहे हैं, कि उससे हम जैविक खेती को खुद से प्रोत्साहित कर पाएं,” वे बताती हैं।
उनकी योजना है कि गौशाला से मिलने वाले गोबर और गोमूत्र का इस्तेमाल करके आगे जैविक खाद तैयार की जाए, जिससे रासायनिक खाद पर निर्भरता घटाई जा सके। उत्तर प्रदेश में बागवानी विभाग की सब्सिडी योजनाओं के जरिये इस तरह के संरक्षित ढांचों को बढ़ावा देने पर खास जोर दिया जा रहा है, ताकि छोटे किसान भी कम जमीन पर बेहतर कमाई कर सकें।
नोएडा और उसके आसपास का इलाका दिल्ली-एनसीआर के बड़े बाजार के करीब है, जिससे शिमला मिर्च और अंग्रेजी खीरे जैसी सब्जियां खेत से निकलते ही जल्दी बाजार तक पहुंच जाती हैं। पॉलीहाउस में उगाई गई सब्जियां आम तौर पर दिखने में ज्यादा साफ और एक जैसे आकार की होती हैं, जिससे इन्हें बड़े बाजारों और सुपरमार्केट में बेहतर दाम मिलने की गुंजाइश रहती है।
अंतरा का कहना है कि शुरुआत में पॉलीहाउस में काम करना उनके लिए नया अनुभव था, लेकिन सरकारी सब्सिडी मिलने से निवेश का दबाव आधा हो गया। अब वे चाहती हैं कि इलाके की दूसरी महिलाएं भी इस तरह की संरक्षित खेती की तरफ आएं, ताकि कम जमीन होने पर भी परिवार की आय बढ़ाई जा सके।
उत्तर प्रदेश में बागवानी विभाग पॉलीहाउस, शेड-नेट और नेट हाउस जैसे संरक्षित ढांचों पर किसानों को अलग-अलग दर पर अनुदान देता है, और इसके लिए किसान जिले के बागवानी अधिकारी या उद्यान विभाग की वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। अनुमोदन के बाद ढांचा बनाने और उसमें फसल लगाने तक की प्रक्रिया में विभाग की तकनीकी टीम किसानों को मार्गदर्शन भी देती है।
अंतरा जैसे किसानों के अनुभव से यह भी साफ होता है कि पॉलीहाउस में काम शुरू करने से पहले सिंचाई और जल निकासी की सही व्यवस्था बना लेना जरूरी है, क्योंकि ढांचे के भीतर नमी का स्तर बाहर के खेत की तुलना में अलग तरह से और तेजी से बदलता रहता है, और इस पर लगातार ध्यान देना पड़ता है।
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