एनपीके के साथ अन्य पोषक तत्व भी किसानों तक पहुंचे

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खरीफ फसलों में पोषक तत्वों का प्रबंधन’ पर वेबिनार सम्पन्न

18 जून 2022,  इंदौर । एनपीके के साथ अन्य पोषक तत्व भी किसानों तक पहुंचे गत दिनों कृषक जगत किसान सत्र में प्रसिद्ध कम्पनी कर्नाटका एग्रो केमिकल्स (मल्टीप्लेक्स) द्वारा ‘खरीफ फसलों में पोषक तत्वों का प्रबंधन’ विषय पर ऑनलाइन वेबिनार आयोजित किया गया। मल्टीप्लेक्स की ओर से जोनल मैनेजर श्री नागेंद्र शुक्ला और रिसर्च हेड डॉ. निरंजन एच. जी. शामिल हुए। दोनों ने पोषक तत्वों के प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। कृषक जगत प्रश्नोत्तरी और कृषि ज्ञान प्रतियोगिता में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वेबिनार का संचालन कृषक जगत के संचालक श्री सचिन बोन्द्रिया ने किया।

श्री नागेंद्र शुक्ला ने कम्पनी के परिचय में बताया कि मल्टीप्लेक्स की स्थापना 1974 में डॉ. जीपी शेट्टी ने इस उद्देश्य से की थी कि एनपीके के साथ अन्य पोषक तत्व भी किसानों तक पहुंचे। मल्टीप्लेक्स के उत्पाद 18 देशों में लोकप्रिय हैं। अपनी कई शाखाओं और 5 हजार वितरकों के माध्यम से उत्पादों की आपूर्ति करते हैं।

मिट्टी का महत्व

Dr-Niranjan

डॉ. निरंजन ने आरम्भ में मिट्टी के इतिहास,मिट्टी के गुण, वर्गीकरण और महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। दोमट मिट्टी सबसे अच्छी रहती है, जिसमें पोषक तत्वों को पकडऩे, हवा और पानी के बहने की क्षमता होती है। उपजाऊ मिट्टी में जैविक पदार्थ और सूक्ष्म जीव भी होना चाहिए। इससे मिट्टी भुरभुरी हो जाती है। मिट्टी में 16 पोषक तत्वों का होना जरूरी है। आपने सूक्ष्म तत्वों के गुण धर्म और उनकी फसल में उपयोगिता दर्शाते हुए कहा कि मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच रहना चाहिए। 6.5 से कम वाली मिट्टी अम्लीय होती है, जबकि 7.5 के ऊपर वाली मिट्टी क्षारीय होती है। 16 पोषक तत्व डालने से फसल को फायदा होता है। मिट्टी की जाँच रिपोर्ट के आधार पर जो जरूरी हो वही पोषक तत्व डालें।

श्री शुक्ला:  श्री शुक्ला ने कहा कि सोयाबीन उत्पादन में मप्र अव्वल है। अच्छी फसल के लिए जमीन का स्वस्थ होना आवश्यक है। गोबर खाद को सही समय पर बारिश होने के बाद डालिए और हल चलाइए। संतुलित पोषक तत्वों के साथ मिट्टी में मित्र जीवों का होना भी जरूरी है। इसके लिए जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, बॉयो ऑर्गेनिक खाद बना लीजिए अन्यथा मल्टीप्लेक्स का नाल पॉक उत्पाद भी कारगर है। बुवाई से पहले बीजोपचार अवश्य करें। इसके लिए राइजोबियम, निसर्गा या जीव रस का प्रयोग करें। इससे अंकुरण अच्छा होता है और फसल निरोगी रहती है। बुवाई के समय सीड ड्रिल का प्रयोग करें अर्थात् पहले खाद फिर मिट्टी और फिर ऊपर बीज रहे। इससे बीज सड़ता नहीं है।

उर्वरक प्रबंधन

उर्वरक प्रबंधन की चर्चा करते हुए श्री शुक्ला ने कहा कि बुवाई के समय डीएपी में नाइट्रोजन 12-13 किलो/एकड़, फास्फोरस 32 -35 किलो और पोटाश 15-20 किलो/ एकड़ डालें। गोबर खाद के अभाव में मल्टीप्लेक्स का अन्नपूर्णा खाद 60-90 /एकड़ की दर से डालें। यह कोकोपिट,वर्मी कम्पोस्ट, नीम खली, अरंडी खली, करंजी खली और मित्र जीव का मिश्रण है। जहां पीएच ज़्यादा है, वहां कम्पनी उत्पाद समृद्धि 25-100 किलो/एकड़ डालें। सुपर फास्फेट 6-8 बेग/एकड़ डालें। एनपीके के साथ सूक्ष्म पोषक तत्व भी डालें, इनकी मात्रा कम लगती है। सृष्टि जिंक हाई 5-10 किलो/एकड़ का सोयाबीन में प्रयोग करें। बुवाई के बाद खरपतवार नियंत्रण सही समय पर करें। पीएच सही नहीं है तो पहले सूक्ष्म तत्व क्रांति तरल का पहला छिडक़ाव करें। 35-45 दिन की फसल पर एनपीके या प्रो किसान का एक साथ छिडक़ाव करने से अच्छा फैलाव, फुटान और फूल आते हैं। शाखाएं अच्छी निकलने से उत्पादन अच्छा होता है। जबकि 45-60 दिन की फसल में 0:52:34 (मल्टी पीके) और बोरान का प्रयोग करने से फूल अच्छे आते हैं और दाने का भराव अच्छा होता है, वहीं 60 से 90 दिन के बाद फसल में 0:0:50 पोटाश और सल्फर के प्रयोग से फसल की गुणवत्ता बढ़ेगी। खरपतवार से फसल पीली पड़ती है, तो मल्टीप्लेक्स के समरस का एक लीटर पानी में 3 मिली लीटर की दर से स्प्रे करें। पीलापन दूर होगा और फसल हरी भरी रहेगी। यह ध्यान रखें कि फास्फोरस ज्यादा डालना भी नुकसानदायक होता है। मिट्टी की जाँच कराएं और एनपीके के साथ जिंक, मैगनीज, सल्फर और बोरान भी आवश्यक है, इन्हें जरूर डालें। इससे दाने की गुणवत्ता अच्छी होगी, बेहतर उत्पादन के साथ अच्छा मूल्य भी मिलेगा।

निसर्गा और जीव रस का प्रयोग करें

धान की फसल पर रोशनी डालते हुए श्री शुक्ला ने कहा कि मप्र में धान की उन्नत फसल के लिए नर्सरी से लेकर ट्रांसप्लांटिंग, फ्लावरिंग और हार्वेस्टिंग तक पोषक तत्वों का प्रबंध करना पड़ता है। हाइब्रिड पैडी का 6-8 किलो /एकड़ बीज पर्याप्त है। हाइब्रिड बीज बीजोपचारित रहते हैं,उन्हें करने की जरूरत नहीं है। अन्य बीजों के बीजोपचार के लिए मैंकोजेब कार्बेन्डाजिम के साथ निसर्गा और जीव रस का प्रयोग करें। इससे सीड कोट नरम होगा और अंकुरण अच्छा होगा। नर्सरी में स्वस्थ पौधे तैयार करें, फिर बेड तैयार करें। बेसल डोज में वर्मी कम्पोस्ट, अन्नपूर्णा खाद डालें। अमोनियम सल्फेट, एनपीके, सृष्टि जिंक का छिडक़ाव करें। ट्रांसप्लांटिंग के 10-15 दिन बाद डीएपी 15 किलो, एमओपी 25 किलो और सॉइल कंडीशनर समृद्धि 50 किलो, माइकोराइजा त्रिशूल 25 किलो/एकड़ डालें। इससे खाद जड़ों में फैल जाता है। दूसरा डोज 25-40 दिनों में दें इसमें 30 किलो डीएपी, 25 किलो एमओपी, यूरिया 30 किलो, सूक्ष्म तत्व सृष्टि जि़ंक हाई 5-10 किलो/एकड़, जिंक परम 4 किलो/एकड़ डालना जरूरी है, क्योंकि इन दिनों पौधा गर्भावस्था की स्थिति में आ जाता है। जब फसल 60 दिन की हो तब अमोनियम सल्फेट 20 किलो/एकड़ की दर से डालें। वर्षा के अलावा टिलरिंग के समय सिंचाई की ज़्यादा ज़रूरत पड़ती है। ऐसे ही कल्ले फूटने के समय भी सिंचाई का समुचित प्रबंध करें। डॉ. निरंजन ने धान के विभिन्न कीटों ब्राउन और ग्रीन हॉपर्स, लीफ फोल्डर,आर्मी वर्म, शीथ ब्लाइट आदि से होने वाले नुकसान की चर्चा कर इसके नियंत्रण के लिए पहले स्प्रे में मैंकोजेब/मल्टी नीम और क्रांति का प्रयोग करने की सलाह दी, ताकि रस चूसक कीट नहीं आएं। जबकि दूसरा स्प्रे 25-30 दिन में कार्बेंडाइजिम मैंकोजेब का करें। इसके अलावा नीम और क्रांति का स्प्रे करने से धान के कीटों पर नियंत्रण हो जाता है।

डॉ. निरंजन: टमाटर की फसल के बारे में डॉ. निरंजन ने कहा कि इसके लिए दोमट मिट्टी अच्छी रहती है, जिसका पीएच मान 6-7 हो। 20-25 डिग्री तापमान पर टमाटर बीज का अंकुरण अच्छा होता है। इस फसल में चुनौतियाँ बहुत हैं। तापमान के अनुसार लीफ कर्ल वायरस, एन्थ्रेक्नोज और नेमाटोड्स से फसल पर असर पड़ता है। जहां गत वर्ष टमाटर लगाए वहां अन्य फसल लें। बेसल डोज में गाय का गोबर 10 टन/एकड़ के अलावा अन्नपूर्णा 5 बेग, आर्गेनिक मैजिक और सेफ रुट 2-5 किलो/एकड़ डालने से नेमाटोड्स नियंत्रित रहता है। बेड पर पौधे से पौधे की दूरी 2 फीट और कतार से कतार की दूरी 4-5 फीट हो। खाद के बाद मल्चिंग शीट बिछाने से खरपतवार का नियंत्रण हो जाता है। रासायनिक खाद में एनपीके प्रत्येक 100-100 किलो, समृद्धि 50 किलो, भूमि संजीवनी 10 किलो और नवजीवन 10 किलो/एकड़ डालें। अंकुरण से पहले और फिर 7-8 दिन के बाद सिंचाई करें। आपने रस चूसक नेमाटोड्स से जड़ में गांठें बन जाती हैं और फसल में पीलापन आ जाता है। कीटों सफ़ेद मक्खी, माइट्स, लीफ लाइनर की जानकारी देते हुए कहा कि टोमेटो फू्रट बोरर, टोस्पो वायरस से होता है जो थ्रिप्स से फैलता है। पाउडरी मिल्ड्यू,अर्ली ब्लाइट, लेट ब्लाइट, एन्थ्रेक्नोज आदि के दुष्प्रभाव के नियंत्रण के लिए 15-20 दिन में स्प्रे करें। मिर्च और टमाटर की फसल के लिए निसर्गा, स्पर्श, जीवरस का ड्रिप से शुरूआती समय में प्रयोग करने से विल्ट की समस्या नियंत्रित हो जाती है। मिर्च फसल के लिए एनपीके के अलावा समृद्धि 50, अन्नपूर्णा और सृष्टि जिंक हाई,भूमि संजीवनी आदि का प्रयोग करने की सलाह दी गई।

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