सफलता की कहानी नवाचार से आत्मनिर्भरता की ओर
06 फरवरी 2026, भोपाल: सफलता की कहानी नवाचार से आत्मनिर्भरता की ओर – पाली जिले के सादड़ी क्षेत्र की प्रगतिशील कृषक श्रीमती हंजा देवी मेघवाल ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और स्वयं का संकल्प मिल जाए तो सीमित संसाधनों में भी खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। उनकी यह कहानी केवल उत्पादन की नहीं बल्कि नवाचार जोखिम लेने की क्षमता और विभागीय समन्वय की मिसाल है साथ ही महिला किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत है I
एक एकड़ शेडनेट में संरक्षित खेती का सफल प्रयोग
उद्यान विभाग द्वारा 95 प्रतिशत अनुदान पर लगाए गए एक एकड़ शेडनेट हाउस में वर्तमान में श्रीमती हंजा देवी ने खीरे की फसल ली हुई है। शेडनेट संरचना के कारण तापमान व आर्द्रता का संतुलन तो होता ही है साथ ही कीट एवं रोग का प्रकोप भी कम होता है अतः फसल लागत में कमी के साथ अधिक आर्थिक लाभ होता है। शेडनेट में गुणवत्ता युक्त और समान आकार का उत्पादन होने से ओपन फील्ड की तुलना में अधिक उपज व बेहतर बाजार मूल्य मिलता है।

इस संरक्षित खेती से उन्हें नियमित आय के साथ कम जोखिम और बाजार में पहचान मिली है।
नवाचारः ओपन फील्ड में स्ट्रॉबेरी की सफल खेती
जहाँ अधिकांश किसान स्ट्रॉबेरी को केवल पॉलीहाउस या शेडनेट तक सीमित मानते हैं वहीं श्रीमती हंजा देवी ने ओपन फील्ड में स्ट्रॉबेरी की खेती का सफल परीक्षण कर सभी को चौंका दिया। यह प्रयोग स्थानीय जलवायु के अनुकूल किस्म चयन उचित मल्चिंग, सिंचाई व पोषण प्रबंधन सीमित लागत में उच्च मूल्य वाली फसल का परिणाम है।
आज उनकी स्ट्रॉबेरी फसल अच्छा उत्पादन और गुणवत्तापूर्ण फल दे रही है, जो क्षेत्र के किसानों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल रही है।
इस उपलब्धि के पीछे मुख्यतः श्री नरेश कुमार वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक सिंदरली द्वारा फसल की नियमित मॉनिटरिंग, खीरा व स्ट्रॉबेरी दोनों फसलों में तकनीकी सुझाव एवं खेत स्तर पर निरंतर संपर्क और समस्या समाधान इनकी सफलता की मजबूत नींव बनी है। विभागीय अधिकारियों श्री फूलाराम मेघवाल सहायक निदेशक कृषि पाली का नवाचार को प्रोत्साहन, फसल विविधीकरण पर मार्गदर्शन और निरन्तर प्रेरणा, श्री तरुण पाल सिंह, कृषि अधिकारी उद्यान विभाग पाली द्वारा शेडनेट योजना की स्वीकृति के साथ तकनीकी सलाह और फसल प्रबंधन में मार्गदर्शन, तथा संरक्षित खेती को व्यावहारिक रूप से सफल बनाने में निर्णायक भूमिका अदा की है।
विभाग के किसान हितैषी दृष्टिकोण से योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आदि के समन्वित प्रयासों से यह परियोजना केवल योजना नहीं बल्कि एक मॉडल फार्म बन सकी। श्रीमती हंजा देवी मेघवाल की यह सक्सेस स्टोरी बताती है कि अगर जज्बा हो तो सही समय पर उचित विभागीय सहायता और मार्गदर्शन के साथ महिलाएँ आधुनिक कृषि की अगुआ बन सकती हैं। सही मार्गदर्शन से परंपरागत खेती को भी लाभकारी बनाया जाकर संरक्षित खेती और नवाचार से ग्रामीण आय को नई ऊँचाई दी जा सकती है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture


