राज्य कृषि समाचार (State News)

ग्वालियर के किसान का कमाल! एक ही खेत में उगाईं दो फसलें, 25% तक बढ़ा उत्पादन, पानी भी बचाया  

09 अप्रैल 2026, ग्वालियर: ग्वालियर के किसान का कमाल! एक ही खेत में उगाईं दो फसलें, 25% तक बढ़ा उत्पादन, पानी भी बचाया – मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा विकासखंड के छोटे से गांव करियावटी के किसान संभाजी राव परांदे आज क्षेत्र में आधुनिक खेती की मिसाल बन चुके हैं। उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए इंटरक्रॉपिंग और ड्रिप इरिगेशन जैसी तकनीकों को अपनाकर न केवल उत्पादन बढ़ाया, बल्कि खेती को लाभकारी भी बना दिया।

संभाजी राव ने गन्ने की खेती के साथ चने की फसल उगाकर एक ही खेत से दोहरा लाभ हासिल किया। उनकी इस तकनीक से जहां उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई, वहीं पानी की खपत में भी लगभग 50 प्रतिशत की बचत हुई। उनकी सफलता अब आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

इंटरक्रॉपिंग से मिला डबल फायदा

संभाजी राव ने गन्ने की पंक्तियों के बीच चने की बुवाई कर इंटरक्रॉपिंग मॉडल अपनाया। इससे उन्हें अतिरिक्त उत्पादन मिला और आय के नए स्रोत भी बने। प्रति हेक्टेयर करीब 10 क्विंटल अतिरिक्त चना उत्पादन ने उनकी कमाई को और मजबूत किया।

उन्होंने खेती की शुरुआत गहरी जुताई और खेत समतलीकरण से की, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हुई। संतुलित उर्वरकों का उपयोग और राइजोबियम कल्चर के प्रयोग से फसल की वृद्धि और उत्पादन में सुधार हुआ।

ड्रिप इरिगेशन से आधा पानी बचा
ड्रिप इरिगेशन प्रणाली अपनाने से संभाजी राव ने लगभग 50 प्रतिशत पानी की बचत की। इससे फसल को समय पर और संतुलित सिंचाई मिली, जिससे उत्पादन भी बेहतर हुआ और लागत भी घटी।

कीट और खरपतवार पर बेहतर नियंत्रण

उन्होंने आधुनिक और जैविक उपायों से कीट एवं खरपतवार नियंत्रण किया, जिससे फसल की गुणवत्ता बनी रही। इससे रासायनिक लागत भी कम हुई और उत्पादन सुरक्षित रहा।

इंटरक्रॉपिंग से उन्हें आय की स्थिरता मिली। यदि एक फसल प्रभावित होती है, तो दूसरी से नुकसान की भरपाई हो जाती है। साथ ही चना जैसी दलहनी फसल से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ी, जिससे भविष्य की फसलों को फायदा मिलेगा।

किसानों के लिए बने प्रेरणा

संभाजी राव की यह सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सही तकनीक और नवाचार अपनाकर सीमित संसाधनों में भी खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा घोषित “किसान कल्याण वर्ष” के तहत किसानों को आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। संभाजी राव जैसे प्रगतिशील किसान इस पहल को जमीन पर सफल बनाते नजर आ रहे हैं।

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