Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

मुजफ्फरनगर के किसान ने पॉलीहाउस में गुलाब की खेती से बनाई महीने में 3 लाख रुपये कमाई की राह

12 सितंबर 2026, मुजफ्फरनगर: मुजफ्फरनगर के किसान ने पॉलीहाउस में गुलाब की खेती से बनाई महीने में 3 लाख रुपये कमाई की राह – उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के खतौली विकासखंड स्थित गांव सठेड़ी के किसान संदीप सिंह ने पारंपरिक खेती छोड़कर पॉलीहाउस में कट-फ्लावर गुलाब की खेती शुरू की और अब हर महीने लाखों रुपये कमा रहे हैं। जिला औद्यानिक मिशन योजना के तहत मिले 50 प्रतिशत अनुदान ने उनकी इस राह को आसान बनाया।

संदीप ने करीब 4,000 वर्गमीटर (लगभग एक एकड़) क्षेत्र में पॉलीहाउस तैयार कराया, जिसमें पौध और शुरुआती प्रबंधन मिलाकर कुल 51.76 लाख रुपये का निवेश हुआ। इसमें से 25.88 लाख रुपये सरकारी अनुदान के रूप में मिले, जबकि बाकी राशि उन्होंने खुद जुटाई।

90 दिन में शुरू हुआ उत्पादन, रोज निकल रहे 3,000 फूल

पौध रोपने के महज 90 दिन के भीतर पॉलीहाउस से उत्पादन शुरू हो गया। अब उनके पॉलीहाउस से रोजाना करीब 3,000 गुलाब के फूल निकल रहे हैं, जो स्थानीय और आसपास के बड़े फूल बाजारों में बिकते हैं। इससे संदीप को हर महीने करीब 4.50 लाख रुपये की सकल आमदनी हो रही है, जिसमें से खर्च घटाकर 3 लाख रुपये शुद्ध मुनाफे के रूप में बचते हैं।

पॉलीहाउस खेती में तापमान, नमी और कीट-नियंत्रण पर नियमित निगरानी जरूरी होती है, इसलिए संदीप ने शुरुआत में जिला उद्यान विभाग की तकनीकी टीम से लगातार मार्गदर्शन लिया। कम जगह में ज्यादा उत्पादन और साल भर मांग वाली फसल होने के कारण गुलाब जैसी फूलों की खेती अब मैदानी इलाकों के किसानों के लिए भी आकर्षक विकल्प बनती जा रही है।

पश्चिमी यूपी में फूलों की खेती को मिल रहा बढ़ावा

मुजफ्फरनगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उन जिलों में शामिल है जहां परंपरागत रूप से गन्ने की खेती का बोलबाला रहा है, लेकिन बीते कुछ सालों में यहां के कई किसान संरक्षित खेती की तरफ रुख कर रहे हैं। पॉलीहाउस के भीतर तापमान और नमी को नियंत्रित रखकर साल भर एक जैसी गुणवत्ता के फूल तैयार किए जा सकते हैं, जो खुले खेत की खेती में मुमकिन नहीं होता।

दिल्ली-एनसीआर से नजदीकी होने के कारण मुजफ्फरनगर के फूल उत्पादकों को बड़े थोक फूल बाजारों तक उपज पहुंचाने में ज्यादा समय और लागत नहीं लगती, जिससे ताजा गुलाब बेहतर दाम पर बिक पाते हैं। जिला उद्यान विभाग के मुताबिक संदीप सिंह जैसे किसानों की सफलता से आसपास के गांवों के कई और किसान भी पॉलीहाउस योजना में आवेदन करने की तैयारी में हैं।

पॉलीहाउस में गुलाब उगाने के लिए शुरुआती निवेश जरूर ज्यादा होता है, लेकिन एक बार ढांचा तैयार हो जाने के बाद कई वर्षों तक उससे लगातार उत्पादन लिया जा सकता है। संदीप सिंह की कहानी बताती है कि सही तकनीकी सलाह और सरकारी अनुदान का सही इस्तेमाल हो तो निवेश की भरपाई कुछ ही महीनों में शुरू हो सकती है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture