अरुणाचल के 10 कृषि उत्पादों को मिलेगा GI टैग, किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
25 नवंबर 2025, भोपाल: अरुणाचल के 10 कृषि उत्पादों को मिलेगा GI टैग, किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा – अरुणाचल प्रदेश के किसानों के लिए यह बेहद उत्साहजनक खबर है। राज्य सरकार ने एक साथ अपने 10 प्रमुख कृषि उत्पादों के लिए भौगोलिक संकेत (GI) टैग का आवेदन किया है। GI टैग किसी क्षेत्र की विशिष्ट पहचान वाले उत्पाद को दिया जाने वाला अधिकारिक चिन्ह होता है। इससे यह प्रमाणित हो जाता है कि उत्पाद विशेष मिट्टी, मौसम और परंपरागत तरीकों से तैयार होता है और उसकी खासियत उसी क्षेत्र से ही जुड़ी है। GI टैग मिलने के बाद नकली सामान पर रोक लगती है और असली उत्पाद की बाजार कीमत बढ़ जाती है।
किन 10 उत्पादों के लिए किया गया आवेदन?
इस बार अरुणाचल सरकार ने एक ही बार में 10 कृषि उत्पादों के लिए आवेदन भेजकर बड़ा कदम उठाया है। इनमें शामिल हैं—बागरा अनानास, पासीघाट गुड़, बाली चावल, इडू याम्बा (रागी), अंग्पु (कद्दू), मिपुन चावल, लिबी बालांगबू (सफेद राजमा), बेबो (बड़ी इलायची), दालचीनी और अंदोये (किडनी बीन)। ये सभी उत्पाद अपनी गुणवत्ता, स्वाद और पारंपरिक उत्पादन तकनीकों के कारण लंबे समय से स्थानीय पहचान बनाए हुए हैं।
GI प्रक्रिया में कौन मदद कर रहा है?
GI टैगिंग की इस पूरी प्रक्रिया में पद्मश्री डॉ. राजनिकांत और ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन अहम भूमिका निभा रहे हैं। यह टीम देशभर में कई उत्पादों को GI टैग दिला चुकी है और पारंपरिक कृषि को बढ़ावा देने में सक्रिय रूप से काम कर रही है। अरुणाचल का यह बड़ा GI अभियान भी इनके सहयोग से आगे बढ़ रहा है।
और 10 उत्पाद भी जल्द भेजे जाएंगे
राज्य सरकार के मुताबिक अगले एक हफ्ते में और 10 कृषि उत्पाद GI टैग के लिए भेजे जाएंगे। इस तरह कुल 20 उत्पाद GI पहचान की कतार में होंगे। यह पहली बार है जब अरुणाचल प्रदेश इतनी बड़ी संख्या में एक साथ GI आवेदन कर रहा है, जो कृषि विकास और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
2029 तक 50 GI टैग का लक्ष्य
सरकार ने GI महोत्सव 2025 के दौरान ऐलान किया कि 2029 तक राज्य में कम से कम 50 GI पंजीकरण पूरे किए जाएंगे। फिलहाल राज्य में 20 उत्पाद रजिस्टर्ड हैं, 34 आवेदन जमा हो चुके हैं और 10 और आवेदन भेजे जाने की तैयारी है। इस रफ्तार से यह उम्मीद की जा रही है कि अरुणाचल न केवल अपना लक्ष्य पूरा करेगा, बल्कि इससे आगे भी निकल सकता है।
किसानों को क्या होगा फायदा?
GI टैग मिलने से किसानों को सीधे आर्थिक और सामाजिक स्तर पर फायदा होगा। उनके उत्पाद की पहचान, विश्वसनीयता और बाजार मूल्य बढ़ेगा। GI के कारण नकली उत्पादों पर रोक लगेगी, जिससे असली उत्पादकों की रक्षा होगी। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान होगी और निर्यात के नए अवसर खुलेंगे। पारंपरिक खेती, देसी बीज और स्थानीय नस्लें भी सुरक्षित रहेंगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे किसानों की आय में स्पष्ट बढ़ोतरी होगी।
पहले से GI टैग पाने वाले अरुणाचल के उत्पाद
अरुणाचल के कई उत्पाद पहले ही GI टैग हासिल कर चुके हैं, जिनमें वक्रो ऑरेंज, आदि केकिर (अदरक), खाव ताई (खामटी चावल), याक छुरपी, सिंग्फो फालाप (सिंग्फो चाय) और अंगन्यात मिलेट शामिल हैं। इन उत्पादों ने राज्य की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया है और किसानों की आय बढ़ाने में भी बड़ा योगदान दिया है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture


