ओडिशा में कृषि उद्यमियों के लिए ₹2,496 करोड़ की सब्सिडी योजना पांच साल और बढ़ी
14 अक्टूबर 2026, भुवनेश्वर: ओडिशा में कृषि उद्यमियों के लिए ₹2,496 करोड़ की सब्सिडी योजना पांच साल और बढ़ी – ओडिशा सरकार ने राज्य के किसानों और कृषि उद्यमियों के लिए चलाई जा रही पूंजी निवेश सब्सिडी योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने का फैसला किया है। राज्य कैबिनेट ने इस योजना के लिए कुल 2,496.40 करोड़ रुपये के आवंटन को मंजूरी दी है।
यह योजना राज्य कृषि नीति के तहत मुख्यमंत्री कृषि उद्योग योजना के नाम से चलाई जाती है। इसका विस्तार वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए किया गया है। इसके तहत पात्र उद्यमियों को खेती, बागवानी, मत्स्य पालन, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में व्यावसायिक उद्यम लगाने पर पूंजी निवेश सब्सिडी दी जाती है।
राज्य सरकार का लक्ष्य अगले पांच साल में राज्य के सभी 30 जिलों में करीब 8,500 व्यावसायिक कृषि-उद्यम परियोजनाएं स्थापित कराना है। इनमें कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण इकाइयां, आधुनिक बागवानी फार्म और मत्स्य पालन से जुड़े उद्यम शामिल हो सकते हैं। योजना राज्य क्षेत्र की है, यानी इसका पूरा खर्च राज्य सरकार खुद उठाएगी।
योजना का मकसद क्या है
सरकार के मुताबिक इस सब्सिडी योजना का उद्देश्य फसल विविधीकरण, आधुनिक तकनीक और मूल्य-संवर्धित कृषि को बढ़ावा देना है। इसके जरिए राज्य की जमीन और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने तथा कृषि व बागवानी उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के व्यावसायिक उद्यम लगने से ग्रामीण इलाकों में किसानों के अलावा स्थानीय युवाओं के लिए भी टिकाऊ रोजगार के मौके बनेंगे। खेत में पैदा होने वाली उपज को प्रसंस्करण और भंडारण की सुविधा मिलने से किसानों को बेहतर दाम दिलाने में भी मदद मिल सकती है, क्योंकि फसल कटते ही उसे औने-पौने दाम पर बेचने की मजबूरी कम होगी।
किसे और कैसे मिलेगा फायदा
योजना के तहत आवेदन और सब्सिडी वितरण की प्रक्रिया पहले से तय दिशा-निर्देशों के अनुसार ही जिला कृषि कार्यालयों के जरिए चलती रहेगी। इच्छुक उद्यमियों को अपने प्रस्तावित उद्यम की परियोजना रिपोर्ट के साथ संबंधित जिला कृषि कार्यालय में आवेदन करना होता है, जिसके बाद तकनीकी जांच कर सब्सिडी की मंजूरी दी जाती है।
इसी कैबिनेट बैठक में सरकार ने ओडिशा फिशरीज सर्विस भर्ती व सेवा शर्त नियम, 2026 को भी मंजूरी दी, जिससे राज्य की मत्स्य सेवा के अधिकारियों की भर्ती, पदोन्नति और वरिष्ठता के लिए औपचारिक ढांचा तैयार होगा। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इससे मत्स्य पालन क्षेत्र में तकनीकी सलाह देने वाले अधिकारियों की कमी दूर होने और किसानों को समय पर सलाह मिलने में मदद मिलेगी।
राज्य में पहले से बागवानी और जैविक खेती से जुड़ी कई योजनाएं चल रही हैं, लेकिन छोटे व मझोले उद्यमियों को बड़ी पूंजी जुटाना अब भी मुश्किल काम है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार पूंजी निवेश सब्सिडी योजना के पांच साल और बढ़ने से ऐसे उद्यमियों को बैंक से कर्ज लेने और अपना प्रोसेसिंग या भंडारण यूनिट लगाने में ज्यादा भरोसा मिलेगा। जिला कृषि कार्यालयों को आने वाले महीनों में इस विस्तारित योजना के बारे में किसानों और उद्यमियों को जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पात्र लोग समय रहते आवेदन कर सकें।
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