गेहूं के रकबे में 6 लाख हेक्टेयर की कमी

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रबी बोनी 635 लाख हेक्टेयर तक पहुंची

  • (विशेष प्रतिनिधि)

12 जनवरी 2022, नई दिल्ली। गेहूं के रकबे में 6 लाख  हेक्टेयर की कमी देश की प्रमुख रबी फसल गेहूं के रकबे में लगभग 6 लाख हेक्टेयर की कमी बनी हुई है। अब तक 333 लाख हेक्टेयर में बोनी हुई है जबकि गत वर्ष इस अवधि में 339 लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया गया था। वहीं दलहनी फसलों तथा मोटे अनाजों का रकबा भी कम है जबकि तिलहनी फसलों के रकबे में बढ़ोत्री हुई है। सरसों के क्षेत्र में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। कुल रबी बुवाई भी सामान्य क्षेत्र को पार कर गई है परन्तु गत वर्ष की तुलना में लगभग 10 लाख हेक्टेयर की कमी बनी हुई है। इस समय तक 635.73 लाख हेक्टेयर में बोनी हुई है जबकि गत वर्ष समान अवधि में 646.29 लाख हेक्टेयर रकबा कवर किया गया था।

कृषि मंत्रालय भारत सरकार के मुताबिक रबी की प्रमुख फसल गेहूं अब तक 333.97 लाख हेक्टेयर में बोयी गई है। जबकि लक्ष्य 303.6 लाख हे. रखा गया है। गत वर्ष इस अवधि में 339.81 लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया गया था। इस प्रकार लगभग 6 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में गेहूं की बुवाई हुई है।

वहीं मोटे अनाजों की बुवाई 46.68 लाख हेक्टेयर में कर ली गई है जबकि गत वर्ष समान अवधि में मोटे अनाज 48.32 लाख हेक्टेयर में बोये गये थे इसमें अब तक ज्वार 23.48, मक्का 15.94 एवं जौ 6.71 लाख हे. में बोया गया है।

देश में दलहनी फसलों की बुवाई अब तक 156.23 लाख हेक्टेयर में हुई है। जबकि गत वर्ष 157.75 लाख हेक्टेयर में दलहनी फसलें बोयी गई थी। इसमें चने की बुवाई 109.44 लाख हे. में हो गई है। जबकि गत वर्ष अब तक 107.17 लाख हेक्टेयर में चने की बोनी की गई थी। चने का सामान्य क्षेत्र 95.66 लाख हे. है। इसी प्रकार मटर की बोनी 9.74 लाख हेक्टेयर में एवं मसूर 17.13, कुल्थी 3.40, उड़द की बोनी 6.34 लाख हेक्टेयर में हुई है।

देश में तिलहनी फसलों का रकबा तेजी से बढ़ा है अब तक 98.85 लाख हेक्टेयर में तिलहनी फसलें बोयी जा चुकी हैं जो गत वर्ष की तुलना में लगभग 17.19 लाख हेक्टेयर अधिक है क्योंकि गत वर्ष अब तक 81.66 लाख हेक्टेयर में तिलहनी फसलें बोयी गई थीं। इस प्रकार तिलहनी फसलें 21 फीसदी अधिक क्षेत्र में बोई जा चुकी हैं।

देश की प्रमुख तिलहनी फसल सरसों की बुवाई गत वर्ष की तुलना में लगभग 16.92 लाख हेक्टेयर अधिक है। अभी तक 89.71 लाख हे. में सरसों की बुवाई हो गई है। जबकि गत वर्ष इस अवधि में 72.79 लाख हेक्टेयर में सरसों बोई गई थी।

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