राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

कृषि में तकनीकी क्रांति से बढ़ेगी GDP, किसानों की होगी समृद्धि: डॉ. जितेंद्र सिंह

10 जुलाई 2025, नई दिल्ली: कृषि में तकनीकी क्रांति से बढ़ेगी GDP, किसानों की होगी समृद्धि: डॉ. जितेंद्र सिंह – केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) व पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राजधानी स्थित एनएएससी परिसर में आईसीएआर सोसायटी की 96वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित किया। उन्होंने इस अवसर पर अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाकर तथा हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल को बढ़ावा देकर कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन का आह्वान किया।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित उच्च-स्तरीय कार्यक्रम में डॉ. सिंह ने कहा कि दुनियाभर में उपलब्ध हर तकनीक अब भारत में भी उपलब्ध है। अब यह मायने नहीं रखता कि तकनीक उपलब्ध है या नहीं, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि हम इसे कितनी तेजी से अपनाते हैं और अपनी अर्थव्यवस्था में कैसे शामिल करते हैं। 

डॉ. सिंह ने कहा कि कृषि मूल्य श्रृंखला में कई लोग नई तकनीकों से न केवल अनजान हैं, बल्कि यह भी नहीं जानते कि वे इसके बारे में कुछ नहीं जानते। पिछले 11 वर्षों में पीएम मोदी के नेतृत्व में कृषि तकनीक ने तेजी से प्रगति की है, लेकिन अभी भी इसकी पूरी क्षमता का उपयोग होना बाकी है।

लैवेंडर क्रांति और आधुनिक खेती के उदाहरण

डॉ. सिंह ने जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर क्रांति की सफलता का उदाहरण दिया, जहां 3,500 से अधिक स्टार्टअप उभरे हैं। उन्होंने सैटेलाइट इमेजिंग, रिमोट-कंट्रोल ट्रैक्टर, ऑर्डर-आधारित फसल उत्पादन जैसे तरीकों को नए जमाने की खेती की दिशा बताया। उन्होंने बताया कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग की पहल से कीट-प्रतिरोधी कपास और परमाणु ऊर्जा विभाग की विकिरण आधारित खाद्य संरक्षण तकनीक से उत्पादन, भंडारण और निर्यात की दिशा में बड़ा बदलाव आया है। अब भारतीय आम अमेरिका तक पहुंच रहे हैं।

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नवाचार के आदान-प्रदान पर जोर

डॉ. सिंह ने राज्य कृषि मंत्रियों और संस्थागत हितधारकों से कहा कि केवल वार्षिक बैठकों पर निर्भर नहीं रहें। नवाचारों को साझा करने के लिए एक कार्य समूह बनाया जाए। अनौपचारिक संवाद को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने तटीय राज्यों में समुद्री कृषि, मणिपुर में आम और आंध्र प्रदेश में सेब की खेती जैसे गैर-पारंपरिक लेकिन व्यवहारिक प्रयोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि विज्ञान के जरिए भारत का कृषि मानचित्र पुनः तैयार हो रहा है।

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बैठक में व्यापक भागीदारी

बैठक में केंद्रीय और राज्य मंत्रियों, वैज्ञानिकों, आईसीएआर और अन्य मंत्रालयों के अधिकारियों ने भाग लिया। आईसीएआर की वार्षिक रिपोर्ट, प्रमुख प्रकाशनों और वित्तीय प्रस्तुतियों का विमोचन भी किया गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी चुनौती तकनीक की कमी नहीं, बल्कि संपर्क की है। तकनीक बनाने वालों और जरूरतमंद किसानों के बीच सेतु बनाने की आवश्यकता है। यही पुल अब हमें तैयार करना होगा।

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