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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

बढ़ती लागत से जूझ रहा चीनी उद्योग, MSP बढ़ाने की कर रहा पुरज़ोर मांग

09 मई 2025, नई दिल्ली: बढ़ती लागत से जूझ रहा चीनी उद्योग, MSP बढ़ाने की कर रहा पुरज़ोर मांग – केंद्र सरकार ने 2025-26 पेराई सीजन के लिए गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) में 15 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि को मंजूरी दी है. इस बढ़ोतरी के बाद गन्ने का नया FRP 340 रुपये से बढ़कर 355 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है, जो 10.25% चीनी रिकवरी दर पर आधारित है. चीनी उद्योग ने इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) में वृद्धि की मांग को जोर-शोर से उठाया है. उद्योग का कहना है कि बढ़ती उत्पादन लागत और 2019 से स्थिर MSP के बीच का अंतर चीनी मिलों के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर रहा है.

उद्योग की चिंता: लागत और MSP में बढ़ता अंतर

चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि कच्चे माल, श्रम, और ऊर्जा की बढ़ती लागत के बावजूद चीनी का MSP 31 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर है. इस असंतुलन ने चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति को कमजोर किया है, जिससे किसानों को समय पर भुगतान करने में भी दिक्कतें आ रही हैं. भारतीय चीनी मिल संघ (ISMA) और पश्चिम भारतीय चीनी मिल संघ (WISMA) जैसे संगठनों ने सरकार से चीनी के MSP को बढ़ाने की मांग की है ताकि उद्योग की वित्तीय स्थिरता बनी रहे.

ISMA ने अपने बयान में कहा, “हम 2025-26 चीनी सीजन के लिए गन्ने के FRP में 15 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि के सरकार के फैसले का तहे दिल से स्वागत करते हैं. यह प्रगतिशील और किसान हितैषी निर्णय भारत के गन्ना किसानों के कल्याण के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है. संशोधित FRP से लगभग 5.5 करोड़ गन्ना किसानों की आय में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे अगले सीजन में उनकी कुल आय लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी.”

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हालांकि, ISMA ने यह भी जोड़ा कि FRP में वृद्धि से मिलों के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ेगी. संगठन ने सुझाव दिया कि चीनी और इथेनॉल की खरीद कीमतों को FRP के अनुरूप समायोजित किया जाए ताकि मिलें इन बढ़ी हुई लागतों को वहन कर सकें. इससे न केवल मिलों की नकदी स्थिति सुधरेगी, बल्कि किसानों को उनके बकाये का समय पर भुगतान भी सुनिश्चित होगा.

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WISMA की मांग: MSP को 4,200 रुपये प्रति क्विंटल करें

पश्चिम भारतीय चीनी मिल संघ (WISMA) ने भी गन्ने के FRP में वृद्धि का स्वागत किया, लेकिन चीनी के MSP को 4,200 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की. WISMA ने कहा, “हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि चीनी का MSP बढ़ाकर 4,200 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए ताकि चीनी उद्योग अपनी वित्तीय संकट से उबर सके.”


चुनौतियां और अपेक्षाएं


उद्योग ने यह भी रेखांकित किया कि चीनी और इथेनॉल की कीमतों में समायोजन से इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जो भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण है. ISMA ने कहा, “नीतिगत समायोजन से चीनी मिलों को इथेनॉल उत्पादन में निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, जो पर्यावरणीय और आर्थिक दोनों दृष्टि से फायदेमंद होगा.”

चीनी उद्योग का मानना है कि सरकार गन्ना किसानों के हित में लिए गए फैसले की तरह ही चीनी मिलों की मांगों पर भी संवेदनशीलता के साथ विचार करेगी. उद्योग को उम्मीद है कि MSP में वृद्धि से न केवल उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, बल्कि गन्ना किसानों को भी समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा.

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