नैनो उर्वरकों पर सख्त नियम: सरकार ने फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर में किया संशोधन
12 मार्च 2026, नई दिल्ली: नैनो उर्वरकों पर सख्त नियम: सरकार ने फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर में किया संशोधन – भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 9 मार्च 2026 को अधिसूचना जारी कर फर्टिलाइजर (इनऑर्गेनिक, ऑर्गेनिक या मिक्स्ड) कंट्रोल ऑर्डर, 1985 (FCO) में संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत नैनो उर्वरकों के उत्पादन, परीक्षण, पंजीकरण और विपणन से जुड़े नियमों को और अधिक स्पष्ट तथा सख्त बनाया गया है।
सरकार द्वारा जारी फर्टिलाइजर (इनऑर्गेनिक, ऑर्गेनिक या मिक्स्ड) (कंट्रोल) द्वितीय संशोधन आदेश, 2026 के अनुसार अब नैनो उर्वरक बनाने वाली कंपनियों को अनुमति लेने के लिए आवेदन के साथ बायो-टॉक्सिसिटी और सुरक्षा से जुड़ा डेटा जमा करना अनिवार्य होगा। यह परीक्षण गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिस (GLP) या नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरी (NABL) से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में किया गया होना चाहिए और इसे जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की गाइडलाइन के अनुसार तैयार किया जाना होगा।
संशोधन में नैनो उर्वरकों की प्रारंभिक अधिसूचना की अवधि भी बदली गई है। पहले यह अवधि तीन वर्ष थी, जिसे अब घटाकर दो वर्ष कर दिया गया है। इस अवधि के दौरान कंपनियों को कम से कम दो फसलों पर, तीन अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों में एक-एक मौसम के परीक्षण कराने होंगे, ताकि विभिन्न परिस्थितियों में उत्पाद की प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके।
इसके अलावा यदि कोई कंपनी अपने नैनो उर्वरक को आगे भी बाजार में बनाए रखना चाहती है, तो उसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) या राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (SAU) के माध्यम से कम से कम 10 फसलों पर, दो मौसमों में, तीन अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों में किए गए परीक्षणों की रिपोर्ट सरकार को जमा करनी होगी। यदि यह रिपोर्ट तय समय में जमा नहीं की जाती, तो उस उत्पाद की अधिसूचना स्वतः समाप्त मानी जाएगी और आगे विस्तार नहीं दिया जाएगा।
इस संशोधन में एक नया प्रावधान क्लॉज 20 DA भी जोड़ा गया है। इसके तहत केंद्र सरकार नैनो उर्वरकों के लिए सामान्य विनिर्देशों के अनुरूप उत्पादों को अधिकतम पांच वर्ष की अवधि के लिए अधिसूचित कर सकेगी। इसके लिए कंपनियों को फॉर्म G-5 के माध्यम से आवेदन करना होगा और साथ में मल्टी-लोकेशन ट्रायल, बायो-सुरक्षा, टॉक्सिसिटी और गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट भी देनी होगी।
नए नियमों के अनुसार नैनो उर्वरक बनाने वाली कंपनियों को किसानों के लिए फसल-वार पैकेज ऑफ प्रैक्टिस भी उपलब्ध कराना होगा। इसमें यह स्पष्ट बताया जाएगा कि फसल में उर्वरक का उपयोग कैसे किया जाए। दिशानिर्देशों के अनुसार कई मामलों में 75 प्रतिशत पारंपरिक उर्वरक की सिफारिशी मात्रा (RDF) के साथ 25 प्रतिशत नैनो उर्वरक का उपयोग सुझाया जाएगा, बशर्ते परीक्षणों में इसके सकारात्मक परिणाम मिले हों।
सरकार ने गुणवत्ता नियंत्रण को भी मजबूत किया है। अब प्रत्येक बैच को बाजार में भेजने से पहले NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त करना अनिवार्य होगा। साथ ही उत्पाद के कंटेनर पर बैच नंबर और आवश्यक सावधानियां स्पष्ट रूप से छापनी होंगी। पांच लीटर से कम पैकिंग वाले कंटेनरों पर भी लेबल अनिवार्य होगा।
नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नैनो उर्वरकों की मंजूरी कंपनी के आधार पर नहीं बल्कि उत्पाद के आधार पर दी जाएगी। यानी हर नए उत्पाद को अलग-अलग परीक्षण और मूल्यांकन से गुजरना होगा।
सरकार का कहना है कि नैनो उर्वरक नई तकनीक के रूप में उभर रहे हैं, जो पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ाने और पारंपरिक उर्वरकों की खपत कम करने में मदद कर सकते हैं। इसलिए इन उत्पादों को बाजार में लाने से पहले उनके सुरक्षा, प्रभावशीलता और गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए यह संशोधन किया गया है।
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