लॉकडाउन कठिनाइयों के बावजूद ग्रीष्मकालीन फ़सलों की बुवाई में बाधा नहीं

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लॉकडाउन कठिनाइयों के बावजूद ग्रीष्मकालीन फ़सलों की बुवाई में बाधा नहीं

धान की खेती में बढ़ोत्‍तरी, क्षेत्रफल में महत्‍वपूर्ण वृद्धि

नई दिल्ली । कोविड-19 महामारी के प्रकोप और इससे निपटने के लिए 24 मार्च की मध्यरात्रि से लॉकडाउन लागू होने के कारण उपजी कठिनाइयों के बावजूद ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई के कार्य में संतोषजनक प्रगति हो रही है।

कृषि विभाग द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि 10 अप्रैल, 2020 तक ग्रीष्मकालीन फसलों (धान, दलहन, मोटे अनाज और तिलहन सहित) के कुल क्षेत्रफल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले महीने से विशेषकर 25 मार्च, 2020 से जारी लॉकडाउन के बाद के प्रतिबंधों और सामाजिक दूरी के नियमों के बावजूद इसमें पिछले साल की तुलना में 11.64 लाख हेक्टेयर वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2018-19 में 37.12 लाख हेक्टेयर के कुल कृषि क्षेत्र के मुकाबले, इस साल 2019-20 में 48.76 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई की गई है। पिछले वर्ष के आलोच्‍य सप्ताह में 10 अप्रैल तक सामान्य क्षेत्रफल 41.81 लाख हेक्टेयर था।

ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई के क्षेत्रफल में हुई इस वृद्धि का मुख्‍य वाहक धान है, जिसकी बुवाई वाले क्षेत्रफल में 8.77 लाख हेक्टेयर की प्रबल वृद्धि हुई है। अन्य सभी फसलों की बुवाई के क्षेत्रफल में वृद्धि 1 लाख हेक्टेयर से कम दर्ज की गई ह। इस साल ग्रीष्‍मकालीन धान की बुवाई लगभग 32.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में 23.81 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई की गई थी। यह क्षेत्र मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल (11.25 लाख हेक्टेयर), तेलंगाना (7.45 लाख हेक्टेयर), ओडिशा (3.13 लाख हेक्टेयर), असम (2.73 लाख हेक्टेयर), कर्नाटक (1.64 लाख हेक्टेयर), छत्तीसगढ़ (1.50 लाख हेक्टेयर), तमिलनाडु (1.30 लाख हेक्टेयर), बिहार (1.22 लाख हेक्टेयर), महाराष्ट्र (0.65 लाख हेक्टेयर), मध्य प्रदेश (0.59 लाख हेक्टेयर), गुजरात (0.54 लाख हेक्टेयर) और केरल (0.46 लाख हेक्टेयर) दर्ज किया गया है।

दलहन के संबंध में पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान 3.01 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की तुलना में इस साल लगभग 3.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवर किया गया है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से तमिलनाडु (1.46 लाख हेक्टेयर), उत्तर प्रदेश (0.73 लाख हेक्टेयर), पश्चिम बंगाल (0.59 लाख हेक्टेयर), गुजरात (0.51 लाख हेक्टेयर), छत्तीसगढ़ (0.24 लाख हेक्टेयर), बिहार (0.18 लाख हेक्टेयर), कर्नाटक (0.08 लाख हेक्टेयर), पंजाब (0.05 लाख हेक्टेयर), महाराष्ट्र (0.04 लाख हेक्टेयर), मध्यप्रदेश (0.03 लाख हेक्टेयर), झारखंड (0.03 लाख हेक्टेयर), तेलंगाना (0.02 लाख हेक्टेयर) और उत्तराखंड (उत्तराखंड) 0.01 लाख हेक्टेयर) रिपोर्ट किया गया है।

मोटे अनाजों में पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान 4.33 लाख हेक्टेयर की तुलना में इस साल लगभग 5.54 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवर किया गया है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से गुजरात (2.27 लाख हेक्टेयर), पश्चिम बंगाल (1.21 लाख हेक्टेयर), महाराष्ट्र (0.63 लाख हेक्टेयर), बिहार (0.41 लाख हेक्टेयर), कर्नाटक (0.39 लाख हेक्टेयर), छत्तीसगढ़ (0.29 लाख हेक्टेयर), तमिलनाडु (0.26 लाख हेक्टेयर), मध्य प्रदेश (0.08 लाख हेक्टेयर) और झारखंड (0.01 लाख हेक्टेयर) में दर्ज किया गया है।

जबकि तिलहन में पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान 5.97 लाख हेक्टेयर की तुलना में इस साल लगभग 6.66 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई की गई है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल (1.33 लाख हेक्टेयर), कर्नाटक (1.30 लाख हेक्टेयर), गुजरात (1.09 लाख हेक्टेयर), ओडिशा (0.62 लाख हेक्टेयर), महाराष्ट्र (0.58 लाख हेक्टेयर), तमिलनाडु (0.53 लाख हेक्टेयर), आंध्र प्रदेश (0.41 लाख हेक्टेयर), उत्तर प्रदेश (0.28 लाख हेक्टेयर), तेलंगाना (0.21 लाख हेक्टेयर), छत्तीसगढ़ (0.18 लाख हेक्टेयर), हरियाणा (0.06 लाख हेक्टेयर), पंजाब (0.04 लाख हेक्टेयर), बिहार (0.03 लाख हेक्टेयर) और मध्य प्रदेश (0.02 लाख हेक्टेयर) में दर्ज किया गया है।

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