खरीफ बुवाई में सुस्ती, पिछले साल से 3.44 लाख हेक्टेयर कम रहा रकबा; जानें धान, दलहन और मोटे अनाज का हाल
18 जून 2026, नई दिल्ली: खरीफ बुवाई में सुस्ती, पिछले साल से 3.44 लाख हेक्टेयर कम रहा रकबा; जानें धान, दलहन और मोटे अनाज का हाल – देश में खरीफ सीजन 2026 की बुवाई ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 12 जून 2026 तक खरीफ फसलों की बुवाई 84.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 88.04 लाख हेक्टेयर की तुलना में 3.44 लाख हेक्टेयर कम है। हालांकि धान, बाजरा, मूंगफली, जूट एवं पटसन जैसी फसलों के रकबे में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि कपास, दलहन, मक्का और सोयाबीन के रकबे में कमी देखने को मिली है।
धान की बुवाई में बढ़त, मानसून से मिलेगी और रफ्तार
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, धान की बुवाई 4.98 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 3.88 लाख हेक्टेयर थी। इस प्रकार धान के रकबे में 1.09 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में धान की रोपाई और बुवाई में तेजी आएगी।
दलहनों का रकबा घटा, मूंग और अरहर में कमी
इस वर्ष दलहनी फसलों का कुल रकबा 1.55 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 2.73 लाख हेक्टेयर था। यानी दलहन क्षेत्र में 1.18 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई है।
दलहनों में सबसे अधिक कमी मूंग और अरहर के रकबे में देखी गई। मूंग का क्षेत्र 1.54 लाख हेक्टेयर से घटकर 0.69 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि अरहर का रकबा 0.21 लाख हेक्टेयर से घटकर 0.09 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
बाजरा चमका, मक्का में गिरावट
श्रीअन्न एवं मोटे अनाजों के अंतर्गत कुल बुवाई क्षेत्र 4.77 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 4.32 लाख हेक्टेयर से अधिक है। इस श्रेणी में बाजरा सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली फसल रही। बाजरे का रकबा 0.24 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.15 लाख हेक्टेयर हो गया, जो लगभग 0.91 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्शाता है।
वहीं मक्का का रकबा 2.59 लाख हेक्टेयर से घटकर 2.28 लाख हेक्टेयर रह गया है। ज्वार और महीन बाजरे के क्षेत्र में भी मामूली कमी दर्ज की गई है।
तिलहनों में मिश्रित रुझान
तिलहनी फसलों की कुल बुवाई लगभग स्थिर रही है। 12 जून 2026 तक तिलहनों का रकबा 3.51 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 3.54 लाख हेक्टेयर था।
तिलहनों में मूंगफली की बुवाई बढ़कर 2.57 लाख हेक्टेयर पहुंच गई, जो पिछले वर्ष के 2.27 लाख हेक्टेयर से अधिक है। दूसरी ओर सोयाबीन का रकबा 0.90 लाख हेक्टेयर से घटकर 0.70 लाख हेक्टेयर रह गया। सूरजमुखी और तिल के क्षेत्र में भी गिरावट दर्ज की गई।
गन्ना और जूट-पटसन का रकबा लगभग स्थिर
गन्ने का कुल रकबा 54.08 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष के 54.29 लाख हेक्टेयर से थोड़ा कम है। वहीं जूट एवं पटसन का रकबा बढ़कर 6.18 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 6.09 लाख हेक्टेयर था।
कपास में सबसे बड़ी गिरावट
खरीफ सीजन की शुरुआती बुवाई में सबसे अधिक गिरावट कपास के रकबे में दर्ज की गई है। कपास का क्षेत्र पिछले वर्ष के 13.19 लाख हेक्टेयर से घटकर 9.53 लाख हेक्टेयर रह गया है। यानी कपास की बुवाई में 3.66 लाख हेक्टेयर की कमी आई है, जो सभी प्रमुख खरीफ फसलों में सबसे बड़ी गिरावट है।
12 जून 2026 तक खरीफ फसलों के अंतर्गत बुवाई की स्थिति (रकबा: लाख हेक्टेयर)
| फसल | 2026 | 2025 | वृद्धि/कमी |
| धान | 4.98 | 3.88 | 1.09 |
| दलहन | 1.55 | 2.73 | -1.18 |
| अरहर | 0.09 | 0.21 | -0.12 |
| उर्दबीन | 0.27 | 0.35 | -0.07 |
| मूंगबीन | 0.69 | 1.54 | -0.86 |
| कुलथी | 0.08 | 0.06 | 0.02 |
| अन्य दलहन | 0.41 | 0.57 | -0.16 |
| श्रीअन्न/मोटे अनाज | 4.77 | 4.32 | 0.45 |
| ज्वार | 0.73 | 0.8 | -0.07 |
| बाजरा | 1.15 | 0.24 | 0.91 |
| रागी | 0.31 | 0.3 | 0.01 |
| महीन बाजरा | 0.31 | 0.39 | -0.08 |
| मक्का | 2.28 | 2.59 | -0.32 |
| तिलहन | 3.51 | 3.54 | -0.02 |
| मूंगफली | 2.57 | 2.27 | 0.3 |
| सोयाबीन | 0.7 | 0.9 | -0.2 |
| सूरजमुखी | 0.16 | 0.22 | -0.06 |
| तिल | 0.05 | 0.11 | -0.06 |
| गन्ना | 54.08 | 54.29 | -0.21 |
| जूट एवं पटसन | 6.18 | 6.09 | 0.1 |
| कपास | 9.53 | 13.19 | -3.66 |
| कुल | 84.6 | 88.04 | -3.44 |
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

