राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

झींगा पालन को मिलेगा नया बल, केंद्रीय मत्स्य सचिव ने आईसीएआर-सीआईबीए का दौरा किया

20 जनवरी 2026, नई दिल्ली: झींगा पालन को मिलेगा नया बल, केंद्रीय मत्स्य सचिव ने आईसीएआर-सीआईबीए का दौरा किया – केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने आज चेन्नई स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय खारे पानी के मत्स्य पालन संस्थान (आईसीएआर-सीआईबीए) और इसके मुट्टुकड़ु प्रायोगिक केंद्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने झींगा पालन से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधान, उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़े पहलुओं का गहन अध्ययन किया तथा क्षेत्र के किसानों और उद्यमियों से सीधी बातचीत की।

डॉ. लिखी ने झींगा किसानों, उद्यमियों और विशेषज्ञों के साथ संवाद करते हुए उनकी सफलता की कहानियों, सर्वोत्तम तरीकों और सामने आने वाली चुनौतियों को साझा किया। उन्होंने आईसीएआर-सीआईबीए द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत संचालित पेनायस इंडिकस आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम स्थल का भी निरीक्षण किया, जिसका लक्ष्य भारतीय सफेद झींगा (P. indicus) की आनुवंशिक रूप से उन्नत किस्मों के विकास के माध्यम से वैज्ञानिक झींगा प्रजनन को सुदृढ़ करना है।

डॉ. लिखी ने संस्थान के वैज्ञानिकों से बातचीत करते हुए क्रस्टेशियन (जलीय अकशेरुकी जीव) अनुसंधान, सजावटी मछली इकाइयों, केकड़ा उत्पादन और चारा मिल जैसी उन्नत सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्हें खारे पानी के मत्स्य पालन में हो रहे शोध, विकास और नवाचार गतिविधियों को प्रत्यक्ष अनुभव करने का अवसर मिला।

झींगा भारत का एक प्रमुख निर्यात खाद्य उत्पाद है, और देश के कुल समुद्री खाद्य निर्यात में इसकी हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत तक है। इसीलिए केंद्रीय मत्स्य सचिव की यह यात्रा झींगा उद्योग के लिए विशेष महत्व रखती है। उन्होंने कहा कि किसानों और उद्यमियों से सीधी बातचीत से प्राप्त जानकारियां विभाग को मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास के लिए उचित नीतिगत हस्तक्षेप और पहल तैयार करने में मदद करेंगी।

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स्वदेशी नवाचारों पर फोकस

सरकार ने झींगा बाजार को मजबूत करने के लिए कई पहल शुरू की हैं। अमेरिकी आयात पर 58% टैरिफ के बावजूद, इस क्षेत्र ने लचीलापन दिखाया है और अप्रैल-अक्टूबर 2025 के दौरान निर्यात मूल्य में 21% व निर्यात मात्रा में 12% की वृद्धि दर्ज की गई है।

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डॉ. लिखी ने आईसीएआर-सीआईबीए द्वारा पीएमएमएसवाई के तहत वित्त पोषित दो प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की:

पेनायस इंडिकस का आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम (कुल लागत: ₹25.04 करोड़), जो स्वदेशी झींगा किस्मों के विकास पर केंद्रित है। नई युग की झींगा प्रणाली, जिसमें भूमि, जल और चारे के सटीक उपयोग की तकनीक विकसित की जा रही है (लागत: ₹2.21 करोड़)।

दो एमओयू पर हस्ताक्षर

डॉ. लिखी की उपस्थिति में झींगा चारा इको सिस्टम को मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए:

1. आईसीएआर-सीआईबीए और मेसर्स सेल्ले हैचरी टेक, मराक्कनम के बीच पहला एमओयू — भारत के पहले स्वदेशी झींगा लार्वा फ़ीड के व्यावसायीकरण को लेकर।

2. आईसीएआर-सीआईबीए और मेसर्स बीआरसी मरीन प्रोडक्ट्स, ओडिशा के बीच दूसरा एमओयू – झींगा आहार में चावल आधारित डीडीजीएस (Rice Distillers Dried Grains with Solubles) के उपयोग से महंगे प्रोटीन स्रोतों की भूमिका को चुनौती देने के लिए।

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ड्रोन तकनीक के प्रदर्शन का आयोजन

आईसीएआर-सीआईबीए ने केंद्रीय सचिव की उपस्थिति में ड्रोन तकनीक का प्रत्यक्ष प्रदर्शन आयोजित किया, जिसमें चारा छिड़काव और परिवहन के आधुनिक प्रयोगों को दिखाया गया। मत्स्य विभाग ने आईसीएआर-सीआईएफ़आरआई, बैरकपुर, कोलकाता को भी 1.16 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत ड्रोन पायलट कार्यक्रम सौंपी है।

स्वदेशी चारा और लागत में कमी

स्वदेशी झींगा लार्वा चारा के विकास से महंगे आयातित फ़ीड पर निर्भरता घटेगी। इस तकनीक को तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की 50 से अधिक हैचरी में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है, जिससे आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है।
डीडीजीएस को झींगा आहार में 7.5–10% शामिल करने पर यह प्रभावी और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव रहित पाया गया है, जिससे आहार लागत में 5–6% की कमी की संभावनाएं उजागर हुई हैं।

राष्ट्रीय समन्वय एवं साझेदारी

डॉ. लिखी ने राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक की अध्यक्षता भी की। उन्होंने अनुसंधान संस्थानों, उद्योग भागीदारों और राज्य सरकारों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि स्वदेशी प्रौद्योगिकी, जलवायु-अनुकूल मत्स्य पालन और संसाधन कुशलता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

बैठक में केंद्रीय मत्स्य विभाग के संयुक्त सचिव (अंतर्देशीय) सागर मेहरा, आईसीएआर-सीआईबीए के निदेशक डॉ. के. के. विजयन, आईसीएआर के उप महानिदेशक (मत्स्य पालन) डॉ. जे. के. जेना, तथा एनएफडीबी के सीईओ डॉ. बी. के. बेहरा (वर्चुअल) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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