राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

MSP पर तुअर-उड़द खरीद में तेजी, जानिए आपके राज्य में कब शुरू होगी खरीद

15 मार्च 2025, नई दिल्ली: MSP पर तुअर-उड़द खरीद में तेजी, जानिए आपके राज्य में कब शुरू होगी खरीद – भारत सरकार ने दाल उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए खरीफ 2024-25 सीजन में तुअर (अरहर), उड़द और मसूर की खरीद में तेजी लाने का फैसला किया है। केंद्र ने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) योजना को 2025-26 तक जारी रखने की अनुमति दी है, जिसके तहत मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत दलहन, तिलहन और खोपरा की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाएगी।

सरकार का दावा है कि यह योजना न केवल किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने में मदद करेगी, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को स्थिर रखने में भी सहायक होगी। पीएम-आशा योजना के तहत, पूर्व-पंजीकृत किसानों से सीधे केंद्रीय नोडल एजेंसियों (सीएनए) द्वारा राज्य स्तरीय एजेंसियों के माध्यम से खरीद की जाती है।

राज्यों में तुअर की खरीद जारीअन्य में जल्द होगी शुरू

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कुल 13.22 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) तुअर (अरहर), 9.40 एलएमटी मसूर और 1.35 एलएमटी उड़द की खरीद को मंजूरी दी है।

अब तक आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना में तुअर की खरीद शुरू हो चुकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 11 मार्च 2025 तक इन राज्यों में कुल 1.31 एलएमटी तुअर (अरहर) की खरीद हो चुकी है, जिससे 89,219 किसान लाभान्वित हुए हैं।
अन्य राज्यों (छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश) में भी जल्द ही खरीद प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

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100% एमएसपी पर खरीद का दावाअगले वर्षों तक जारी रहेगी योजना

सरकार का कहना है कि देश में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए अगले चार वर्षों तक केंद्रीय नोडल एजेंसियों के माध्यम से राज्यों के कुल उत्पादन के 100% तक अरहर, उड़द और मसूर की खरीद जारी रखी जाएगी। इसके तहत नैफेड (NAFED) और NCCF किसानों से सीधे खरीद करेंगे।

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किसानों को पंजीकरण और खरीद प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार ने नैफेड के ई-समृद्धि पोर्टल और एनसीसीएफ के संयुक्ति पोर्टल पर पंजीकरण की सुविधा दी है। पूर्व-पंजीकृत किसान इन पोर्टलों पर जाकर एमएसपी पर अपनी उपज बेच सकते हैं। हालांकि, अभी यह देखना बाकी है कि क्या सभी किसानों तक यह सुविधा आसानी से पहुंच रही है या नहीं।

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