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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

इस रबी मौसम में गेहूं का रिकॉर्ड क्षेत्र और उत्पादन होने की उम्मीद

गेहूं, तिलहन पिछले पूरे मौसम के आँकड़े पार कर चुका है

24 दिसम्बर 2022, नई दिल्ली: इस रबी मौसम में गेहूं का रिकॉर्ड क्षेत्र और उत्पादन होने की उम्मीद – रबी फसलों की बुवाई की गति में तेजी बरक़रार  है। बीती 23 दिसम्बर  तक, रबी फसलों के तहत बोया गया क्षेत्र 2021-22 में 594.62 लाख हेक्टेयर से 2022-23 में 4.37 प्रतिशत बढ़कर 620.62 लाख हेक्टेयर हो गया है। यह 2021-22 की इसी अवधि की तुलना में इस वर्ष 25.99 लाख हेक्टेयर अधिक है। क्षेत्र में वृद्धि सभी फसलों में हुई है, सबसे अधिक गेहूं में हुई है। सभी रबी फसलों में हुई 25.99 लाख हेक्टेयर की वृद्धि में से, गेहूं के क्षेत्र में 9.65 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है  जो 302.61 से बढ़कर 312.26 लाख हेक्टेयर हो गई। हालांकि रबी फसलों की बुवाई अभी भी प्रगति पर है, इस वर्ष 23-12-2022 तक गेहूं के तहत लाया गया क्षेत्र सामान्य रबी फसल क्षेत्र (304.47) से अधिक है और पिछले वर्ष बुआई का कुल क्षेत्र (304.70) था। गेहूं के क्षेत्र में यह वृद्धि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया के सामने गेहूं की उपलब्धता के संकट और इस वर्ष हमारी अपनी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की पृष्ठभूमि में बहुत आश्वस्त करने वाली है।  इस वर्ष रिकॉर्ड क्षेत्र  और गेहूं का उत्पादन होने की उम्मीद है।

तिलहन

तिलहन उत्पादन चिंता का एक प्रमुख कारण है क्योंकि घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश को खाद्य तेलों के आयात पर भारी खर्च करना पड़ा है। 2021-22 में देश को 1.41 लाख करोड़ रुपये की लागत से 142 लाख टन खाद्य तेलों का आयात करना पड़ा। सरकार का ध्‍यान मुख्‍य रूप से खाद्य तेलों में आयात निर्भरता को कम करने के लिए तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर है। तिलहन पर नए सिरे से ध्यान देने के कारण तिलहन के तहत क्षेत्र 2021-22 के दौरान 93.28 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस वर्ष 101.47 लाख हेक्टेयर हो गया। यह सामान्य बोए गए क्षेत्र 78.81 लाख हेक्टेयर पर 22.66 लाख हेक्‍टेयर अधिक है। यह 2021-22 के दौरान प्राप्त 93.33 लाख हेक्टेयर के रिकॉर्ड क्षेत्र से भी अधिक है। तिलहन के क्षेत्र में 9.60 प्रतिशत की दर से वृद्धि सभी फसलों में सबसे अधिक है।

सरसों ने मारा मैदान

इस रबी सीजन में तिलहन के क्षेत्र में सबसे ज्यादा योगदान रेपसीड और सरसों का रहा। सरसों का क्षेत्र 2021-22 में 85.35 लाख हेक्‍टेयर था जो 7.32 लाख हेक्‍टेयर  बढ़कर 2022-23 में 92.67 लाख हेक्‍टेयर हो गया। 8.20 लाख हेक्‍टेयर में से अकेले तिलहन, रेपसीड और सरसों का क्षेत्र 7.32 लाख हेक्टेयर है। अब तक रेपसीड और सरसों की खेती के तहत लाया गया क्षेत्र 63.46 लाख हेक्टेयर के सामान्य बोए गए क्षेत्र से काफी अधिक है और 2021-22 के दौरान रिकॉर्ड क्षेत्र प्राप्त हुआ है। पिछले 2 वर्षों के दौरान, रेपसीड और सरसों का क्षेत्र 2019-20 में 68.56 से 17 प्रतिशत बढ़कर 2021-22 में 80.58 लाख हेक्टेयर हो गया। नवीनतम किस्‍मों आरएच-106, आरएच-725, आरएच-749, आरएच-761, सीएस-58, सीएस-60, गिरिराज, पंत राय-20, जीएम-3, पीडीजेड-31 जैसे 2500-4000 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की सीमा में उपज क्षमता वाले बीज वितरित किए गए। अधिक  क्षेत्र और उच्च उत्पादकता से तिलहन उत्पादन में भारी उछाल आएगा और आयातित खाद्य तेलों की मांग में कमी आएगी।

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दलहन भी बढ़ा

दलहन के तहत क्षेत्र 3.91 लाख हेक्टेयर बढ़कर 144.64 से 148.54 लाख हेक्टेयर हो गया। सभी दालों के लिए 3.91 लाख हेक्टेयर में से अकेले मसूर की दाल के क्षेत्र के हिस्‍से में 1.40 लाख हेक्‍टेयर की वृद्धि हुई है। इसी प्रकार चने की खेती तहत  आने वाले क्षेत्र में 0.72 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई। लगभग 4.04 लाख HYV बीज मिनीकिट ‘टीएमयू370’ के तहत किसानों को मसूर के लिए मुफ्त वितरित किए गए। वितरित की गई उच्च उपज वाली किस्मों में आईपीएल 220, आईपीएल 315, आईपीएल 316, आईपीएल 526 शामिल हैं। उड़द के लिए एलबीजी-787 के 50,000 बीज मिनीकिट चयनित जिलों के किसानों के बीच वितरित किए गए।

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मोटे और पोषक अनाज की खेती के तहत आने वाले क्षेत्र में 2,42 लाख हेक्टेयर की वृद्धि देखी गई जो 2021-22 के 41,50 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2022-23 में अब तक 43,92 लाख हेक्टेयर हो गई। भारत बड़े पैमाने पर आईवाईओएम का जश्न मनाने में सबसे आगे है और बाजरा के लिए वैश्विक केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।

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