कृषि में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजना

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nk-agrwal

17 अगस्त 2022, नई दिल्ली । कृषि में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजना भारत सरकार ने योग्य विनिर्माण कंपनियों को आयात प्रतिस्थापन और रोजगार सृजन के लिए आवश्यक घरेलू और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने और विदेशी कंपनियों को भारत में कार्यबल खोजने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शुरू की।

केंद्रीय बजट 2021-22 में स्वीकृत 14 क्षेत्रों में पीएलआई के लिए कुल व्यय 1.97 लाख करोड़ रुपये (26 अरब डॉलर से अधिक) था। नवंबर 2020 में सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 10,900 करोड़ रुपये मूल्य के पीएलआई योजना को मंजूरी दी थी। यह योजना 2021-22 से 2026-27 तक के छह वर्ष की अवधि में लागू की जाएगी। योजना के क्रियान्वयन से वर्ष 2026-27 तक प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार से 33,494 करोड़ रुपये का प्रसंस्कृत खाद्य का उत्पादन होगा और लगभग 2.5 लाख लोगों के लिए रोजगार का सृजन होगा। इस क्षेत्र की पूर्ण क्षमता को प्राप्त करने के लिए भारतीय कंपनियों को उत्पादन के पैमाने, उत्पादकता, मूल्यवर्धन और वैश्विक मूल्य श्रृंखला के साथ उनके संबंधों के संदर्भ में अपने वैश्विक समकक्ष की तुलना में अपनी प्रतिस्पर्धी ताकत में सुधार करने की आवश्यकता होगी। इन सभी के लिए, फलों और सब्जियों के मूल्यवर्धन पहलू को बढ़ाने और कटाई के बाद अधिक नुकसान को कम करने सहित मछली पकडऩे, डेयरी उद्योग और मधुमक्खी पालन के लिए एक बहुत मजबूत अनुसंधान एवं विकास वांछित है। पीएलआई योजना इस क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देगा क्योंकि कंपनियां आवश्यक मूल्यवर्धन बनाने, नई तकनीकों को लाने और उचित किफायती भंडारण के लिए बुनियादी ढाँचे पर ध्यान केंद्रित करने के लिए निवेश करेंगी। यह सब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में वैश्विक दृश्यता और व्यापक स्वीकृति के लिए खाद्य उत्पादों के भारतीय ब्रांड को मजबूत करेगा। यह कृषि उत्पादों के लाभकारी मूल्य और किसानों के लिए अधिक आय भी सुनिश्चित करेगा।

इसी तरह, रसायन और उर्वरक मंत्रालय भी एग्रो केमिकल्स सहित रसायन और पेट्रोकेमिकल्स के लिए पीएलआई योजना तैयार कर रहा है। यहाँ प्रमुख मानदंड प्रमुख मध्यवर्तियों के आयात का प्रतिस्थापन है, और यह सुनिश्चित करना है कि भारत घरेलू विनिर्माण के लिए इन आवश्यक मध्यवर्तियों के बारे में आत्मनिर्भर हो जाए। इससे भारत को विशेष रूप से गुणवत्ता और लागत दक्षता के साथ एग्रोकेमिकल्स के क्षेत्र में वैश्विक सोर्सिंग हब बनने में मदद मिलेगी और इस तरह निर्यात में काफी वृद्धि होगी।

वर्तमान में, भारतीय कंपनियों का अनुसंधान एवं विकास निवेश उनके टर्नओवर का 1-2 प्रतिशत है जो बहुत कम है, और इसलिए नए नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए उद्योग को आकर्षक प्रोत्साहन दिए जाने की आवश्यकता है। पीएलआई योजना के कार्यान्वयन से इस अनुसंधान एवं विकास निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा क्योंकि कई कंपनियाँ इस योजना में सक्रिय रूप से शामिल होंगी।

इससे पीएलआई योजना में शामिल अनुसंधान एवं विकास पर ध्यान केन्द्रित करने वाली कंपनियों के लिए जीत की स्थिति होगी क्योंकि यह स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देगा, नए नवाचार लाएगा, रोजगार पैदा करेगा, निर्यात को बढ़ावा देगा और इसलिए अधिक विदेशी मुद्रा अर्जित करेगा और भारत को विनिर्माण के लिए एक पसंदीदा वैश्विक हब बना देगा।

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