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भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने छात्राओं का प्रतिशत बढ़ा : एक महत्वपूर्ण परिवर्तन

29 मई 2024, नई दिल्ली: भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने छात्राओं का प्रतिशत बढ़ा: एक महत्वपूर्ण परिवर्तन – अब कृषि से संबंधित पाठ्यक्रमों में महिला छात्रों का नामांकन 2017 के  27% से बढ़कर 2023 में लगभग 50% हो गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)  के अनुसार, केरल के  कृषि विश्वविद्यालयों में छात्राओं  का नामांकन 74% तक पहुंच गया है, जो देश में सबसे अधिक है। इसके बाद हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, मणिपुर, असम, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड, नागालैंड और ओडिशा का स्थान आता है।

बढ़ती महिला भागीदारी

ICAR के डिप्टी डायरेक्टर जनरल, आरसी अग्रवाल के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में कृषि विश्वविद्यालयों में महिला छात्रों को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। 245 छात्रावासों में से 140 छात्रावास केवल लड़कियों के लिए आरक्षित किए गए हैं। ICAR-NAHEP परियोजना के तहत 33.33% सीटें छात्राओं  के लिए आरक्षित की गई हैं। इस परियोजना के कारण छात्राओं  का हिस्सा 2019 में 28% से बढ़कर 2023 में 44% हो गया है।

आकर्षक पाठ्यक्रम और सुविधाएं

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छात्राएं कृषि अभियांत्रिकी, जैव प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रौद्योगिकी, पशु चिकित्सा, बागवानी और डेयरी प्रौद्योगिकी जैसे पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता देती हैं। महिला सशक्तिकरण और कृषि क्षेत्र में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की दिशा में बढ़ती जागरूकता ने भी इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कृषि विश्वविद्यालयों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी, सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें और शिकायत निवारण पोर्टल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

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वित्तीय सहायता और छात्रवृत्तियां

महिला छात्रों को वित्तीय सहायता देने के लिए ICAR, UGC और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा विभिन्न छात्रवृत्तियां प्रदान की जा रही हैं। ICAR-NAHEP परियोजना के तहत 5.15 लाख लाभार्थियों में से 44% महिलाएं हैं। इसके अलावा, ICAR के अंतर्राष्ट्रीय शैक्षिक संस्थानों में जाने वाले कुल 2,700 छात्रों में से 42% महिलाएं हैं।

कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कृषि अध्ययन  कर रही छात्राओं को विभिन्न राज्य सरकारों ने  भी  प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की है. सरकार की कृषि छात्र प्रोत्साहन राशि योजना के तहत छात्राओं को यह आर्थिक सहायता दी जाएगी.राजस्थान में  स्नातक और स्नातकोत्तर कृषि में अध्ययनरत छात्राओं के लिए 25 हजार और पीएचडी के लिए 40 हजार रुपए प्रति वर्ष कर दी गई है. इससे छात्राओं की कृषि से सम्बन्धित विषयों में रुचि बढ़ेगी और वे कृषि के क्षेत्र में उन्नति प्रदान करेगी.इस प्रकार, भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों में छात्राओं  की बढ़ती भागीदारी न केवल कृषि शिक्षा को समृद्ध कर रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दे रही है।

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