गेहूं की नई किस्म Pusa Wheat 3471 हुई तैयार, जानें किस इलाके के किसानों के लिए है खास
06 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: गेहूं की नई किस्म Pusa Wheat 3471 हुई तैयार, जानें किस इलाके के किसानों के लिए है खास – रबी सीजन में गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए एक नई किस्म विकसित की गई है। इसका नाम Pusa Wheat 3471 या HD 3471 है। इस किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI) ने विकसित किया है। इसे लोकप्रिय गेहूं की किस्म HD 3086 में सुधार करते हुए तैयार किया गया है। नई किस्म को विकसित करने के लिए आणविक मार्कर-सहायित बैकक्रॉस प्रजनन तकनीक (Molecular Marker-Assisted Backcross Breeding) यानी MABB तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
इन किसानों के लिए ज्यादा उपयोगी
Pusa Wheat 3471 को North Western Plains Zone (NWPZ) के लिए प्रस्तावित किया गया है। इस क्षेत्र में समय पर गेहूं की बुवाई और सिंचाई की सुविधा वाले खेतों को ध्यान में रखते हुए इस किस्म को विकसित किया गया है। गेहूं की खेती के लिए इसी क्षेत्र में HD 3086 भी विकसित की गई थी। इसे Pusa Gautami के नाम से जाना जाता है। AICRP के रिकॉर्ड में NWPZ में समय पर बोई जाने वाली गेहूं की फसल के लिए MABB तकनीक पर आधारित परीक्षणों का भी उल्लेख है।
HD 3086 की उपज कितनी है?
Pusa Wheat 3471 को समझने के लिए इसकी मूल किस्म HD 3086 की उपज क्षमता पर भी नजर डालना जरूरी है। ICAR के एक प्रकाशन के मुताबिक, HD 3086 की औसत उपज 5.46 टन प्रति हेक्टेयर यानी 54.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है। वहीं, इसकी आनुवंशिक उपज क्षमता 7.1 टन प्रति हेक्टेयर यानी 71 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। HD 3086 में पीला रतुआ और भूरा रतुआ के प्रति प्रतिरोध के साथ गेहूं की गुणवत्ता से जुड़े अच्छे गुण भी पाए जाते हैं।
नई किस्म में सूखे से जुड़े गुण
Pusa Wheat 3471 को विकसित करते समय सूखा सहनशीलता से जुड़े QTL को शामिल करने की कोशिश की गई है। इसका उद्देश्य किस्म में सूखे से संबंधित उपयोगी गुणों को जोड़ना है। हालांकि, इसके सूखा संबंधी गुणों को खेत की वास्तविक परिस्थितियों में अभी और जांचने की जरूरत है। इसलिए HD 3471 को हर तरह की परिस्थिति में पूरी तरह सूखा सहनशील किस्म कहना सही नहीं होगा।
खेती से पहले किसान जरूर जांचें ये जानकारी
रबी सीजन 2026 से पहले अक्टूबर 2026 की कृषि रिपोर्टों में Pusa Wheat 3471 की चर्चा बदलती जलवायु परिस्थितियों के संदर्भ में हुई है। हालांकि, किसी भी नई किस्म की खेती शुरू करने से पहले किसानों को अपने क्षेत्र के लिए इसकी आधिकारिक सिफारिश की जानकारी लेनी चाहिए।
साथ ही, बीज खरीदते समय उसकी प्रामाणिकता जरूर जांचें। स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से सही सलाह के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से भी जानकारी ले सकते हैं।
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