राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

स्तरीय नेटवर्क और नकद लेन-देन: भारत में नकली कीटनाशक कारोबार ₹1,000 करोड़ के पार जाने की आशंका

09 जनवरी 2026, नई दिल्ली: स्तरीय नेटवर्क और नकद लेन-देन: भारत में नकली कीटनाशक कारोबार ₹1,000 करोड़ के पार जाने की आशंका – देश में नकली और स्प्यूरियस कीटनाशकों का अवैध कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। कई जब्तियों और चल रही जांच के बावजूद प्रवर्तन एजेंसियों का अनुमान है कि इस अवैध व्यापार का कुल आकार ₹1,000 करोड़ से अधिक हो सकता है। अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क से जुड़े कई ऑपरेटर अब भी सक्रिय हैं और देशभर में एजेंटों, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं की परतदार (layered) व्यवस्था के जरिए अपना संचालन कर रहे हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह अवैध नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम करता है। निर्माण स्तर से लेकर अंतिम खुदरा बिक्री तक, हर चरण पर अलग-अलग व्यक्ति और इकाइयाँ शामिल होती हैं, जिससे असली संचालकों तक पहुंचना कठिन हो जाता है। नकद लेन-देन की बड़ी हिस्सेदारी इस नेटवर्क की सबसे बड़ी पहचान मानी जा रही है, क्योंकि इससे नियामकीय निगरानी से बचना आसान हो जाता है और लेन-देन का कोई औपचारिक रिकॉर्ड नहीं बनता।

अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों में कई बार छापेमारी और जब्ती की कार्रवाई की गई है, लेकिन इसके बावजूद अवैध कीटनाशक कारोबार पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। कई मामलों में यह भी सामने आया है कि एक स्थान पर कार्रवाई के बाद नेटवर्क तुरंत अपना संचालन दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित कर देता है। यही वजह है कि प्रवर्तन एजेंसियां इसे केवल किसी एक राज्य या क्षेत्र की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की समस्या मान रही हैं।

इस अवैध कारोबार का सबसे बड़ा और सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। नकली कीटनाशकों के इस्तेमाल से फसलों को भारी नुकसान होता है, उत्पादन घटता है और किसानों की आय पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। कई बार किसानों को यह जानकारी ही नहीं होती कि वे जिन उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं, वे असली हैं या नकली। परिणामस्वरूप उनकी लागत बढ़ती है और पूरी फसल खराब होने का खतरा पैदा हो जाता है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या केवल कृषि तक सीमित नहीं है। नकली और अनियंत्रित रसायनों के उपयोग से मिट्टी और जल स्रोतों में प्रदूषण बढ़ने का खतरा रहता है, जिसका असर अंततः खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। ऐसे रसायन खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं।

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प्रवर्तन एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, खुफिया जानकारी साझा करने और सख्त कानूनी कार्रवाई पर जोर दे रही हैं। साथ ही, किसानों और खुदरा विक्रेताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है, ताकि वे प्रमाणित और पंजीकृत कीटनाशकों की पहचान कर सकें और नकली उत्पादों से बच सकें।

अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि नकली कीटनाशकों का यह अवैध कारोबार केवल एक आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि यह कृषि व्यवस्था, किसान कल्याण और देश की खाद्य सुरक्षा पर सीधा हमला है। यदि समय रहते प्रभावी और समन्वित कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में इसका दायरा और इससे होने वाला नुकसान दोनों ही और अधिक बढ़ सकते हैं।

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