किसान कॉल सेंटर: अन्नदाताओं का डिजिटल सहारा, अब घर बैठे पाएं मौसम, बाजार और खेती की पूरी जानकारी
10 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: किसान कॉल सेंटर: अन्नदाताओं का डिजिटल सहारा, अब घर बैठे पाएं मौसम, बाजार और खेती की पूरी जानकारी – देशभर के किसानों के लिए कृषि संबंधित जानकारी अब और भी आसान हो गई है। किसान कॉल सेंटर (KCC) अन्नदाताओं का डिजिटल सहारा बनकर सामने आया है, जहां वे घर बैठे मौसम, बाजार, कृषि पद्धतियों, सरकारी योजनाओं और उन्नत कृषि तकनीकों की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। सरकार ने इसे किसानों के लिए बहुभाषी और सहज बनाने के लिए 17 केंद्रों में फैला दिया है, जो 22 आधिकारिक भाषाओं में सेवाएं प्रदान करते हैं।
यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी। उन्होंने बताया कि किसान कॉल सेंटर का उद्देश्य किसानों को कृषि सलाह, लागू सरकारी योजनाओं की जानकारी और पैकेज ऑफ प्रैक्टिस (POP) उपलब्ध कराना है। इसमें कॉल होल्डिंग और कॉल रूटिंग जैसी सुविधाएँ भी शामिल हैं। यदि लाइन फ्री है, तो कॉल को 4 रिंग के भीतर उठाना अनिवार्य है। अगर सभी लाइनें व्यस्त हों, तो डायनेमिक IVR प्रणाली किसानों को कतार संख्या और अनुमानित प्रतीक्षा समय बताती है। कॉल हॉल्ड के दौरान किसान मौसम-विशिष्ट मानक सलाह भी प्राप्त कर सकते हैं।
वॉयस मेल और कॉल बैक सुविधा
किसान अब वॉयस मेल सिस्टम (VMS) के माध्यम से अपने प्रश्न और फोन नंबर छोड़ सकते हैं। इसके बाद उन्हें आउटबाउंड रिकॉर्डेड प्रतिक्रिया या कॉल बैक के जरिए जवाब दिया जाता है। सभी प्रश्नों का उत्तर स्नातक स्तर के फार्म टेली एडवाइजर्स (FTA) और पर्यवेक्षकों द्वारा दिया जाता है। यदि किसी प्रश्न का उत्तर नहीं दिया जा सकता, तो उसे उच्च स्तरीय विशेषज्ञों को भेजा जाता है, जिसमें राज्य कृषि विभाग, ICAR संस्थान, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और राज्य कृषि विश्वविद्यालय शामिल हैं।
डिजिटल और AI/ML आधारित सहारा
सरकार किसान कॉल सेंटर को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए AI/ML आधारित उपकरणों को शिकायत निवारण और प्रश्न प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में एकीकृत कर रही है। इसके साथ ही, कॉमन टोल-फ्री नंबर, वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से किसान अपनी समस्याओं को दर्ज कर सकते हैं और उनका समाधान पा सकते हैं।
किसान कॉल सेंटर देशभर के अन्नदाताओं के लिए एक बहुभाषी, तेज़ और भरोसेमंद डिजिटल सहारा बन गया है, जो मौसम से लेकर बाजार और खेती की उन्नत तकनीकों तक हर जानकारी सीधे उपलब्ध कराता है।
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