जलवायु अनुकूल खेती पर ICAR–BISA की अहम कार्यशाला, ACASA–India एटलस का शुभारंभ
24 जनवरी 2026, नई दिल्ली: जलवायु अनुकूल खेती पर ICAR–BISA की अहम कार्यशाला, ACASA–India एटलस का शुभारंभ – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित राष्ट्रीय जलवायु-सहिष्णु कृषि नवाचार (NICRA) की समीक्षा कार्यशाला तथा एटलस ऑफ क्लाइमेट अडैप्टेशन इन इंडियन एग्रीकल्चर (ACASA–India) के लॉन्च-कम-यूज़ केस कार्यशाला का उद्घाटन नई दिल्ली में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने किया।
15 वर्षों के अनुभवों की हुई समीक्षा
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य NICRA के 15 वर्षों के अनुभवों का समेकन, भारत की जलवायु-सहिष्णु कृषि में उपलब्धियों का आकलन तथा डेटा-आधारित रोडमैप तैयार करना रहा। यह रोडमैप विज्ञान, नीति-संरेखण और लक्षित निवेश के जरिए जलवायु-सहिष्णु कृषि-खाद्य प्रणालियों को मजबूत करने पर केंद्रित है।
बसंत पंचमी पर ज्ञान मंचों का शुभारंभ
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि बसंत पंचमी, जो ज्ञान और नवचेतना का प्रतीक है, भारत की जलवायु सहनशीलता की यात्रा पर विचार करने और ACASA–India एटलस तथा NICRA पोर्टल जैसे राष्ट्रीय ज्ञान मंचों के शुभारंभ के लिए उपयुक्त अवसर है।
उन्होंने कहा कि NICRA अब एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जहां स्पष्ट रणनीतिक दिशा और दीर्घकालिक दृष्टि की आवश्यकता है।
जलवायु दबावों में भी भारतीय कृषि मजबूत
डॉ. जाट ने कहा कि बार-बार आने वाली जलवायु चुनौतियों, विशेषकर वर्षा-आश्रित क्षेत्रों में, भारतीय कृषि ने उल्लेखनीय सहनशीलता और उत्पादकता वृद्धि दिखाई है। यह जलवायु-सहिष्णु तकनीकों, सहायक नीतियों और संस्थागत समन्वय की सफलता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत की जलवायु सहनशीलता एक एकीकृत तंत्र पर आधारित है, जिसमें विज्ञान, नीति समर्थन, तकनीकी नवाचार, सामाजिक सुरक्षा और समन्वित कार्यान्वयन शामिल हैं।
किसानों की अनुकूलन क्षमता बढ़ा रहीं योजनाएं
डॉ. जाट के अनुसार NICRA, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पशुधन एवं मत्स्य मिशन जैसी पहलें मिलकर किसानों की अनुकूलन क्षमता और आजीविका को मजबूत कर रही हैं। उन्होंने भविष्य की दिशा बताते हुए केंद्रीकृत डेटा पारिस्थितिकी तंत्र, सम्पूर्ण-सरकार और सम्पूर्ण-समाज दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत पर बल दिया।
NICRA बना वैश्विक मॉडल
ICAR महानिदेशक ने कहा कि भारत का अनुभव विज्ञान-आधारित और नीति-संरेखित समाधानों की एक मजबूत वैश्विक मिसाल पेश करता है। NICRA को जलवायु-सहिष्णु कृषि के लिए एक संभावित वैश्विक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
ACASA–India एटलस का शुभारंभ
इस अवसर पर ACASA–India का औपचारिक शुभारंभ भी किया गया। यह ICAR के नेतृत्व वाले NARES द्वारा BISA–CIMMYT के सहयोग से विकसित एक वेब-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो स्थान-विशिष्ट और डेटा-आधारित जलवायु अनुकूलन योजना तैयार करने में सहायता करेगा।
विशेषज्ञों ने रखे विचार
कार्यक्रम में ICAR के उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. राजबीर सिंह ने कहा कि यह कार्यशाला बड़े पैमाने पर विज्ञान को आगे बढ़ाने और जलवायु कार्रवाई के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने भविष्य की जलवायु कार्रवाई के लिए मजबूत और विश्वसनीय कार्बन क्रेडिट पद्धतियों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. ए. के. नायक ने कहा कि यह कार्यशाला वैश्विक कृषि समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है और इसके निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु चुनौतियों से निपटने में सहायक होंगे।
151 जिलों में लागू है NICRA
कार्यशाला में NICRA की प्रगति की समीक्षा की गई। यह कार्यक्रम वर्तमान में देश के 151 अत्यधिक जलवायु-संवेदनशील जिलों में 200 से अधिक स्थानों पर लागू है। प्रतिभागियों ने कहा कि NICRA को और सशक्त बनाना विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में बेहद आवश्यक है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में ICAR के विभिन्न प्रभागों के उप महानिदेशक और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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