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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

नए शिखर पर पहुंचेगा खाद्यान्न उत्पादन 2025 में, कृषि क्षेत्र को 4% वृद्धि की उम्मीद

31 दिसंबर 2024, नई दिल्ली: नए शिखर पर पहुंचेगा खाद्यान्न उत्पादन 2025 में, कृषि क्षेत्र को 4% वृद्धि की उम्मीद – भारत 2025 में खाद्यान्न उत्पादन के नए शिखर को छूने के लिए तैयार है। अनुकूल मानसून के चलते खरीफ फसलों का रिकॉर्ड उत्पादन अनुमानित है, लेकिन दालों और तिलहन में आत्मनिर्भरता की चुनौती अब भी बनी हुई है। कृषि मंत्रालय के प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, 2024-25 में खरीफ फसलों का उत्पादन 164.7 मिलियन टन तक पहुंच सकता है।

रबी फसलों की बुआई भी तेजी से हो रही है, जिसमें 29.31 मिलियन हेक्टेयर पर गेहूं और कुल 55.88 मिलियन हेक्टेयर में रबी फसलें बुआई गई हैं। कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने कहा, “सामान्य वर्षा के कारण खरीफ फसल अच्छी रही। हालांकि, फरवरी-मार्च में संभावित गर्मी की लहरें रबी फसलों, खासकर गेहूं की पैदावार को प्रभावित कर सकती हैं।”

कृषि क्षेत्र में सुधार के संकेत

2024-25 में कृषि क्षेत्र की विकास दर 3.5-4% तक पहुंचने की उम्मीद है, जो पिछले वित्तीय वर्ष के 1.4% से काफी बेहतर है। कृषि अर्थशास्त्री एस. महेंद्र देव के अनुसार, “अच्छे मानसून और ग्रामीण मांग में वृद्धि ने सुधार में मदद की है।” हालांकि, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में बाढ़ और सूखे की वजह से फसलें प्रभावित हुई हैं।

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दाल-तिलहन उत्पादन की चुनौती

दाल और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए सरकार 2025 में ‘राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन’ (NMEO-Oilseeds) लॉन्च करेगी। इसके लिए 10,103 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

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फलों और सब्जियों का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर है, जिसका श्रेय उन्नत कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं को जाता है। ड्रोन और एआई आधारित तकनीक किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही हैं।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के तहत 2018 से अब तक 11 करोड़ किसानों को 3.46 लाख करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। सितंबर 2024 में शुरू की गई 13,966 करोड़ रुपये की सात नई योजनाएं 2025 में पूरी तरह लागू होंगी।

किसानों की समस्याएं और संभावित सुधार

पंजाब और हरियाणा में किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं। संसदीय समिति ने PM-KISAN योजना के तहत किसानों को दी जाने वाली राशि को बढ़ाकर 12,000 रुपये करने और छोटे किसानों के लिए सार्वभौमिक फसल बीमा लागू करने की सिफारिश की है।

सरकार की फसल बीमा योजना (PMFBY) को बेहतर बनाने के लिए वैश्विक मानकों के साथ तुलना की जाएगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि कई योजनाओं में सुधार की आवश्यकता है।

आने वाला वर्ष भारत के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होगा, जहां पारंपरिक कृषि और नई तकनीक के समन्वय के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा और किसान कल्याण पर ध्यान देना जरूरी होगा।

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