अरहर की किस्म ‘आशा’ का पहला पूर्ण जीनोम तैयार, किसानों को मिलेगा लाभ
05 अगस्त 2026, नई दिल्ली: अरहर की किस्म ‘आशा’ का पहला पूर्ण जीनोम तैयार, किसानों को मिलेगा लाभ – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने अरहर (तूर) की ‘आशा’ किस्म का देश का पहला पूर्ण टेलोमियर-टू-टेलोमियर (T2T) संदर्भ जीनोम विकसित किया है। यह उपलब्धि अरहर की उन्नत, अधिक उत्पादन देने वाली, जलवायु-अनुकूल और बेहतर पोषण वाली किस्मों के विकास में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगी।
अरहर (Cajanus cajan) भारत की प्रमुख दलहनी फसलों में से एक है और देश में प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत मानी जाती है।
यह उपलब्धि आईसीएआर–राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईपीबी), नई दिल्ली द्वारा पिछले एक दशक से किए जा रहे जीनोमिक अनुसंधान का परिणाम है। वर्ष 2011 में संस्थान ने अरहर का विश्व का पहला ड्राफ्ट जीनोम प्रकाशित किया था, जो भारत में पूरी तरह अनुक्रमित पहली दलहनी फसल का जीनोम था। इसके बाद वर्ष 2017 में इसका उन्नत संस्करण प्रकाशित किया गया। अब प्रस्तुत T2T जीनोम अरहर का पूर्ण संदर्भ जीनोम उपलब्ध कराता है।
नया जीनोम 752.65 मिलियन बेस पेयर डीएनए का है, जिसे 92 कॉन्टिग्स में संयोजित किया गया है। इसमें अरहर के सभी 11 गुणसूत्रों का पूर्ण प्रतिनिधित्व है। इस जीनोम असेंबली को NIPB_CcT2T_4 नाम दिया गया है और इसे 20 अप्रैल 2026 को नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के डेटाबेस में सार्वजनिक किया गया।
आईसीएआर के अनुसार, इस जीनोम में सभी 11 सेंट्रोमियर और 22 टेलोमियर शामिल हैं। जीनोम एनोटेशन के दौरान 36,557 जीनों की पहचान की गई, जो 48,008 मैसेंजर आरएनए (mRNA) ट्रांसक्रिप्ट बनाते हैं। ट्रांसक्रिप्टोम मैपिंग में 99.9 प्रतिशत से अधिक रीड एलाइनमेंट दर्ज किया गया, जिससे इसकी सटीकता की पुष्टि होती है।
आईसीएआर का कहना है कि यह संदर्भ जीनोम जीन खोज, पैन-जीनोम अध्ययन, आणविक प्रजनन (मॉलिक्यूलर ब्रीडिंग) तथा जीन संपादन (जीन एडिटिंग) जैसे अनुसंधानों में उपयोगी होगा। इसके माध्यम से वैज्ञानिक कृषि एवं पोषण संबंधी महत्वपूर्ण गुणों से जुड़े जीनों की पहचान कर नई अरहर किस्मों के विकास की प्रक्रिया को तेज कर सकेंगे।
यह उपलब्धि भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भरता इन पल्सेज मिशन’ (2025-26 से 2030-31) के उद्देश्यों के अनुरूप है। इस मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक देश में दलहन उत्पादन को लगभग 35 मिलियन टन तक बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना तथा उन्नत बीज, तकनीक अपनाने, क्षेत्र विस्तार, सुनिश्चित खरीद और बेहतर भंडारण व्यवस्था के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाना है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

