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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

केंद्र सरकार किसानों के आंदोलन का बदला लेना चाहती है: आम आदमी पार्टी का आरोप

रिपोर्ट: जग मोहन ठाकन

04 नवंबर 2024, चंडीगढ़: केंद्र सरकार किसानों के आंदोलन का बदला लेना चाहती है: आम आदमी पार्टी का आरोप – आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर धान की खरीद और उठान से जुड़े मुद्दों को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार किसानों के आंदोलन का बदला लेना चाहती है। आप सांसद मलविंदर सिंह कंग ने आरोप लगाया कि इस बार केंद्र सरकार ने जानबूझकर गोदाम खाली नहीं किए ताकि पंजाब के किसानों को परेशान किया जा सके।

कंग ने कहा कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा हर साल मंडी में नई फसल आने से पहले पुराने अनाज को गोदाम से उठाने की प्रक्रिया खाद्य आपूर्ति मंत्रालय के तहत नियमित रूप से होती है ताकि नए अनाज के लिए जगह बनाई जा सके। यह प्रक्रिया दशकों से चली आ रही है, सिर्फ एक या दो साल से नहीं।

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मंगलवार को चंडीगढ़ में पार्टी कार्यालय में आप नेताओं जगदीप सिंह काका बरार और शामिंदर खिंडा के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए कंग ने कहा कि इस बार केंद्र सरकार ने जानबूझकर गोदाम खाली नहीं किए ताकि पंजाब के किसानों को मुश्किल में डाला जा सके। अब जबकि विवाद बढ़ गया है और केंद्र सरकार कठिन स्थिति में है, तो अपने मंत्री रवनीत बिट्टू के जरिए पंजाब के लोगों को गुमराह कर रही है। भाजपा ने जानबूझकर इस मुद्दे को खड़ा किया है।

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कंग ने भाजपा नेताओं से सवाल उठाए कि मुख्यमंत्री खुद दिल्ली जाकर इस मुद्दे का समाधान क्यों नहीं कर रहे। उन्होंने पूछा कि क्या भाजपा चाहती है कि पंजाब का मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री से गोदाम खाली करने की विनती करे। अगर ऐसा चाहते हैं, तो उन्हें स्पष्ट रूप से कहना चाहिए कि मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री से गुहार लगानी होगी।

कंग ने बताया कि मार्च से ही पंजाब के खाद्य आपूर्ति विभाग ने एफसीआई और केंद्रीय मंत्रालय को अनाज उठान के लिए पत्र लिखे हैं, लेकिन केंद्र सरकार पिछले नौ महीनों से कुंभकर्ण की नींद सो रही है। उन्होंने तिथियों का उल्लेख करते हुए बताया कि पंजाब खाद्य आपूर्ति विभाग ने पहली बार 5 मार्च को एफसीआई को पत्र लिखा, इसके बाद 11, 13, 19, और 22 मार्च को पत्र भेजे गए। जून में 14 और 27 तारीख को पत्र भेजे गए और 3 सितंबर को भी पत्र भेजा गया।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी 25 सितंबर को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से बात की और 30 सितंबर को दिल्ली में उनसे मिले। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से भी मुलाकात की। कंग ने भाजपा को चुनौती दी कि वे बताएं कि मुख्यमंत्री और किससे मिलें।

कंग ने कहा कि मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद प्रह्लाद जोशी ने दावा किया कि अक्टूबर में 20 लाख मीट्रिक टन अनाज उठाया जाएगा, जबकि मंडियों में 185 लाख मीट्रिक टन अनाज आने की उम्मीद है। उन्होंने पूछा कि समय पर गोदाम खाली क्यों नहीं किए गए।

कंग ने बताया कि भाजपा नेता भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा धान की खरीद के लिए जारी किए गए 44,000 करोड़ रुपये की क्रेडिट कंट्रोल लिमिट (CCL) को एक उपकार के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि वास्तव में यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह खरीद और भंडारण का प्रबंधन करे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब सरकार की छवि खराब कर अपनी विफलताओं को छिपाना चाहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा किसानों और व्यापारियों से बदला ले रही है और पंजाब के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।

कंग ने पंजाब सरकार और राज्य के अधिकारियों की तारीफ करते हुए कहा कि 28 अक्टूबर को 5 लाख मीट्रिक टन अनाज उठाया गया और भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार की कठिनाइयों के बावजूद पंजाब सरकार अपने किसानों, व्यापारियों और मिलरों को कोई समस्या नहीं होने देगी। “हम उनके साथ खड़े हैं,” उन्होंने कहा।

वहीं दूसरी ओर, शिरोमणि अकाली दल ने मंगलवार को कहा कि आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों ही पंजाब के किसानों को उनके धान की फसल की समय पर खरीद न होने के कारण हो रही परेशानियों के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं, जिससे उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर अपनी फसल बेचनी पड़ रही है।

वरिष्ठ अकाली नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा, “यदि दोनों पार्टियों ने समय पर अपनी जिम्मेदारी निभाई होती, तो वर्तमान कृषि संकट टल सकता था।” उन्होंने कहा, “ये दोनों पार्टियाँ किसान आंदोलन के विरोध में किसानों से बदला ले रही हैं और एक-दूसरे के साथ मिली हुई हैं।”

डॉ. चीमा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संकट का समाधान करने के बजाय, AAP और BJP सस्ती राजनीति का सहारा ले रही हैं और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रही हैं। उन्होंने इन प्रेस कांफ्रेंस को “तमाशा” बताते हुए कहा, “ऐसे प्रयासों से उन किसानों की तकलीफें कम नहीं होंगी जो मंडियों में पीड़ित हैं और अपनी उपज को बाज़ार दर से कम पर बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं।”

उन्होंने दोनों पार्टियों से आह्वान किया कि वे मिलकर बैठें और किसानों की समस्याओं का समाधान करें। साथ ही, धान की खरीद, बासमती का उचित मूल्य, पिछले साल का धान उठाने और आगामी फसल के लिए डीएपी खाद की उचित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल व्यवस्था की जाए।

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