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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

सर्दियों से पहले पराली प्रबंधन पर केंद्र सरकार सक्रिय: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने और टिकाऊ खेती पर जोर

23 जून 2026, नई दिल्ली: सर्दियों से पहले पराली प्रबंधन पर केंद्र सरकार सक्रिय: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने और टिकाऊ खेती पर जोर – दिल्ली-एनसीआर में हर वर्ष सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने समय रहते व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में कृषि भवन, नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की संयुक्त अध्यक्षता में पराली प्रबंधन (स्टबल मैनेजमेंट) को लेकर एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी खरीफ फसल की कटाई के बाद पराली जलाने की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोकना और किसानों को इसके वैज्ञानिक एवं लाभकारी विकल्प उपलब्ध कराना था। सरकार का मानना है कि यदि पराली का उचित प्रबंधन किया जाए तो न केवल वायु प्रदूषण में कमी लाई जा सकती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाई जा सकती है और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है।

बैठक में संबंधित मंत्रालयों, राज्य सरकारों और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने किसानों तक आधुनिक कृषि यंत्रों की पहुंच बढ़ाने, पराली प्रबंधन से जुड़ी मशीनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने तथा जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई कि किसानों को समय पर तकनीकी सहायता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पराली जलाना केवल पर्यावरण का विषय नहीं है, बल्कि यह कृषि और किसानों के भविष्य से भी जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि किसानों को दंडात्मक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सहयोग और प्रोत्साहन के माध्यम से टिकाऊ कृषि पद्धतियों की ओर प्रेरित करना अधिक प्रभावी होगा।

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वहीं केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सभी संबंधित राज्यों और विभागों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पराली प्रबंधन की सफलता तभी संभव है, जब तकनीक, जागरूकता और प्रशासनिक समन्वय तीनों समान रूप से मजबूत हों।

विशेषज्ञों का मानना है कि पराली को जलाने के बजाय उसका उपयोग जैविक खाद, बायो-सीएनजी, बायोचार, पशु चारे, पैकेजिंग सामग्री और ऊर्जा उत्पादन जैसे कार्यों में किया जा सकता है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर भी मिल सकते हैं और कृषि अपशिष्ट का उपयोग एक उपयोगी संसाधन के रूप में किया जा सकेगा।

हर वर्ष अक्टूबर और नवंबर के दौरान पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाएं दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। इसी कारण केंद्र सरकार इस बार सर्दियों से पहले ही रणनीति बनाकर राज्यों के साथ समन्वित कार्रवाई पर जोर दे रही है।

कुल मिलाकर, पराली प्रबंधन को लेकर आयोजित यह उच्च स्तरीय बैठक इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार प्रदूषण नियंत्रण और टिकाऊ कृषि को एक साथ आगे बढ़ाने के लिए गंभीर है। यदि बैठक में तय रणनीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया और किसानों को पर्याप्त सहयोग मिला, तो आने वाले समय में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आने के साथ-साथ दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिल सकता है।

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