BRICS देशों ने कृषि का नया रोडमैप तैयार किया, ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ पर बनी सहमति; शिवराज बोले- दुनिया के लिए आशा और विश्वास का संदेश
15 जून 2026, इंदौर: BRICS देशों ने कृषि का नया रोडमैप तैयार किया, ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ पर बनी सहमति; शिवराज बोले- दुनिया के लिए आशा और विश्वास का संदेश – खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल कृषि जैसे वैश्विक मुद्दों पर ब्रिक्स( BRICS) देशों ने इंदौर से कृषि क्षेत्र के लिए एक नया रोडमैप तैयार किया है। BRICS देशों की कृषि मंत्रिस्तरीय और अधिकारी स्तरीय बैठकों के समापन पर सर्वसम्मति से ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ को स्वीकार किया गया, जिसमें कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, तकनीक-संचालित और किसान-केंद्रित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसलों पर सहमति बनी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौजूदा वैश्विक संकट और अनिश्चितताओं के दौर में BRICS देशों की यह बैठक पूरी दुनिया के लिए आशा, विश्वास और सामूहिक जिम्मेदारी का सशक्त संदेश लेकर आई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि समूह की अधिकारी और मंत्री स्तरीय दोनों बैठकें सफलतापूर्वक संपन्न हुई हैं। बैठक में सदस्य और सहयोगी देशों के करीब 60 विदेशी प्रतिनिधियों सहित लगभग 100 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि BRICS देश दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। वैश्विक कृषि भूमि का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा और विश्व खाद्यान्न उत्पादन में भी लगभग 42 प्रतिशत योगदान BRICS देशों का है। ऐसे में कृषि और खाद्य सुरक्षा के मुद्दों पर इन देशों की साझा रणनीति पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है।
चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर केंद्रित रहा मंथन
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बैठक में चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर व्यापक चर्चा हुई। इनमें खाद्य सुरक्षा और पौष्टिक आहार सुनिश्चित करना, BRICS देशों के बीच कृषि व्यापार और सहयोग को बढ़ावा देना, जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच रीजेनेरेटिव और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देना तथा कृषि और खाद्य प्रणालियों में नवाचार एवं आधुनिक तकनीक के उपयोग को मजबूत करना शामिल है।
उन्होंने कहा कि बैठक के केंद्र में यह विचार रहा कि दुनिया के सभी लोगों को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन मिले तथा जो किसान दुनिया का पेट भरता है उसकी आजीविका भी सुरक्षित और समृद्ध हो। इसी उद्देश्य से छोटे और सीमांत किसानों की चुनौतियों पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें कृषि आदानों की उपलब्धता, ऋण, बाजार तक पहुंच और उचित मूल्य जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
किसान-केंद्रित है ‘इंदौर डिक्लेरेशन’
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार संयुक्त घोषणा पत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया और इंदौर में पारित होने के कारण इसे ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ नाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस घोषणा पत्र का केंद्र किसान है। इसमें खाद्य सुरक्षा, पोषण, कृषि व्यापार, निवेश, नवाचार, जलवायु-सहनीय खेती और सतत कृषि विकास को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि यह केवल सहमति का दस्तावेज नहीं बल्कि BRICS देशों की सामूहिक इच्छाशक्ति, साझा उत्तरदायित्व और कृषि के माध्यम से सुरक्षित, समृद्ध और टिकाऊ भविष्य के निर्माण का संकल्प है। सदस्य देशों ने इस घोषणा पत्र में शामिल सभी पहलों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए मिलकर कार्य करने पर भी सहमति जताई है।
BRICS देशों ने शुरू की चार नई वैश्विक पहलें
बैठक में कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए चार महत्वपूर्ण संस्थागत पहलों की घोषणा की गई।
पहली पहल BRICS Network of Centres of Excellence on Agro-Ecology and Regenerative Agriculture की स्थापना है। यह नेटवर्क प्राकृतिक, जैविक और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों पर संयुक्त अनुसंधान, ज्ञान साझा करने और क्षमता निर्माण का मंच बनेगा। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत लंबे समय से प्राकृतिक खेती और रसायनों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देता रहा है और अब BRICS देशों ने भी इसकी महत्ता को स्वीकार किया है। भारत में इस नेटवर्क के तहत मोदीपुरम स्थित भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
दूसरी बड़ी पहल BRICS Network on Digital Agriculture है। यह नेटवर्क आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भू-स्थानिक तकनीक, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा आधारित कृषि समाधानों के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देगा। इसका समन्वय भारत में IIT दिल्ली द्वारा किया जाएगा।
तीसरी पहल Global Forum on Farmers’ Rights in Seed Systems की स्थापना है। इसका उद्देश्य किसानों के बीज संबंधी अधिकारों की रक्षा करना, देशी बीजों का संरक्षण करना और पारंपरिक कृषि ज्ञान को सुरक्षित रखना है। मंत्री ने कहा कि आधुनिक बीजों के साथ-साथ पारंपरिक और देशी बीजों को बचाना भी खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता के लिए आवश्यक है।
चौथी पहल BRICS AgriN (Agro Inputs, Genetic Resources and Information Network) है, जो सदस्य देशों के बीच कृषि आदानों, बीजों और आनुवंशिक संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करेगा। इसके माध्यम से सूचना साझा करने, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
अनुसंधान से खेत तक पहुंचेंगी नई तकनीकें
बैठक में पहले से संचालित BRICS Agricultural Research Platform को और मजबूत बनाने पर भी सहमति बनी। इसे एक सशक्त ‘Knowledge to Action Hub’ के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि कृषि अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों तक पहुंच सके। मंत्री ने कहा कि यही वास्तविक ‘लैब टू लैंड’ मॉडल है, जिसमें शोध केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर खेतों तक पहुंचे।
कृषि व्यापार और सहयोग को मिलेगी नई दिशा
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि BRICS देशों ने निष्पक्ष, पारदर्शी और समावेशी बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। बैठक के दौरान BRICS Grain Exchange जैसी पहलों पर भी विचार-विमर्श हुआ। इसके अलावा विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकों में कृषि व्यापार को आसान बनाने, कस्टम संबंधी बाधाओं को कम करने, अनुसंधान और तकनीक के आदान-प्रदान तथा निवेश बढ़ाने पर चर्चा की गई।
जलवायु परिवर्तन और फूड लॉस पर भी बनी रणनीति
मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। ऐसे में रीजेनेरेटिव फार्मिंग और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अल-नीनो जैसी मौसमी परिस्थितियों के प्रभावों और उनसे निपटने के लिए BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में कटाई से बाजार तक होने वाली खाद्यान्न हानि (फूड लॉस) को कम करने के उपायों पर भी विचार किया गया। इसके अलावा कार्बन क्रेडिट, कार्बन-संवेदनशील खेती और सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी।
किसानों को सस्ती दरों पर मिलती रहेगी खाद
उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि किसानों को यूरिया 266 रुपये प्रति बोरी और डीएपी 1350 रुपये प्रति बोरी की दर से उपलब्ध कराई जा रही है तथा बढ़ी हुई लागत का अतिरिक्त भार सरकार स्वयं वहन कर रही है।
युवाओं और महिलाओं की भागीदारी पर जोर
बैठक में कृषि क्षेत्र में युवाओं और महिलाओं की भूमिका को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि एग्री-स्टार्टअप, एग्री-बिजनेस और तकनीक आधारित सेवाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में युवा कृषि क्षेत्र से जुड़ रहे हैं। BRICS देशों के बीच अनुभवों और नवाचारों का आदान-प्रदान कर इस प्रवृत्ति को और मजबूत किया जाएगा।
इंदौर बना वैश्विक कृषि कूटनीति का केंद्र
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इंदौर की मेजबानी और मालवा के आतिथ्य की सभी विदेशी प्रतिनिधियों ने सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने मेघदूत गार्डन में वृक्षारोपण कर ‘BRICS वाटिका’ की स्थापना की। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार और विभिन्न केंद्रीय विभागों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन ‘टीम इंडिया’ और ‘होल ऑफ गवर्नमेंट एप्रोच’ की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने इंदौर को वैश्विक कृषि कूटनीति के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में स्थापित किया है।
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