धान किसानों के लिए बड़ी खबर: अमेज़न खरीदेगा 6.85 लाख+ कार्बन क्रेडिट
23 अप्रैल 2026, ठाणे: धान किसानों के लिए बड़ी खबर: अमेज़न खरीदेगा 6.85 लाख+ कार्बन क्रेडिट – द गुड राइस अलायंस (टीजीआरए) ने घोषणा की है कि उसने भारत में धान खेती से होने वाले मीथेन उत्सर्जन में कमी से जुड़े उच्च-विश्वसनीयता वाले कार्बन क्रेडिट्स के लिए अमेज़न के साथ दीर्घकालिक ऑफटेक समझौता किया है। यह साझेदारी जलवायु-स्मार्ट धान उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ हजारों लघु किसानों की आय और आजीविका को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
पारंपरिक धान खेती, जिसमें खेतों को लगातार पानी से भरा रखा जाता है, वैश्विक मीथेन उत्सर्जन का लगभग 8 से 10 प्रतिशत हिस्सा है। कृषि क्षेत्र में पशुधन के बाद धान खेती मीथेन उत्सर्जन का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। भारत दुनिया में धान उत्पादन क्षेत्रफल के मामले में सबसे बड़ा देश है और इससे 10 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। भारत वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा मीथेन उत्सर्जक भी है।
इस समझौते के तहत अमेज़न परियोजना के प्रारंभिक क्रेडिटिंग चरण में प्राथमिक खरीदार की भूमिका निभाएगा। कंपनी ने 6,85,000 मीट्रिक टन से अधिक CO2 समतुल्य कार्बन क्रेडिट्स खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि समझौते की वित्तीय राशि सार्वजनिक नहीं की गई है।
टीजीआरए का कार्यक्रम लघु धान किसानों के साथ मिलकर बेहतर जल प्रबंधन तकनीकों के माध्यम से मीथेन उत्सर्जन कम करने पर काम करता है। इसमें ऑल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग (AWD) और डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) जैसी तकनीकें शामिल हैं। इन तकनीकों से खेतों में लगातार जलभराव कम होता है, जिससे मीथेन उत्सर्जन घटता है। मीथेन की तापवर्धक क्षमता कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में 27 गुना से अधिक मानी जाती है, इसलिए निकट अवधि में इसकी कटौती बेहद महत्वपूर्ण है।
यह पहल भारत के कई राज्यों में संचालित हो रही है और 13,000 से अधिक लघु किसानों के साथ 35,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में काम कर रही है। किसानों को कृषि तकनीकी प्रशिक्षण, फील्ड स्तर पर सहायता और वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाते हैं ताकि वे टिकाऊ खेती पद्धतियों को अपनाएं। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल उत्सर्जन घटाना ही नहीं, बल्कि उत्पादन बढ़ाना, लागत कम करना और जलवायु जोखिमों के प्रति किसानों की क्षमता बढ़ाना भी है।
टीजीआरए के बोर्ड निदेशक तथा बायर दक्षिण एशिया में कार्बन पहल प्रमुख सुहास जोशी ने कहा कि यह समझौता वैज्ञानिक रूप से मापे गए मीथेन न्यूनीकरण क्रेडिट्स की बढ़ती मांग को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि संस्था का मुख्य लक्ष्य वास्तविक और सत्यापित जलवायु परिणाम देना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि मूल्य सृजन के केंद्र में छोटे किसान रहें।
कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसका विज्ञान-आधारित मापन, रिपोर्टिंग और सत्यापन (MRV) ढांचा है। उत्सर्जन कटौती का आकलन खेत स्तर पर प्रत्यक्ष मीथेन मापन के माध्यम से किया जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (IRRI) के सहयोग से किया जाता है। इसे डिजिटल मॉनिटरिंग टूल्स और वेरा के वेरिफाइड कार्बन स्टैंडर्ड (VCS) के तहत VM0051 पद्धति द्वारा तीसरे पक्ष से सत्यापित किया जाता है।
टीजीआरए भविष्य में उत्सर्जन मापन के लिए बायोजियोकेमिकल मॉडल के उपयोग की दिशा में भी काम कर रहा है, जिसे आवश्यक परीक्षण और मान्यकरण के बाद लागू किया जाएगा। इससे कार्यक्रम की वैज्ञानिक विश्वसनीयता और विस्तार क्षमता और मजबूत होने की उम्मीद है।
अमेज़न में सस्टेनेबिलिटी सॉल्यूशंस एंड सर्विसेज की निदेशक मिशेल जॉली ने कहा कि मीथेन ऐसा प्रदूषक है जिस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है और कृषि क्षेत्र उत्सर्जन घटाने का बड़ा अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह समझौता उच्च गुणवत्ता वाले कार्बन क्रेडिट्स के प्रति अमेज़न की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो फील्ड मापन, व्यवहार परिवर्तन के दस्तावेजी प्रमाण, रिमोट सेंसिंग सत्यापन और वैज्ञानिक मॉडलिंग से समर्थित हैं।
कार्यक्रम का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर निरंतर संपर्क पर आधारित है। टीजीआरए प्रत्येक फसल मौसम में फील्ड अधिकारियों के कई दौरों के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष मार्गदर्शन देता है। इसके साथ भू-टैग और समय-चिह्नित फोटो रिकॉर्ड भी रखे जाते हैं। इस डेटा का मिलान उपग्रह आधारित मिट्टी की नमी और जल प्रबंधन रिकॉर्ड से किया जाता है, जिससे प्रत्येक कार्बन क्रेडिट के लिए मजबूत ऑडिट ट्रेल सुनिश्चित होता है।
मीथेन कटौती के अलावा, टीजीआरए की बेहतर सिंचाई पद्धतियां सिंचाई जल उपयोग को 30 प्रतिशत तक कम कर सकती हैं। जहां कई परियोजनाएं जल बचत का अनुमान मॉडल के आधार पर लगाती हैं, वहीं टीजीआरए मापन-आधारित दृष्टिकोण अपनाने का दावा करता है।
सुहास जोशी ने कहा कि धान खेती में मीथेन कटौती निकट अवधि में वैश्विक तापमान वृद्धि को धीमा करने के सबसे तेज अवसरों में से एक है और अमेज़न जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी से विज्ञान-आधारित समाधानों का तेजी से विस्तार संभव होगा, जिससे किसानों और जलवायु दोनों को लाभ मिलेगा I
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