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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

किसानों को बड़ा तोहफा! रबी की 6 फसलों की MSP बढ़ी, गेहूं ₹2,610 और कुसुम ₹7,215 प्रति क्विंटल हुई

02 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: किसानों को बड़ा तोहफा! रबी की 6 फसलों की MSP बढ़ी, गेहूं ₹2,610 और कुसुम ₹7,215 प्रति क्विंटल हुई – किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए सभी 6 प्रमुख रबी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना और उनकी आय में बढ़ोतरी सुनिश्चित करना है।

सरकार के फैसले के बाद कुसुम की MSP में सबसे ज्यादा ₹675 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद रेपसीड एवं सरसों की MSP ₹413 और मसूर की MSP ₹390 प्रति क्विंटल बढ़ाई गई है। गेहूं की MSP में ₹25 प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है। नई दरों के मुताबिक गेहूं की MSP ₹2,610 और कुसुम की MSP ₹7,215 प्रति क्विंटल हो गई है।

रबी फसलों की नई MSP, यहां देखें पूरी लिस्ट

क्र.सं.फसलेंएमएसपी आरएमएस 2027-28उत्पादन की लागत* (आरएमएस)
2027-28
लागत की तुलना में मार्जिन
(प्रतिशत में)
एमएसपी आरएमएस 2026-27एमएसपी में वृद्धि (पूर्ण)
1गेहूं26101264106258525
2जौ22861447582150136
3चना5958375159587583
4मसूर73903854927000390
5रेपसीड और सरसों66133367966200413
6कुसुम72154810506540675

उत्पादन लागत पर 50% से 106% तक का मार्जिन

शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, सरकार की नीति किसानों को उनकी औसत उत्पादन लागत (A2+FL) पर कम से कम 50 प्रतिशत या उससे अधिक का लाभ देने की है। रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए घोषित MSP में अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर 50 प्रतिशत से लेकर 106 प्रतिशत तक का मार्जिन दिया गया है। इसमें गेहूं पर 106 प्रतिशत, रेपसीड एवं सरसों पर 96 प्रतिशत और मसूर पर 92 प्रतिशत का मार्जिन शामिल है।

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MSP खरीद पर भी बढ़ा भुगतान

केंद्रीय मंत्री ने यूपीए सरकार और मोदी सरकार के कार्यकाल के आंकड़ों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, यूपीए सरकार के 10 वर्षों यानी 2004-05 से 2013-14 के दौरान 6 प्रमुख रबी फसलों की MSP खरीद पर किसानों को कुल ₹2.65 लाख करोड़ का भुगतान किया गया था। वहीं मोदी सरकार के कार्यकाल में 2014-15 से 2025-26 तक यह राशि बढ़कर ₹8.36 लाख करोड़ हो गई। इसी तरह रबी फसलों की कुल खरीद भी यूपीए सरकार के दौरान 2,302 लाख मीट्रिक टन (LMT) से बढ़कर मोदी सरकार के दौरान 3,921 लाख मीट्रिक टन हो गई।

दलहन खरीद में भी बढ़ोतरी

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि कांग्रेस सरकार के 10 वर्षों में देश में 6 लाख मीट्रिक टन दलहन की खरीद की गई थी। वहीं मोदी सरकार के दौरान यह बढ़कर 2 करोड़ 20 लाख मीट्रिक टन हो गई है। उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान में लगभग 60 लाख मीट्रिक टन दालों का आयात होता है। घरेलू स्तर पर दलहन उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए राष्ट्रीय दलहन मिशन के तहत चना और मसूर जैसी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

धान कटाई के बाद खाली खेतों में उगाई जाएंगी दलहन फसलें

दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि मंत्रालय ने ‘राइस फेलो एरिया’ यानी धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया है। इन खेतों में किसानों को दलहनी फसलें लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्रालय की ओर से ऐसे किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी परामर्श और विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य दलहन का रकबा बढ़ाना और घरेलू उत्पादन को मजबूत करना है।

तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर जोर

खाद्य तेलों के आयात बिल को कम करने और देश को तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से रेपसीड एवं सरसों की MSP में ₹413 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। वहीं असिंचित, कम उपजाऊ और विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में पैदा होने वाली कुसुम की फसल की MSP में सबसे ज्यादा ₹675 प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है। इससे इन क्षेत्रों में किसानों को कुसुम की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

जौ की MSP ₹136 बढ़ी

जौ के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इसकी MSP में ₹136 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। अब जौ की नई MSP ₹2,286 प्रति क्विंटल होगी। शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, वर्ष 2025-26 में देश को 1.13 लाख मीट्रिक टन जौ का आयात करना पड़ा था। उन्होंने बताया कि जौ कम पानी में तैयार होने वाली फसल है। ऐसे में इसके उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात को कम करने के उद्देश्य से इसकी MSP बढ़ाई गई है।

राज्यों के लिए अलग-अलग रबी कार्ययोजना

कृषि मंत्रालय ने राज्यों की जरूरत और जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग रबी कार्ययोजना तैयार की है। इसके लिए राज्यों के अधिकारियों और मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श किया गया। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे सूखे की स्थिति वाले राज्यों के लिए सूखा-प्रतिरोधी फसलों और विशेष उपायों पर जोर दिया गया है। वहीं मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे पर्याप्त जल उपलब्धता वाले राज्यों के लिए सघन उत्पादन पर केंद्रित रबी रणनीति तैयार की गई है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का उद्देश्य किसानों का कल्याण, उनके जीवन स्तर में सुधार और देश को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।

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