राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भारत में 20वीं पशुधन गणना: देश में 193.50 करोड़ गायें, 109.85 करोड़ भैंसें, 74.26 करोड़ भेड़ें और 148.87 करोड़ बकरियाँ

19 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: भारत में 20वीं पशुधन गणना: देश में 193.50 करोड़ गायें, 109.85 करोड़ भैंसें, 74.26 करोड़ भेड़ें और 148.87 करोड़ बकरियाँ – भारत में पशुधन क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को दर्शाने वाली 20वीं पशुधन गणना के अनुसार, देश में कुल पशुधन आबादी में गाय, भैंस, भेड़ और बकरियों की संख्या बेहद महत्वपूर्ण स्तर पर पहुँच चुकी है। इस गणना के अनुसार पूरे भारत में कुल 193.50 करोड़ गायें (कैटल), 109.85 करोड़ भैंसें, 74.26 करोड़ भेड़ें और 148.87 करोड़ बकरियाँ दर्ज की गई हैं। यह आंकड़े राज्य और केंद्र शासित प्रदेशवार पशुधन वितरण की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

पशुधन गणना एक पूर्ण गणना प्रक्रिया है, जिसके तहत पालतू पशुओं और पोल्ट्री पक्षियों की प्रजाति-वार तथा राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार संख्या का आकलन किया जाता है। इसमें विशेष रूप से गाय, भैंस, भेड़ और बकरियों जैसी प्रमुख पशुधन श्रेणियों को शामिल किया जाता है। 20वीं पशुधन गणना के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि आधारित आजीविका में पशुपालन की भूमिका लगातार बनी हुई है।

चूँकि पशुपालन राज्य का विषय है, इसलिए अलग-अलग राज्यों ने अपने स्तर पर पशुपालकों को सहायता देने के लिए कई योजनाएँ लागू की हैं। इनमें पशुओं के लिए रियायती दरों पर चारा और पशु आहार उपलब्ध कराना प्रमुख है। कई राज्य सरकारें ऐसी योजनाएँ चला रही हैं, जिनके तहत पशु आहार को किफायती मूल्य पर उपलब्ध कराया जाता है, ताकि दूध, मांस और ऊन उत्पादन से जुड़े किसानों और पशुपालकों की लागत कम हो सके।

इसके साथ ही, केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय राज्यों के प्रयासों को पूरक सहयोग भी प्रदान कर रहा है। मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission) और पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (Animal Husbandry Infrastructure Development Fund) जैसी योजनाएँ पशु आहार की उपलब्धता बढ़ाने, बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने और पशुपालकों की आय में वृद्धि करने में मदद कर रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य पशुपालन को अधिक संगठित, टिकाऊ और लाभकारी बनाना है।

Advertisement
Advertisement

20वीं पशुधन गणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में पशुधन की संख्या काफी अधिक है, जो इन राज्यों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि-पशुपालन आधारित जीवनशैली को दर्शाती है। वहीं, पूर्वोत्तर और केंद्र शासित प्रदेशों में पशुधन संख्या तुलनात्मक रूप से कम है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह आजीविका का अहम साधन बनी हुई है।

Advertisement
Advertisement

इन आंकड़ों के माध्यम से नीति-निर्माताओं को पशुपालन क्षेत्र के लिए बेहतर योजनाएँ बनाने, चारा प्रबंधन सुधारने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की आय स्थिर करने में मदद मिलेगी। यह जानकारी देश में पशुधन क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और भविष्य की जरूरतों को समझने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है।

यह जानकारी केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह द्वारा राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी गई।

Advertisements
Advertisement
Advertisement

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

Advertisements
Advertisement
Advertisement