इंडियन माइक्रोन्यूट्रिएंट मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन ने उठाया ‘वन नेशन, वन लाइसेंस’ का मुद्दा
09 फरवरी 2026, मुंबई: इंडियन माइक्रोन्यूट्रिएंट मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन ने उठाया ‘वन नेशन, वन लाइसेंस’ का मुद्दा – इंडियन माइक्रोन्यूट्रिएंट मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन (IMMA) ने 5–6 फरवरी 2026 को मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में आयोजित 6वें राष्ट्रीय फसल पोषण शिखर सम्मेलन एवं बी2बी एक्सपो का सफल आयोजन किया। सम्मेलन में नीतिगत सुधार, मृदा स्वास्थ्य और नियामकीय समन्वय प्रमुख विमर्श के विषय रहे।
“कन्वर्ज, कोलैबोरेट एंड को-क्रिएट” थीम के तहत आयोजित दो दिवसीय इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, नियामकों, वैज्ञानिकों, राज्य कृषि नेतृत्व, तथा कृषि-इनपुट निर्माताओं ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र भारत के फसल पोषण तंत्र को सुदृढ़ करने और कृषि-इनपुट क्षेत्र में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने पर रहा।
सम्मेलन का उद्घाटन श्री जयकुमार जितेंद्रसिंह रावल, माननीय मंत्री (मार्केटिंग एवं प्रोटोकॉल), महाराष्ट्र सरकार ने किया। डॉ. पी. के. सिंह, कृषि आयुक्त, भारत सरकार, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, ICAR, राज्य कृषि विभागों, विभिन्न राज्यों के कृषि आयुक्तों तथा प्रमुख कृषि-इनपुट कंपनियों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने नीतिगत संवाद और तकनीकी सत्रों में भाग लिया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. पी. के. सिंह ने सतत कृषि विकास के लिए मृदा स्तर पर हस्तक्षेप के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संतुलित पोषण और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (Integrated Nutrient Management) जैसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण उत्पादकता बढ़ाने, खेती की लागत कम करने, क्षतिग्रस्त भूमि को पुनर्स्थापित करने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विज़न 2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सरकार और उद्योग के बीच व्यावहारिक और समाधान-आधारित सहयोग अनिवार्य होगा, ताकि स्वस्थ मिट्टी, स्वस्थ फसल, स्वस्थ किसान और स्वस्थ उपभोक्ता सुनिश्चित किए जा सकें।
अपने उद्घाटन भाषण में श्री जयकुमार जितेंद्रसिंह रावल ने पिछले चार दशकों में माइक्रोन्यूट्रिएंट और विशेष उर्वरक उद्योग के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस उद्योग ने फसल उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने किसानों, बीज उद्योग, उर्वरक एवं माइक्रोन्यूट्रिएंट निर्माताओं, तथा कटाई के बाद प्रसंस्करण क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि एक एकीकृत कृषि मूल्य श्रृंखला का निर्माण हो सके। उन्होंने MSME आधारित उद्योगों के प्रति महाराष्ट्र सरकार और भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि अनुसंधान, विकास और नवाचार में निरंतर निवेश से ही भारत 2047 तक वैश्विक कृषि-इनपुट विनिर्माण में नेतृत्व प्राप्त कर सकता है।
सम्मेलन का एक प्रमुख नीतिगत निष्कर्ष ‘वन नेशन, वन लाइसेंस’ की दिशा में उद्योग की दोबारा उठाई गई मांग रही। इसके तहत राज्य सरकारों द्वारा विपणन अनुमति के लिए उपयोग किए जा सकने वाले केंद्रीकृत लाइसेंसिंग डेटा स्टैक की आवश्यकता पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि ऐसी व्यवस्था से नियामकीय दोहराव कम होगा, अनुपालन में देरी दूर होगी और बहु-राज्य संचालन करने वाले कृषि-इनपुट निर्माताओं के लिए व्यापार सुगमता बढ़ेगी। इसके साथ ही माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, बायोलॉजिकल्स और विशेष उर्वरकों के लिए तेज़ अनुमोदन प्रक्रिया, निर्यात-अनुकूल नीतियाँ तथा नकली और घटिया कृषि-इनपुट्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।
IMMA ने देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रगतिशील किसानों को फसल-विशेष नवाचार और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया, जिससे खेत स्तर पर माइक्रोन्यूट्रिएंट आधारित हस्तक्षेपों की भूमिका को रेखांकित किया गया।
सम्मेलन के दौरान IMMA पिच पार्टी का भी आयोजन किया गया, जिसमें स्टार्टअप्स और स्थापित कंपनियों द्वारा 16 नवीन फसल पोषण और कृषि-इनपुट उत्पाद प्रस्तुत किए गए। इस मंच ने उद्योग साझेदारियों, बाज़ार पहुंच और संभावित सहयोगियों एवं चैनल पार्टनर्स के साथ सीधा संवाद संभव बनाया।
IMMA के अध्यक्ष डॉ. राहुल मिर्चंदानी ने कहा कि संगठन ने भारत सरकार के साथ मिलकर एक केंद्रीकृत लाइसेंसिंग डेटा रिपॉजिटरी विकसित करने का प्रस्ताव रखा है, जिसे राज्य सरकारें एक सामान्य सर्वर के माध्यम से एक्सेस कर सकेंगी। उन्होंने बताया कि इससे बार-बार होने वाले अनुपालन को कम किया जा सकेगा, जबकि नियामकीय निगरानी बनी रहेगी, और ‘वन नेशन, वन लाइसेंस’ को व्यवहारिक रूप से लागू किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि IMMA ने ICAR के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत सदस्यों के लिए नियमित तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह उद्योग संगठन और ICAR के बीच अपनी तरह का पहला सहयोग है, जिसका उद्देश्य फसल पोषण क्षेत्र में नवाचार और व्यावसायीकरण को गति देना है।
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