जैन इरिगेशन कंपनी के चेक बाउंस मामले में 1.08 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश
02 मार्च 2026, जलगांव: जैन इरिगेशन कंपनी के चेक बाउंस मामले में 1.08 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश – जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड के चेक बाउंस मामले में जलगांव के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कर्नाटक की ‘राजेंद्र ट्रेड लिंक’ और उसके दो साझेदारों, मिथुन सुरेश जैन और प्रशांत प्रकाश जैन को दोषी करार दिया है। दोषियों को छह महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही, अदालत ने जैन इरिगेशन कंपनी को कुल 1 करोड़ 8 लाख 20 हजार 588 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला दर्शाता है कि मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत चेक बाउंस के मामलों में अदालतें कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई कर रही हैं।
कर्नाटक राज्य के हावेरी जिले के रानेबेन्नूर स्थित ‘राजेंद्र ट्रेड लिंक’ नामक फर्म के साझेदारी मिथुन जैन और प्रशांत जैन जैन इरिगेशन कंपनी से खरीदे गए माल के भुगतान के रूप में 54 लाख 10 हजार 294 रुपये का चेक दिया था। जब इस चेक को बैंक में जमा किया गया, तो वह अनादरित (बाउंस) हो गया। इसके बाद कंपनी द्वारा कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद आरोपियों ने राशि का भुगतान नहीं किया। अंततः, इस मामले में अदालत में मुकदमा दायर किया गया।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अपना फैसला सुनाया। फैसले के मुख्य बिंदु जैन इरिगेशन को 1,08,20,588 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। दोषियों को 6 महीने का साधारण कारावास दिया। कानूनी कार्रवाई के खर्च के रूप में जैन इरिगेशन को अतिरिक्त 15,000 रुपये देने का निर्देश अदालत ने दिये। इस मामले में जैन इरिगेशन कंपनी की ओर से एडवोकेट निशांत सुशील अत्रे ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा।
कानून का शिकंजा
चेक बाउंस होना ‘नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881’ की धारा 138 के तहत एक फौजदारी (Criminal) अपराध है। इसमें चेक की राशि के दोगुने जुर्माने और 2 साल तक की सजा का प्रावधान है। इस फैसले ने एक बार फिर यह रेखांकित किया है कि कानूनी लेनदेन में पारदर्शिता बनाए रखना कितना अनिवार्य है।
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