भारत इंसेक्टिसाइड्स लि. के उत्पाद धाक से फॉल आर्मी वर्म कीट का बेहतर नियंत्रण

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‘धाक’ से फॉल आर्मी वर्म कीट का बेहतर नियंत्रण

मक्का, कपास में लाभकारी

2 जुलाई 2020, इंदौर। फॉल आर्मी वर्म एक अमेरिकी कीट है, जिसे 2016 में अफ्रीका में देखा गया था. भारत में यह मई 2018 में कर्नाटक में देखा गया था. मई 2019 में यह देश के 14 अन्य प्रांतों में देखा गया, जिसमें तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, म.प्र., उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और गुजरात प्रमुख है. अब यह उत्तर भारत में फ़ैल रहा है, जिसका भारत इंसेक्टिसाइड्स लि. के उत्पाद धाक से बेहतर नियंत्रण किया जा सकता है.

कम्पनी के मार्केट डेवलपमेंट मैनेजर श्री एल. के त्यागी ने बताया कि फॉल आर्मी वर्म, मक्का की फसल को प्राथमिक अवस्था में बहुत नुकसान पहुंचाता है. यह मक्का की 50-90 प्रतिशत उपज को कम कर सकता है, वहीं कपास, सोयाबीन, गन्ना, धान, बाजरा और दालों में भी देखा गया है. जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय ने इस वर्ष म.प्र. में फॉल आर्मी वर्म आने की संभावना व्यक्त की है. चूँकि यह मक्का की फसल में किसी भी चरण में आ सकता है. इसलिए इसकी शुरुआत में ही रोकथाम करनी चाहिए.

कीट का प्रयोग जांचें

बोवनी के एक सप्ताह बाद इसकी जाँच करनी चाहिए. हर दो दिन के अंतराल में ङ्ग पैटर्न में खेत में चलकर देखना चाहिए. प्राथमिक अवस्था में इसकी पहचान का लक्षण बड़ी मात्रा में पत्तों का सूखना, पत्तियों में छेड़ और मक्का के दानों में प्रकोप दिखाई देता है.

उपयोग

इसे नियंत्रित करने के लिए भारत इंसेक्टिसाइड्स लि. ने धाक कीटनाशक पेश किया है जो स्पर्शी और अंत:प्रवाही है, जो कीट को मारता है. यह सीआइबी और आरसी से अनुमोदित है.धाक का उपयोग 150 मिली लीटर /एकड़ की दर से 200 लीटर पानी के साथ करना चाहिए। इसका 100 मिली लीटर/एकड़ की दर से सोयाबीन की बोवनी के 20-30 दिनों के अंदर छिड़काव करना चाहिए।

प्रथम 40 दिनों में कपास में प्रबंधन

कपास की फसल की बोवनी प्रति दिन बढ़ रही है. ऐसे में यह महत्वपूर्ण है कि हम हमारी प्राथमिकताएं फिर से सही निर्धारित करें. अमेरिका की राष्ट्रीय कपास परिषद का कहना है कि कपास की बोवनी के बाद पहले 40 दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, जो कपास की 50 प्रतिशत उत्पादकता को निर्धारित करते हैं. इसीलिए कपास उत्पादक किसान फसल को कीट मुक्त, सामान फसल और अच्छी बढ़वार रखना चाहता है।

कपास की फसल में 40 दिनों में खरपतवार के अलावा रस चूसक कीट का डर मुख्य कारण होता है. जिनमें एफिड्स से 18-20 प्रतिशत, जेसिड्स से 25-45 प्रतिशत और थ्रिप्स से 30-35 प्रतिशत उत्पादकता प्रभावित होती है. पहले गर्डल बीटल को नियंत्रित करने के लिए पारम्परिक ट्राइजोफॉस का छिड़काव किया जाता था, जो अब प्रतिबंधित हो चूका है. ऐसे में गर्डल बीटल, तना मक्खी और सेमीलूपर को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए भारत इंसेक्टिसाइड्स लि. का धाक कीटनाशक एक असाधारण उत्पाद है. यह बेहतर फसल स्थापना और पौधों की ताकत में मददगार होता है।

अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें मो.: 9685045529

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