यूरिया की तीन इकाइयों के लिये नई निवेश नीति को बढ़ाने की मंजूरी

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23 मार्च 2022, नई दिल्ली ।  यूरिया की तीन इकाइयों के लिये नई निवेश नीति को बढ़ाने की मंजूरीप्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने उर्वरक विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी हैजिसमें हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) के तीन संयंत्रों – गोरखपुरसिंदरी और बरौनी– के लिये नई निवेश नीति को विस्तार देने की बात कही गई है।

एचयूआरएल का 15 जून, 2016 को निगमीकरण हुआ था। वह कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल)एनटीपीसी लिमिटेड (एनटीपीसी) और इंडियन ऑयल कार्पोरेशन (आईओसीएल) की संयुक्त उपक्रम कंपनी है। एचयूआरएल 12.7 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष संस्थापित क्षमता वाले गैस-आधारित यूरिया संयंत्रों की स्थापना करके एफसीआईएल की गोरखपुर और सिंदरी इकाइयों तथा जीएफसीएल की बरौनी इकाई को पुनर्जीवित कर रहा है। इन तीन एचयूआरएल यूरिया परियोजनाओं की लागत 25,120 करोड़ रुपये है। एचयूआरएल की तीनों इकाइयों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति गेल द्वारा हो रही है।

एचयूआरएल के ये उत्कृष्ट संयंत्र सरकार की उस पहल का हिस्सा हैंजिसके तहत एससीआईएल/एचएफसीएल के बंद पड़े यूरिया संयंत्रों को दोबारा चालू किया जाना हैताकि यूरिया सेक्टर में आत्मनिर्भता प्राप्त की जा सके। तीनों संयंत्रों के चालू हो जाने से देश में 38.1 एलएमटीपीए स्वदेशी यूरिया उत्पादन बढ़ जायेगा तथा यूरिया उत्पादन में प्रधानमंत्री की भारत को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने की परिकल्पना को भी पूरा करने में सहायता होगी। इस परियोजना से न केवल किसानों को उर्वरक की उपलब्धता में सुधार आयेगाबल्कि देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ सड़करेलसहायक उद्योग आदि जैसे अवसंचरना विकास सहित क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में तेजी आयेगी।

इन तीनों इकाइयों में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकियां मौजूद हैं। इनका उद्देश्य है भारत के सात राज्यों– उत्तरप्रदेशबिहारझारखंडछत्तीसगढ़मध्यप्रदेशश्चिम बंगाल और ओडिशा– में यूरिया की मांग को पूरा करना।

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